ईरान भ्रमण- 4
पश्चिमी ईरान का भ्रमण करने वाले हमेदान प्रांत के भ्रमण से ख़ुद को नहीं रोक सकते।
हमेदान ईरान की पहली शाही श्रंख्ला माद की राजधानी थी। इसके साथ ही इस शहर में दसियों मक़बरे और ऐतिहासिक स्रोतों की मौजूदगी से यह न सिर्फ़ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के प्राचीनतम शहरों की पंक्ति शामिल हो गया है।
हमदान में स्थित अलीसद्र नामक दुनिया की सबसे लंबी पानी से भरी गुफा पर्यटकों को इस शहर के भ्रमण के लिए प्रेरित करती है जहां से पर्यटक कभी न भूलने वाली याद लेकर जाते हैं। यह गुफा कबूद राहंग ज़िले में अलीसद्र गांव के निकट सारीक़िये पहाड़ में है। गुफा में घुमावदार दालान, अनेक ड्योढ़ी और विशाल तालाब हैं। इस गुफा को सिर्फ़ नाव से ही देखा जा सकता है।
दुनिया में मशहूर फ़्रांस की मोलिस और ऑस्ट्रेलिया की नाइट्स तथा बुकान गुफाओं जैसी हैरत में डालने वाली गुफाएं बहुत कम हैं लेकिन अलीसद्र गुफा को देखने के बाद आप इसके सौंदर्य की इन गुफाओं से तुलना करेंगे।
अलीसद्र गुफा का पानी इतना साफ़ है कि आम रौशनी में ख़ाली आंख से दस मीटर की गहराई तक पानी साफ़ नज़र आता है। चूंकि इस गुफा के पानी में विभिन्न प्रकार के नमक पाए जाते हैं इसलिए इसका पानी पीने योग्य नहीं है और कोई भी पशु इस गुफा में नहीं रहता। गुफा के कुछ भाग में छत से तलछट से बनी पशुओं और ज्योमितीय आकृतियां देखकर पर्यटक ख़्यालों की दुनिया में खो जाता है। दूसरी ओर गुफा के फ़र्श पर जहां पानी नहीं हैं, सूई, पत्तागोभी, छाते और फ़ालूदे की तरह नज़र आने वाली स्टलैग्माइट बनी हुयी है जिसे देखकर पर्यटक सम्मोहित हो जाता है। स्टलैग्माइट का दृष्य इतना सुंदर है कि उसे शब्दों में बयान करना मुमकिन नहीं है। इस गुफा में एक और ख़ास बात यह है कि इसके भीतर हवा पूरी तरह रुकी रहती है इसका अनुमान ऐसे लगाया जा सकता है कि अगर आप मोमबत्ती जलाएं तो उसकी लै तनिक भी हिलती डुलती नहीं है।
अब तक अलीसद्र गुफा में 14 किलोमीटर भीतर मार्ग का पता चला है लेकिन सिर्फ़ 4 किलोमीटर तक का मार्ग ही पर्यटकों के देखने योग्य है क्योंकि 4 किलोमीटर तक ही रौशनी का प्रबंध है। वास्तव में अलीसद्र गुफा को सृष्टि का उत्कृष्ट नमूना कहा जा सकता है। बिल्लौरी छतों वाली घुमावदार दालान, ड्योढ़ी, घुमावदार मार्ग, स्वच्छ पानी में नौकाविहार, पैदल चलने के लिए मार्ग, हज़ारों साल के प्राकृतिक कारण से बाज़, दो सर वाले शेर, सहित विभिन्न प्रकार आकृतियों वाली क़िन्दीलों की शब्दों के ज़रिए व्याख्या का हक़ अदा नहीं हो सकता। पर्यटक देखकर ही इसके सौंदर्य को महसूस कर सकता है।
हमदान शहर से 5 किलोमीटर की दूरी पर हरे भरे अब्बास आबाद दर्रे के अंत में केबल कार की व्यवस्था मौजूद है। यह केबल कार व्यवस्था गंजनामे नामक झरने और ऐतिहासिक शिलालेख के पास है इसलिए इस केबल कार व्यवस्था को गंज नामे केबल कार कहते हैं। हमेदान में अलीसद्र गुफा को देखने के बाद केबल कार पर सवारी का यादगार अनुभव होता है। यह केबल कार मीशान मैदानी क्षेत्र से अलवंद पहाड़ की एक चोटी तक जाती है। इसी तरह हमदान के गंजनामे स्पोर्ट्स व पर्यटन कॉम्पलेक्स की अनदेखी नहीं की जा सकती जो प्राकृतिक इतिहास के आकर्षण से संपन्न है। यह कॉम्पलेक्स हमेदान के पश्चिम में कुछ किलोमीटर पर गंजनामे मैदान में स्थित है।
गंजनामे कॉम्पलेक्स में मौजूद शिलालेख हख़ामनेशी बादशाह दारयूश और ख़शायार के दौर के हैं। यह अब्बास आबाद दर्रे के अंत में उकेरे गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र की जलवायु, अलवंद दर्रा, मीशान मैदान का सुंदर दृष्य देशी विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस पर्यटन गांव में एक ख़ूबसूरत झरना भी बहता है जो बहुत ऊंचा तो नहीं लेकिन बहुत चौड़ा है। इसी पर्यटन काम्पलेक्स में आप केबल कार, स्की पोस्ट, 200 मीटर लंबा संसपेन्शन ब्रिज और 500 मीटर लंबी ज़िप लाइन का आनंद ले सकते हैं।
अगर आप हमेदान गए और आपने मशहूर कवि व आत्मज्ञानी बाबा ताहिर उर्या के मक़बरे को नहीं देखा तो आपने अपने भ्रमण के साथ इंसाफ़ नहीं किया। बाबा ताहिर पांचवी हिजरी क़मरी के चौपाई के मशहूर शायर हैं। वह शायर होने के साथ साथ बहुत बड़े आत्मज्ञानी भी थे। बाबा ताहिर के मक़बरे की भीतरी इमारत में मोज़ेइक टाइल लगी हुयी है। इसी तरह उनके मक़बरे को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया है। मक़बरे के भीतर पत्थर में बाबा ताहिर के 24 चौपाइयां उकेरी गयी हैं। इस मक़बरे में हमदान का हस्तकला उद्योग का म्यूज़ियम भी है जिसे देखकर आप आनंदित होंगे।
हमदान में बड़ी बड़ी वैज्ञानिक हस्तियों के मक़बरे हैं। मशहूर चिकित्सक, आत्मज्ञानी, दार्शनिक व कवि अबू अली सीना का मक़बरा इसी शहर में है। उनका मक़बरा हमेदान में उन्हीं के नाम वाले स्कवाएर के बीचो बीच में है। यह मक़बरा अंडाकार है। इसमें चेनार के पुराने पेड़ और ईरानी बाग़ों की डिज़ाइन से प्रेरित पानी के फ़व्वारे लगे हुए हैं जिसकी वजह से यह मक़बरा सैर तफ़रीह के लिए भी एक अच्छी जगह है। अबू अली सीना के मक़बरे की डीज़ाइन गुंबद काऊस शहर में स्थित इस्लामी इमारत क़ाबूस बिन वश्मगीर मीनार से प्रेरित है। मक़बरे का दक्षिणी हॉल म्यूज़ियम के तौर पर बनाया गया है जिसमें सिक्के, मिट्टी के बर्तन और ईसा पूर्व कई सहस्त्राब्दियों से संबंधित मिली हुयी वस्तुएं रखी हुयी हैं। इसी तरह मक़बरे के उत्तरी हॉल में अबू अली सीना की रचनाएं और पांडुलीपियां मौजूद हैं।
हमदान में दर्शनीय स्थल अभी और भी हैं। प्राचीन हेगमताने टीला अपनी प्राचीनता के बावजूद दुनिया के कुछ गिने चुने प्राचीन शहरों की तहर अभी भी मौजूद है।
मशहूर यूनानी इतिहासकार हेरोदत ने कहा है कि इस शहर में 7 दीवारें थीं इनमें से हर एक ग्रह के रंग की थीं। हालिया वर्षों में हेगमताने में हुए हुयी खुदाई के दौरान इस क्षेत्र के भव्य महलों का स्थल यही टीला था। इस प्राचीन शहर की एक ख़ास बात यह है कि इस शहर में पानी पहुंचाने का एक विकसित नेटवर्क मौजूद था।
हमेदान के नहावंद ज़िलेमें एक और चश्मा है जो ज़्यादा मशहूर नहीं है। इस चश्मे का नाम गयान है। इसे देख कर लगता है कि यह धरती पर स्वर्ग है। इस चश्मे के आस-पास चेनार के पुराने पेड़ों को देख कर इस क्षेत्र की प्राचीनता का अंदाज़ा होता है। गयान चश्मे ने अपने आस-पास अछूती प्रकृति को जन्म दिया है।
गयान चश्मा हमेदान प्रांत के सबसे सुंदर व सबसे ज़्यादा मात्रा में पानी उगलने वाले चश्मे में गिना जाता है। यह चश्मा नहावंद शहर के दक्षिण-पश्चिम में कियान नामी प्राचीन टीले से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस चश्मे का पानी मिनरल्ज़ से भरा हुआ है और इसके आस पास चेनार और जंगली पेड़ की बहुतायत है। यह चश्मा पहाड़ के सीने को चीरकर निकला है और अपने मार्ग में बहुत ही सुंदर झरनों का वजूद देता हुआ आगे बढ़ता है।
स्वर्ग समान इस अछूते इलाक़े तक नहावंद से एक पतली सड़क से पहुंचते हैं जिसके दोनों ओर लगभग 200 हेक्टर पर प्राचीन ज़ाग्रोस जंगल के बची खुची निशानी नज़र आती है। पहाड़ और जंगल तथा मार्ग के पश्चिमी छोर पर विशाल मैदान को देखकर लगता है जैसे कोई सीनरी देख रहे हों।
मार्ग के दोनों ओर उत्तरी ईरान की तरह बलूत के पेड़ और हरियाली है। पहाड़ व बड़ी चट्टान के सीने से स्वच्छ पानी गिरता है। चश्मे के मार्ग में पहाड़ी फल और बलूत का जंगल है जिसे जाग्रोस जंगल के अवशेष मानते हैं। गयान चश्मे के अंत में एक मार्ग पर्वतारोहड़ के लिए बना है जिससे गाचाल नामक चोटी पर जाते है।
गयान चश्मे का मार्ग बहुत ही सुंदर है। जब गयान के किनारे से सड़क पर पहुंचते हैं तो पूरी प्रकृति हरी भरी नज़र आती है। कुछ मुसाफिर इसी मार्ग पर ठहर जाते हैं ताकि प्रकृति का आनंद उठाएं।
गयान चश्मे से 2 किलोमीटर की दूरी पर इसी नाम का एक प्राचीन टीला है जो कई हज़ार साल पुराना है। इस टीले की प्राचीनता चौथी और पांचवीं सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व है।
गयान चश्मा ईरान की इकतीसवीं राष्ट्रीय धरोहर के रूप में ईरान की प्राकृतिक धरोहर की सूचि में पंजीकृत हुआ है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हमदान प्राकृतिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक आकर्षण से संपन्न है। प्राकृतिक इतिहास के म्यूज़ियम से लेकर जिसमें पशुओं और वनस्पति की दुर्लभ प्रजातिंयों से लेकर मुरादबीक दर्रे तक जिन बातों का वर्णन किया वह इस प्राचीन व मूल्यवान शहर का थोड़ा सा वर्णन था। इस बात में शक नहीं कि हमेदान का भ्रमण हर मुसाफ़िर के लिए कभी न भूलने वाला अनुभव होता है।