Apr २३, २०१९ १२:३९ Asia/Kolkata

जब हम कहीं घूमने निकलते हैं तो या तो अपनी कार से जाते हैं, रेल से या फिर बस आदि से , हवाई जहाज़ से तो घूमने का मज़ा नहीं रहता।

ईरान में घूमने के लिए यात्रा करने वाले आम तौर पर रोड से यात्रा को अधिक पसन्द करते हैं। ईरान में रोड से यात्रा करने वाले विशेष कर पश्चिमी ईरान जाने वाले जब हमदान या किरमानशाह से गुज़रते हैं तो अगर बस में जाते हैं तो बस , निश्चित रूप से उन्हें राह में कुछ छोटी छोटी दुकानों के सामने कुछ देर रुकने का अवसर देती है। यह दुकाने कला कृतियों से सजी होती हैं। खास तौर पर मिट्टी के बहुत खूबसूरत और रंग बिरंगे बर्तन आप को नज़र आएगें। लालजीन जाकर वहां के मिट्टी के बर्तनों को न देखना निश्चित रूप से अन्याय होगा।

ईरान की सैर करने वाले अधिकांश सैलानियों को लालजीन की विशेषता के बारे में पता होता है और वह जानते हैं कि यह नगर, मिट्टी के बर्तनों का केन्द्र है और आंकड़ों की मानों तो यह नगर , देश से अधिक विदेशों में प्रसिद्ध है। लालजीन को यूं ही नहीं मिट्टी के बर्तनों का केन्द्र कहा जाता है। इस नगर से पूरे ईरान के किसी भी  अन्य क्षेत्र से अधिक , मिट्टी के बर्तनों का विदेशों में निर्यात होता है। आप जब लालजीन नगर में दाखिल होते हैं तो आप को एक बड़ा चौराहा नज़र आता है और इस चौराहे के बीच में एक कुम्हार की प्रतिमा लगी हुई है जो इस क्षेत्र में मिट्टी के बर्तन की कला का प्रतीक है। यह कुम्हार की प्रतिमा एक पत्थर पर खड़ी नज़र आती है और उसके हाथ में मिट्टी का बर्तन है। इस के साथ ही प्रतिमा के आस पास नीले रंग के कई मिट्टी के बर्तन और एक बड़ी सुराही भी नज़र आती है और इन सब ने मिल कर वहां बहुत सुन्दर दृश्य बना दिया है यही वजह है कि सैलानी इस स्थान पर रुक का खूब फोटो खींचते और खिंचवाते हैं।

लालजीन को मिट्टी के बर्तन बनाने के अंतरराष्ट्रीय केन्द्र के रूप में मान्यता मिलने के बाद 26 अगस्त सत 2017 को इस नगर में जश्न का आयोजन हुआ। दर अस्ल हस्तकला की अतंरराष्ट्रीय परिषण के कई निरीक्षकों  ने इस नगर का दौरा किया और इस नगर में मौजूद मिट्टी के बर्तन बनाने की इकाईयों का निरीक्षण किया जिसके बाद अन्ततः लालजीन नगर को मिट्टी के बर्तन का अंतरराष्ट्रीय नगर घोषित कर दिया गया जिसके बाद इस नगर में आधिकारिक रूप से जश्न मनाया गया।

वैसे इस से पहले से ही लालजीन मध्य पूर्व में मिट्टी के बर्तनों का केन्द्र समझा जाता रहा है। लालजीन नगर के 80 प्रतिशत लोग, मिट्टी के बर्तन, टाइल तथा इन कलाओं से सबंधिंत कार्यों में व्यस्त हैं। यही वजह हैं कि इस नगर को पूरी दुनिया में शोहरत मिल रही है क्योंकि इस नगर में बनने वाले मिट्टी के बर्तनों का जवाब नहीं और दुनिया के विभिन्न देशों में लोग इस नगर में बने मिट्टी के बर्तनों में रूचि  रखते हैं।

 

अरब देशों के अधिकांश लोग, इस्तेमाल के बर्तन और इस्लामी डिज़ाइनों वाले गुलदानों को पसन्द करते हैं। इसी लिए अरब सैलानी, तरह तरह की प्लेटें, प्याले, जग , शमादान, सुराही और गुलदान खरीद कर अपने प्रियजनों को तोहफे के लिए ले जाते हैं जबकि अमरीका व युरोप में सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की अधिक मांग है। पश्चिम देशों में लालजीन के वह बर्तन अधिक पसंद किये जाते हैं जिन पर प्राचीन ईरान से संबंधित डिज़ाइनें हों या फिर फूल पत्ती बनी हों। इस तरह से हम देखते हैं कि पूरब पश्चिम हर ओर लालजीन के बने बर्तनों की मांग है और इस नगर के कलाकर , खपत और मांग के अनुसार, बर्तन बनाते हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार की डिज़ाइनों से सजाते हैं।

 

मिट्टी के बर्तन को आंवे में पकाया जाता है और चूंकि लालजीन मिट्टी के बर्तन का केन्द्र है इस  लिए इस नगर में जगह जगह मिट्टी के बर्तन पकाने का आंवा या भट्टा नज़र आता है। इन भट्टों को पहले  जंगली झाड़ियों से गर्म किया जाता था लेकिन फिर आंवे को पकाने के लिए माज़ोत का प्रयोग किया जाने लगा। माज़ोत के बाद इन भट्टों को गर्म करने के लिए केरोसीन का प्रयोग होने लगा जो अब तक जारी है। नगर में जगह जगट धुआं उगलते भट्टे , हर सैलानी को यह बता देते हैं कि वह मिट्टी के बर्तन बनाने के एक अत्याधिक अहम नगर में टहल रहा है।

 

यहां पर हम आप को यह भी बताना चाहते हैं कि मिट्टी के बर्तन बनाने वाले इन भट्टों को मिट्टी कहां से मिलती है? वास्तव में लालजीन नगर में मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रयोग  होने वाली मिट्टी दस्तजर्द गांव के आस पास की ज़मीनों से ली जाती है उसके बाद उसे, एक विशेष स्थान पहंचा दिया जाता है जहां मशीनों की मदद से उसमें पानी मिला कर उसे अच्छी तरत से गूंथा जाता है और फिर कई चरणों से गुज़र कर यह मिट्टी चौकोर बन जाती है। मिट्टी के बर्तन को बनाने की पूरी प्रक्रिया कई चरणों पर आधारित होती है और बहुत से लोगों को इस के विभिन्न चरण देखने में बेहद दिलचस्पी होती है। मिट्टी के बर्तन बनाने का विभिन्न चरण , बहुत दिलचस्प होता भी  है। यह देखना निश्चित रूप से बहुत ही रोमांचक होता है कि  कैसे सूखी भुरभुरी मिट्टी कैसे एक कुम्हार के हाथ में पहुंच कर सुन्दर रूप धारण कर लेती है ? वैसे भी मिट्टी का इन्सान से गहरा संबंध होता है। ईश्वरीय ग्रंथ कुरआने मजीद में कहा गया है कि हमने मनुष्य को मिट्टी से बनाया, फिर तुम्हें मिट्टी में मिलाएंगे और फिर उसी मिट्टी में से तुम्हें बाहर खींचेंगे।

मिट्टी के बर्तन बनाने का काम कई चरणों में होता है। सूखी मिट्टी को गीला करने और उसे आकार देने तथा आंवे में पकाने के बाद उसे सुन्दरता प्रदान करने की बारी होती है। सब से पहले उस पर पॅालिश की जाती है। बर्तनों का आकार और पॅालिश तथा रंग व डिज़ाइन अलग अलग और ज़रूरत के हिसाब से होते हैं। उदाहरण स्वरूप " लान्जीन " नामक बर्तन को कच्चा रहते हुए ही पॅालिश कर दी जाती है और फिर भट्टे में पकाया जाता है। या , " देज़ी" कही जाने वाली एक विशेष प्रकार की पतीली को लाल मिट्टी से बनाया जाता है और उसपर पॅालिश नहीं लगायी जाती। सुराहियों को हमेशा बिना पॅालिश के बनाया जाता है जबकि सिर्के और अचार के लिए इस्तेमाल होने वाले मटकों में अंदर की ओर से पॅालिश लगायी जाती है।

 

जैसा कि हमने बताया लालजीन में बनने वाले बर्तन के लिए मिट्टी, लालजीन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थिति खूबसूरत गांव , दस्तजर्द से लायी जाती है। इस गांव के लोग भी , लालजीन ग्रामवासियों की भांति, तुर्की भाषा बोलते हैं। इस गांव के अधिकांश लोगों का व्यवसाय, कृषि , पशुपालन और सिलाई है । आप के लिए यह जानना  रोचक होगा कि इस गांव में घरेलू उद्योग के रूप में सिलाई के कई कारखाने हैं जहां कपड़ों की सिलाई होती है इस प्रकार से यह गांव भी अपने क्षेत्र में उत्पादन व रोज़गार का एक केन्द्र समझा जाता है जो निश्चित रूप से एक गांव के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

 

लालजीन और दस्तजर्द के निकट ही एक अन्य खूबसूरत गांव बसा है जिसे दहनजर्द कहा जाता है। यह लालजीन से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव ने खेती बाड़ी में काफी तरक़्क़ी की है कि इस गांव में जौ, मकई, आलू, ककड़ी और अंगूर जैसे उत्पादन भारी मात्रा और व्यापक स्तर पर किये जाते हैं। दहनजर्द के बाहर चारो ओर सुनहरे रंग में फैले अंगूर के बागों को देखना निश्चित रूप से मन के लिए सुखद आभास है और इस दर्शनीय दृश्य के लिए ईरान के विभिन्न  क्षेत्रों से हर वर्ष अनगिनत सैलानी , इस क्षेत्र की ओर खिंचे चले आते हैं।

 

प्रकृति दृश्यों और ग्रामीणों के परिश्रम और कुम्हार की भट्टी तथा मध्य पूर्व में मिट्टी के बर्तन बनाने वालों के केन्द्र को देखने की यदि इच्छा मन में है तो हम आप से यही कहेंगे कि आप इस पूरे क्षेत्र का भ्रमण अवश्य करें। इस यात्रा में आप को कला, प्रकृति के अलावा भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा।(Q.A.)