ईरान भ्रमण- 3
इस समय हम ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 500 किलोमीटर दूर हैं।
जी हां ईरान के सुदूर पश्चिमी छोर पर जिसकी सीमा इराक़ से मिलती है। जी हां हम किरमानशाह में हैं। प्राचीन समय में इसे बाख़्तरान कहते थे। आपके लिए यह जानना भी रोचक होगा कि ईरान का सबसे गर्म और सबसे ठंडा शहर किरमानशाह प्रांत में है। पावे शहर की तारीफ़ मुझे किरमानशाह और सरेपुले ज़हाब के बाद इस शहर खींच लायी। आपने सुना होगा कि पावे शहर को हज़ार मासूले भी कहते हैं। इसी तरह आप उत्तरी ईरान के मासूले गांव के बारे में जानते होंगे जहां घर सीढ़ी की डिज़ाइन में इस प्रकार बने हैं कि ऊपर वाले घर का आंगन नीचे वाले घर की छत होती है।
पावे शहर की जलवायु संतुलित है। अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से किरमानशाह प्रांत के ठंडे क्षेत्र के सुंदर शहरों में है। इस सुंदर शहर के उत्तर और पूर्वोत्तर में कुर्दिस्तान प्रांत का मरीवान ज़िला, पूरब और दक्षिण में जवानरूद ज़िला और पश्चिम में इराक़ स्थित है।
सीरवान नदी किरमानशाह प्रांत की सबसे अहम नदी है। यह नदी सीरवान सनन्दज और सीरवान मरीवान नदियों के संगम से वजूद में आयी है। यह नदी पावे शहर से गुज़रती है। विभिन्न दर्रों से गुज़रते हुए यह इराक़ में स्थित सरदरबंदीख़ान झील में गिरती है।
क्षेत्र के अहम जंगलों के नाम मर्ख़ील, बूज़े और पेलन्गाने है। इन जंगलों में नाना प्रकार के साग, दवा में इस्तेमाल होने वाली वनस्पतियां और सुगन्धित फूल उगते हैं।
पावे ज़िले का एक सुदंर शहर नौसूद है। यह शहर इस ज़िले के पश्चिमोत्तर में ईरान-इराक़ की सीमा पर स्थित है। हर साल यह दर्शनीय शहर बड़ी संख्या में पर्यटकों की मेज़बानी करता है।
पावे ज़िले का एक और आकर्षक शहर नूदशे है। यह शहर गीवे नामक विशेष जूते के लिए मशहूर है। इस शहर में हाथ से विशेष प्रकार का जूता बुना जाता है। नूदशे शहर अख़रोट के बाग़ों और सुदंर प्रकति में घिरा हुआ है। इस शहर के लोग मेहरबान हैं और अपनी मेहमान नवाज़ी के लिए मशहूर हैं।
अब आप उत्तरी ईरान के मासूले गांव से कई गुना बड़े एक शहर की कल्पना करें जो पहाड़ की ऊंचाई पर बसा है। जहां पहाड़ के सबसे ऊंचे भाग से पहाड़ के दामन तक भरे हुए हैं और शहरी वास्तुकला का अद्वितीय नज़ारा देखने में आता है। न सिर्फ़ पावे शहर बल्कि आसपास के सभी गांव में यही विशेषता नज़र आती है। इसकी मिसाल हजीज नामक गांव है जहां पैग़म्बरे इस्लाम के परपौत्र इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के भाई की क़ब्र है।
बल नामी मशहूर सुंदर झरना हजीज गांव में स्थित है। इस झरने का पानी खनिज लवण युक्त है। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि प्राकृति के साथ समन्वित रूप से जीवन की बेहतरीन मिसाल पावे शहर और उसके आस-पास के गांव हैं। पावे शहर ज़ाग्रुस पर्वत श्रंख्ला के शाहू नाम के एक ऊंचे व सुंदर पहाड़ पर बसा है। पहाड़ के आंचल में दर्रे में अख़रोट, अंजीर और अनार सहित दूसरे बहुत से फलों के बाग़ से शाहू के सौंदर्य में चार चांद लग गए हैं। कभी कभी गर्मी के मौसम के मध्य तक शाहू की चोटी पर बर्फ़ मौजूद रहती है।
पावे और हूरामान की गगन चुंबी चोटी पर वानस्पतिक विविधता देखने लायक़ है। ईरानी कैलेन्डर के दूसरे महीने उर्दीबहिश्त में जो अप्रैल और मई में पड़ता है, इन चौटियों में रिंग बिरंगे फूल खिले होते हैं। इन्हीं फूलों में एक घंटी के आकार वाले ट्यूलिप फूल भी खिलते हैं। ट्यूलिप फूल की यह प्रजाति शाहू की चोटी और पावेह के उस इलाक़े में उगते हैं जहां अग्निकुन्ड है।
जाइये नामक अग्निकुन्ड शाहू की चोटी पर स्थित है। यह अग्निकुन्ड सासानी शासन काल का बना है। यह अग्निकुन्ड उपासना का प्रतीक है। अब वहां बड़ी संख्या में घंटी की तरह नज़र आने वाले ट्यूलिप उगते हैं। ये फूल हरी भरी प्रकृति में इतने सुंदर दिखते हैं कि हर देखने वाले को अपनी ओर सम्मोहित कर लेते हैं।
नीचे की ओर लटके हुए ट्यूलिप के ये फूल जो दिखने में घंटी की तरह नज़र आते हैं, लाली लिए हुए नारंजी रंग के होते हैं। ये फूल ईरान की प्रकृति की बहुत मूल्यवान धरोर है। इस फूल के बारे में पौराणिक कथा मशहूर है। यहां के लोगों का मानना है कि जिस समय गेरस्यूज़ ने पवित्र मन वाले सियावश की गर्दन मारी उस समय ट्यूलिप की यह प्रजाती इस घटना की गवाह थी। इस दुखद घटना का ट्यूलिप पर असर पड़ा और ट्यूलिप लाल रंग का उगने लगा। दुख की वजह से ट्यूलिप की इस प्रजाती की गर्दन झुकी रहती है और सियावश की बेगुनाही की वजह से रोता है और उसका आंसू उससे निकलने वाला बिना रंग का शीरा होता है। इसी वजह से पावे और ऊरामानात में घंटी के आकार वाले ट्यूलिप को गुले अश्के सियावश अर्थात सियायश के दुख में आंसू बहाने वाला फूल कहते हैं।
ईरान की कुर्द जाति का मानना है कि जो भी इस फूल को तोड़ेगा उस पर ईश्वरीय कृपा व बर्कत के द्वार बंद हो जाएंगे। इसी वजह से इसे रोज़ी रोटी छीनने वाला फूल भी कहते हैं।
ईरान के इतिहास में इस दुर्लभ व सुदंर फूल का नज़ारा देखने में आता है। सासानी शासन काल की इमारतों के खंबों और इसी तरह ताक़े बुस्तान नामक प्राचीन धरोहर में सासानी शासक की प्रतिमा के पास भी ट्यूलिप फूल के सुंदर चित्र बने हुए हैं। कुल मिलाकर यह कि घंटी की तरह नज़र आने वाला ट्यूलिप का फूल सियावश के शोक में सिर झुकाए हुए है और यह पावे की ज़मीन को जिसने पवित्र रक्षा के काल में बहुत से सपूतों की क़ुर्बानी दी है, अपने वजूद से अमर शहीदों की याद दिलाता रहता है। यह फूल प्रेम, निर्मलता और शोक का संगम है जो इतना सुंदर होने के साथ साथ शोक में डूबा हुआ है।
अब आपको पावे से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गुफा ले चलते हैं जो ईरान की सबसे लंबी और एशिया की सबसे बड़ी पानी की गुफा है। इस गुफा में प्राकृतिक तरीक़े से पानी भरा रहता है इसीलिए इसे पानी की गुफा कहते हैं। इस गुफा का नाम क़ूरी क़िले है। इस गुफा के पहले भाग में विभिन्न आकार की सुंदर क़िन्दीलें मौजूद हैं। इनमें से हर क़िन्दील का विशेष कारण से नाम रखा गया है। मिसाल के तौर पर इस गुफा में एक क़िन्दील हज़रत मरयम की प्रतिमा की तरह नज़र आती है इसलिए जिस भाग में यह क़िन्दील है उस भाग को मरयम हॉल कहते हैं। गुफा के एक किलोमीटर भीतर एक हॉल है जिसमें दुनिया का सबसे सुंदर पानी का हौज़ है। इस जगह पर क़िन्दील पर्दे की शक्ल की है इनमें जिसे भी छुएं उससे किसी न किसी वाद्य यंत्र की आवाज़ आती है। इसी वजह गुफा के इस भाग का नाम बेथोविन हॉल है। ज़रा और आगे बढ़ने पर एक सुंदर हॉल है जिसे अरूस अर्थात वधु हॉल कहते हैं। इस हॉल में मौजूद क़िन्दीलें दुल्हन के लेबास की तरह चमकदार सफ़ेद क्रिस्टल की हैं। गुफा के 1700 मीटर भीतर एक सुंदर झरना है। अभी आम लोगों की इसे देखने के लिए पहुंच नहीं है। इस गुफा के अभी भी बहुत से भाग से पर्दा नहीं हटा है मुमकिन है और हिस्सा को लोगों की पहुंच के लिए तय्यार करें।
जो लोग सृष्टि के रचयता की अद्भुत सृष्टि के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं वे पावे का भ्रमण करें।