शुभकामना
Apr ११, २०१६ १५:२७ Asia/Kolkata
दूर हटे बीते साल का अंधेरासबके लिए बने एक सवेरा।
फूलों की ख़ुशबू मिले हर इंसान कोख़ुशगवार ज़िन्दगी मिले हर इंसान को। आतंक की अर्थी उठे इस देश मेंहम दिखें हमेशा भारतीयता के वेश में। नफ़रत ख़ाक में मिलेहर जगह प्यार के फूल खिलें। हम हर इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाए। छोड़कर हम दुश्मनी को हर भारतीय को गले लगाएं। भूल जाएं हम गिले शिकवे की रात कोदिल में बिठाएं हम गले मिलन की बात को। मिट जाए बीते साल की निराशाहर इंसान को मिले आशा ही आशा।जसीम अहमद रायल लिसनर्ज़ क्लबढोली सकरा, मुज़फ़्फ़रपुर