Mar ०६, २०१९ १७:३१ Asia/Kolkata

इस कार्यक्रम में हम सरपुल ज़हाब की सैर करेंगे जहां किरमान शाह के भूकंप से सब से अधिक नुक़सान पहुंचा था लेकिन वह अब भी पूरी दृढ़ता के साथ इतिहास की डगर पर आगे बढ़ रहा है और पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है।

अगर कोई ईरान के किरमानशाह प्रान्त की यात्रा करे और सरपुल ज़हाब न जाए तो निश्चित रूप से बहुत अफसोस की बात होगी। वैसे यह संभव ही नहीं है कि कोई इस प्रान्त जाए और वहां के इतने खूबसूरत इलाक़े को भूल जाए। सरपुल ज़हाब , प्राचीन नगर " हलवान" के निकट बसा है और सासानी काल का एक क़िला भी उसके निकट ही मौजूद है। सरपुल ज़हाब दर अस्ल, ईरान का सीमावर्ती क़िला और चौकी था जो ईरान पर अरबों के आक्रमण के समय तबाह हो गया लेकिन अब यह नगर, तेहरान से इराक़ के पवित्र स्थलों की राह में पड़ता है इस लिए ज़मीनी रास्ते तीर्थ स्थलों के दर्शन के लिए जाने वालों के रास्ते में पड़ता है। सरपुल ज़हाब एक पहाड़ी आंचल में स्थित है और दालाहू नामक प्रसिद्ध पहाड़ और रीजाब नामक अत्यन्त सुन्दर क्षेत्र तथा आकर्षक मृगतृष्णा इसी इलाक़े में स्थित हैं।

 

सरपुल ज़हाब के  पास ही और दालाहू पर्वतों के आंचल में अत्यन्त सुन्दर गांव , पीरान बसा है जो ईरान की सैर करने वाले हर पर्यटक का मन मोह लेता है। इस गांव के आस पास घने जंगल हैं जिनमें ऊंचे ऊंचे पेड़ लगे हैं और उन पर इंजीर व अखरोट फले रहते हैं जो अत्यन्त सुन्दर दृश्य पैदा करते हैं। इसी लिए वहां जाने वाले हर पर्यटक का मन , कुछ देर इन घने पेड़ों की छांव में गुज़ारने के लिए मचल जाता है। इस गांव के पास ही एक अत्यन्त सुदंर झरना है जो इस गांव की सुन्दरता में चार चांद लगा देता है। पीरान झरने तक पहुंचने के लिए सरपुल ज़हाब से लगभग नौ किलोमीटर तक शालान नामक गांव की ओर चलना पड़ता है उसके बाद लगभग पंद्रह मिनट पैदल चलने के बाद उस खूबसूरत जगह पर पहुंचा जा सकता है जहां पीरान झरना स्थित है और जहां पहुंचने के बाद कानों में इस झरने की मधुर आवाज़ , रस घोलने लगती है। यहां पहुंच कर हर प्रायः पर्यटक आश्चर्य चकित हो जाते हैं किंतु अधिकांश लोगों को यह आशा नहीं होती है कि कम पानी वाले देश ईरान में 100 का कोई झरना नज़र आएगा।

 

ज़हाब पठार की चट्टानों का सीना चीरते हुए शोर मचाता और तेज़ी के साथ नीचे गिरते  पीरान झरने के पानी  को सामने देख कर पर्यटक इस सच्चाई को स्वीकार करने पर विवश हो जाता है। इस स्थान सैंकड़ों पर्वतारोही भी पहाड़ों पर इधर उधर चढ़ते उतरते नज़र आते हैं जो इस स्थान की सौन्दर्य को और बढ़ा देते हैं।

 

कुल मिलाकर सरपुल के आस पास का पहाड़ी इलाक़ा सुन्दरता से भरा हुआ है। उदारहण स्वरूप पाताक़ नामक एक गांव के जंगल में स्थित एक अत्यन्त सुन्दर पर्यटन स्थल है जो इमाम अब्बास के नाम से मशहूर है । स्वंय पाताक़ नामक गांव भी आकर्षण का केन्द्र है क्योंकि इस गांव में पर्यावरण की रक्षा पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है और गाम्रीणों तक तालाब का पानी सप्लाई किया जाता है जो स्वास्थ्य के मापदंडों पर पूरा उतरता है इसी लिए इस गांव को स्वच्छ गांव कहा जाता है।

इस इलाके में एक किला भी स्थित है जिसे ज़ीज मुनीजा कहा जाता है और यह किला पत्थर और सारूज कही जाने वाली विशेष प्रकार की ईंटों द्वारा बनाया गया है। इस क़िले का इतिहास एक हज़ार साल पुराना है। इसी तरह इस क्षेत्र में ताक़गिरा नामक एक शानदार शाही क़िला है जिसकी दालानों को पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है । इसी गांव के निकट माराव मृगतृष्णा स्थित है जो प्राकृतिक सुन्दरता का बेहद उत्कृष्ट नमूना है। इन सब चीज़ों ने मिल कर इस गांव को पयर्टकों के लिए अत्याधिक आकर्षण का केन्द्र बनाया दिया है और देश विदेश से बहुत से पर्यटक विशेष रूप से इस गांव की यात्रा करते हैं और प्राकृतिक सुन्दरता से आंनदित होते हैं।

 

सरपुल के आस पास जो सड़कें बनी हैं वह भी हमें प्रकृति की अछूती सुन्दरता की गोद में ले जाती हैं। उदाहरण स्वरूप , रीजाब नामक सड़क को पेश किया जा सकता है जो हमें रीजाब नाम के एक अत्यन्त सुन्दर इलाक़े तक ले जाती है। यह सड़क रीजाब नाम के एक गांव तक जाती है और सड़क के अंतिम छोर पर  " बाबा यादगार" का मज़ार है जहां तक पहुंचने के लिए थोड़ी दूर तक पैदल चलना  पड़ता है लेकिन पैदल चलने वालों को बाबा यादगार के मज़ार के अलावा भी कई सुन्दर दृश्य नज़र आते हैं। बाबा यादगार का मज़ार , दर्शन स्थल और पर्यटन के लिए अच्छी जगह है। यह वास्तव में सूफी संत का मज़ार है जहां विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है जो दरवेशों के कार्यक्रमों से काफी मिलता जुलता है।  यह मज़ार , दुर्गम और ऊंचे पहाड़ों के बीचो बीच स्थित है और उसके आस पास पुराने और ऊंचे ऊंचे पेड़ों और एक सोते ने इस स्थल को और अधिक सुन्दर व दर्शनीय बना दिया है।  इस मज़ार पर दर्शन के लिए जाने वाले हर पर्यटक के मन में इस सुन्दर स्थल की तस्वीर अमिट हो जाती है और इस स्थल का मनमोहक मौसम, हल्की हल्की ठंडी हवांए, सरपुल जहाब की कड़ी गर्मी में पर्यटकों को स्वर्ग का आभास देती हैं और हर पर्यटक बार बार इस जगह को देखना और वहां कुछ समय बिताना चाहता है।

 

सरपुल नगर के आास पास जैसा कि हमने बताया बहुत से दर्शनीय स्थल हैं लेकिन उनमें " आनूबानी नी" भीतलेख हैं जिनका अलग महत्व है। यह वास्तव में " लोलूबी" शासकों के काल से सबंधित अवशेष हैं । लोलूबी, वास्तव में ज़ागरोस पर्वत के आंचल में रहने वाली एक जाति थी और आर्यों से पहले अर्थात लगभग चार हज़ार आठ सौ साल पहले  इस इलाक़े में रहते थे। यह  आनूबानी नी , शिलालेख " मियान कल" नामक प्रसिद्ध चट्टान पर है और बहुत से लोगों का यह मानना है कि साइप्रस महान ने बीस्तून शिलालेखों  को , आनूबानी नी शिलालेख को देखने के बाद उससे प्रेरणा लेकर तैयार कराया था।

इन पहाड़ों , झरनों और एतिहासिक अवशेषों को देखने के बाद यदि हम सरपुल ज़हाब नगर के भीतर झांकना चाहें तो वहां भी देखने की बहुत सी चीज़े मिल जाएंगी। इस नगर में कई मज़ार हैं लेकिन अहमद बिन इस्हाक़ का मज़ार काफी मशहूर है। वह पैगम्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम हसन अस्करी अलैहिस्साम के कथनों को बयान करने वाले एक प्रसिद्ध वक्ता और धर्मगुरु थे जिनका सन 250 हिजरी क़मरी में सरपुल ज़हाब में स्वर्गवास हो गया था। जनता में उनका अत्याधिक महत्व था इसी लिए उनके स्वर्गवास के बाद उनका मज़ार, दर्शनस्थल बन गया। यह मज़ार भी देखने लायक़ है। इसे चौकोर बनाया गया है और मज़ार के ऊपर एक गुंबद भी बना है।

 

 

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद , सरपुल ज़हाब उन क्षेत्रों में शामिल हुआ जिन्हें युद्ध की बलि चढ़ना पड़ा। ईरान के खिलाफ सद्दाम के युद्ध में इस क्षेत्र को बहुत नुकसान उठाना पड़ा लेकिन इस क्षेत्र के लोगों ने डट कर सद्दाम का मुक़ाबला किया। इस क्षेत्र के लोगों के बलिदानों और वीरता की कहानी , इस क्षेत्र में जगह जगह पर मौजूद खंडहर आज भी सुनाते हैं। इन खंडहरों को युद्ध के चिन्ह और यादगार के तौर पर सुरक्षित रखा गया है। सरपुल जहाब के लोगों ने अपनी जान की क़ीमत पर देश की सीमा की रक्षा की और दुश्मनों के सामने मैदान नहीं छोड़ा। सरपुल ज़हाब गर्म नगर है लेकिन इस नगर की गरमी को नगर के आसपस स्थित खजूर के बागों से निकलने वाली ठंडी हवाओं के बल पर सहन किया जा सकता है। यह खजूर के पेड़ आज भी कुछ इस तरह से सिर उठाए खड़े हैं मानो वह सीमा रक्षक हों और ईरान की सीमाओं की रक्षा के लिए मुस्तैदी से खड़े हों।

 

 

इस तरह से सरपुल ज़हाब , प्रकृति की सुन्दरता के साथ ही , इतिहास का पाठ अपने भीतर समेट हुए हैं , तथा धर्म की सुगंध के साथ ही साथ इस क्षेत्र में ईरानी जियालों की वीरता के नमूने भी नज़र आते हैं। इस तरह से सरपुल जहाब की यात्रा करने वाला पर्यटक ईरान के कई रंगों को एक साथ , एक जगह देख लेता है और इतिहास , प्रकृति और बहुत सी चीज़ें , उसे ईरान का रूप दिखाती नज़र आती हैं। इस तरह से  किसी भी पर्यटक के लिए सरपुल ज़हाब की यात्रा एक यादगार यात्रा हो सकती है जो वर्षों तक उसके मन व मस्तिष्क पर छायी रह सकती है। (Q.A.)