ईरान भ्रमण- 8
हम अभी पश्चिमी ईरान में हैं और ईरान के इस भाग के एक महत्वपूर्ण शहर की यात्रा पर जा रहे हैं जिसे ज़ागरुस पर्वतीय क्षेत्र की दुलहन कहा जाता है।
किरमानशाह और सनन्दज के बाद ईलाम वह शहर है जिसे ईरान के कुर्द क्षेत्र का तीसरा सबसे बड़ा शहर समझा जाता है। यह शहर अपनी हरियाली और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों की वजह से ज़ागरुस की दुलहन कहलाता है। ईलाम का अर्थ होता है ऊंचा और पहाड़ी क्षेत्र। बेबीलोनिया के शिलालेखों में ईलाम को आलामतो या एलाम लिखा गया है। इसका अर्थ होता है पर्वत या सूर्योदय का देश। चूंकि ईलाम पहाड़ों के बीच में स्थित है अतः इसकी जलवायु आसपास के इलाक़ों की तुलना में अधिक संतुलित है। ईलाम ईरान के पश्चिमी शहरों में काफ़ी विकसित है। यहां जंगलीय पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक स्थल बहुतायत के साथ देखे जा सकते हैं यही कारण है कि बडी संख्या में पर्यटक इस इलाक़े की ओर आकर्षित होते हैं। तजरियान वन्य पर्यटन स्थल एक ठंडा पर्यटन क्षेत्र है जहां गर्मियों में सैलानियों का तांता बंध जाता है। चक़ासब्ज़ नामक जंगली पार्क भी ईलाम के अति सुदंर प्राकृतिक क्षेत्रों में है इसका क्षेत्रफल 4 हज़ार हेक्टेयर है। यहां ओक, पिस्ते, चीड़, पहाड़ी बादाम, अख़रोट आदि वृक्ष जहां तक नज़र जाए दिखाई देते हैं। इस इलाक़े में पक्षी भी बहुत हैं जिनमें बगुलों की ऐसी प्रजातियां शामिल हैं जो दुर्लभ हैं।
ईलाम को आप देखें तो सबसे पहले जो दृश्य आपका ध्यान आकर्षित करेगा वह हरा भरा टीला है जो शहर के भीतर अंगूठी के नगीने की तरह उभरा हुआ दिखाई देता है। यह प्राचीन टीला है जो ख़रगोश टीला या शाहिद टीला के नाम से विख्यात है। प्राचीन समय में यहां विभिन्न प्रकार के ख़रगोश रहते थे। यह एक जंगली टीला है इस पर ऊपर चढ़िए तो वहां जाकर समतल भूमि दिखाई देती है। यदि आप ईलाम के इस टीले पर खड़ो हो जाइए तो वहां से पूरा शहर दिखाई पड़ता है इसी लिए स्थानीय लोग ख़रगोश टीले को ईलाम की छत भी कहते हैं। इन बातों को अलावा एक विशेष बात यह है कि इस टीले की जलवायु भी अन्य स्थानों से अलग है। टीले के ऊपर बड़ा शांति दायक सन्नाटा रहता है वहां पहुंच कर शहर की भीड़भाड़ और शोर शराबे से शांति मिल जाती है। शहर और टीले के वातावरण का यह बड़ा अंतर बहुत मनमोहक है। वहां जाकर लोग लंबी लंबी सांसें लेते हैं और स्वच्छता और ताज़गी का भरपूर आभास करते हैं। टीले के ऊपर खड़े होकर आसमान में उड़ते पक्षियों का दृष्य भी बहुत भला लगता है।
क़ीरान दुर्ग भी ईलाम के अति सुंदर स्थलों में है जो क़ीरान नाम के पर्वत पर बना है। यह पहाड़ बड़े सुंदर वन्य पार्क से मिला हुआ है जिसे शिशदार या शिशदान कहा जाता है। यह दुर्ग अशकानी काल की वास्तुकला और इस्लाम के आगमन के बाद की वास्तुकला का मिश्रण है। जिस पहाड़ पर यह दुर्ग बनाया गया है उसने ईलाम शहर का बड़ा सुदंर दृष्य तैयार कर दिया है। इसे ईरान के अति उत्तम पहाड़ी क्षेत्रों में गिना जाता है।
ईलाम के अत्यंत आकर्षक प्राकृतिक दृष्यों में से एक अरग़वाने दर्रा है जो शहर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित अत्यंत आश्चर्यजनक दर्रा है। हर साल बसंत ऋतु के समय यह दर्रा अपनी सुंदरता और आकर्षण के चरम बिंदु पर पहुंच जाता है। यहा प्राकृतिक के अलग अलग रंगों का संगम दिखाई देने लगता है। यह सुंदर दर्रा ओक और चीड़ के साथ ही अनेक प्रकार के वृक्षों, उनके पत्तों, फूलों और अंकुरों का रंग अपनी गोद में समेटे आपके सामने इस तरह दिखाई देता है जैसे आपको बहुत प्यार से अपने क़रीब बुलाना चाहता है। यह दृष्य देखकर आपकी आंखें चकाचौंध हो जाती हैं।
अमा नाम का पर्यटन स्थल ईलाम शहर के 25 किलोमीटर दक्षिण में है। यह इतना ख़ूबसूरत इलाक़ा है कि इसे देखकर लगता है कि जैसे किसी ने सुंदर कैनवास पर आकर्षक दृष्य बना दिया है। हर साल गर्मी के मौसम में सैलानियों के झुंड वहां नज़र आते हैं।
इसी इलाक़े में एक सुंदर और ऊंचा झरना है जो अद्वितीय है। इस झरने के पानी के गिरने की जगह के आस पास कई प्रकार के वृक्ष हैं। वृक्षों के साथ ही बहुत घनी झाड़ियां भी उगी हैं। इस हरी भरी जगह पर आपको अख़रोट, जंगली अंजीर तथा दूसरे फलदार वृक्ष मिलेंगे जो पूरे इलाक़े में फैले हुए हैं। पहाड़ का वह पूरा कटाव जहां से होकर झरने का पानी ऊपर से नीचे आता है, बहुत हरा भरा है। पानी वृक्षों के बीच से गुज़र कर नीचे गिरता है तो बड़ा मनमोहक कौतूहल पैदा हो जाता है। वैसे ईलाम में दूसरे भी बहुत से सुंदर झरने हैं जैसे चपीरास्ती झरना जो ज़र्रीनाबाद इलाक़े में स्थित बड़ा सुंदर झरना है जो कबीरकूह नामक पर्वत के आंचल में स्थित तख़तान गांव के उत्तर में है। इस इलाक़े की प्राचीन चक्कियां और गांवों में लगे सुंदर बाग़, गुफाएं, जलसोते, दर्रे और वहां मौजूद हरियाली और जंगल थके हुए यात्री के मन मस्तिष्क में ताज़गी भर देती है और उसकी थकन दूर हो जाती है।
ज़ीनेहगान गुफा भी ईलाम के दर्शनीय स्थानों में है। यह ईलाम के सालेहाबाद इलाक़े में स्थित है जिसे स्वर्ग गुफा भी कहा जाता है। यह भी उन जगहों में है जिन्हें ज़रूर देखना चाहिए। इसे गुफा को स्वर्ग गुफा इसलिए कहा जाता है कि वह की जलवायु इतनी अनुकूल और आरामदायक है कि इंसान वहा जाता है तो घंटों गुज़र जाने के बाद भी उसका दिल नहीं भरता। यह एक बड़ी गुफा है जिसका मुंह खुला हुआ है और इसकी लंबाई एक किलोमीटर से ज़्यादा है। गुफा के भीतर काफ़ी पानी है और दीवारों पर बड़े सुंदर दृष्य और आकृतियां बनी हुई हैं। पानी के टपकने और पानी के बहाव से जो आकृतियां बनी हैं वह बड़ी विचित्र हैं। इसके अलावा गुफा के भीतर रंग बिरंगे पत्थर, गुफा में मौजूद सुंदर मोड़ गुफा की छत का आकर्षण भी बहुत अधिक है। सैलानी इस गुफा की छत को देर तक तकते रहते हैं। गुफा के भीतर दीवारों पर तरह तरह की वनस्पतियां उगी हुई हैं जिनमें फूल खिले रहते हैं। यह इस गुफा की सुंदरता को बढ़ाते हैं।
इसी इलाक़े में चमऊ गांव है। गांव पहुंचने से पहले चमऊ नाम का एक झरना नज़र आता है जो अपनी बहुमुखी सुंदरता के साथ ऊंचाई से नीचे गिरता है। झरने से नीचे गिरने वाला पानी थोड़ी दूर तक बहता है और फिर जाकर गुदारख़ुश नामक नदी में गिरता है। इसी रास्ते पर आगे बढ़ें तो एक और झरना मिलता है जो अर्ध चंद्रमा के आकार की बड़ी चट्टान से नीचे गिरता है। यह झरना और आस पास का वातावरण भी इस इलाक़े के अति सुंदर दृश्यों में है।
ईलाम के इलाक़ा गचान भी अपनी विशेष सुंदरता के लिए ख्याति रखता है। यह इलाक़ा ऊंचे ऊंचे ओक के वृक्षों से ढंका हुआ है । यह इलाक़ा हरे भरे और आसमान से बातें करते पहाड़ों मानेश्त और क़ल्लाजे के बीच स्थित दर्रे में है। गचान दर्रे के ऊपर बहुत से जल सोतों से पानी बहता रहता है और सारी पानी मिलकर एक साथ नीचे गिरता है तो एक झरना अस्तित्व में आ जाता है। इन जल सोतों को निर्मल पानी आस पास के गांवों में रहने वालों के पीने के भी काम आता है और साथ ही इससे सिंचाई भी की जाती है।
ईलाम की प्राकृतिक सुंदरता इतनी ज़्यादा और विविधता पूर्ण है कि सबके बारे में एक कार्यक्रम में बयान कर पाना कठिन है। इसलिए हम अब अन्य प्राकृतिक दृष्यों की बात करने के बजाए आपको ले चलते हैं इस इलाक़े की वास्तुकला की ओर और आपको यहां की प्राचीन इमारतो से अवगत करवाते हैं। ईलाम शहर में काजारिया दौर की एक महत्वपूर्ण इमारत वाली दुर्ग है जो चुग़ा मीरग नामक टीले के ऊपर बनाया गया है। इस इमारत के कई भाग हैं जैसे हरम सरा जहां शाही परिवार की महिलाएं रहती थीं। दुर्ग के एक भाग में आईना हाल है। एक दरबार है और तह ख़ाने में एक जेल भी है। दुर्ग की तीन दिशाओं में तीन प्रवेश द्वार हैं। इसका मुख्य द्वार इसके दक्षिणी भाग में है। भीतर जाने के लिए 11 ज़ीने चढ़ने के बाद पहरेदार का कमरा आता है उस कमरे से गुज़रने के बाद आठ ज़ीने चढ़कर तब दुर्ग के भीतर क़दम रखा जा सकता है। दुर्ग के ऊपरी भाग को इस तरह बनाया गया है कि वहां से दुर्ग के भीतर रोशनी पहुंचती रहती है। दुर्ग के भीतर बड़ा सा हौज़ है। दुर्ग के दीवारों के बाहरी भाग को पत्थरों को तराश कर बड़ी सुंदरता से सजाया गया है। दीवारों पर उभरे हुए आयताकार पत्थर बड़े सलीक़े से लगाए गए हैं और इन पर सुदंर चित्रकारी की गई है।
फ़लाहती महल भी ईलाम की सुंदर इमारतों में है। यह महल ईलाम की कृषि संस्था के मुख्यालय के भीतर है। इसीलिए इसको फ़लाहती अर्थात किसानी महल कहा जाता है। इस महल का बारी रूप ईंटों से सजाया गया है। इस महल के बीच में एक बड़ा हाल है। अतीत में यह महल बहुत बड़े बाग़ के बीच में था लेकिन शहर का विकास हुआ तो महल के आस पास के मैदान में इमारतें और सड़कें बन गई हैं। अतः महल के बाहरी भाग का पुराना आकार अब नहीं बचा है।
संक्षेप में यह कहना चाहिए कि ईलाम दर्शनीय स्थलों से भरा हुआ है। यहां बहुत सी पुरानी चक्किया हैं, बहुत सारे तालाब हैं। नरकुल के जंगल हैं जहां दूर तक झाड़ियां फैली हुई हैं और इन झाड़ियों में विभिन्न प्रकार के पक्षी रहते हें।
ईलाम के सुंदर स्थानों को देखने के लिए एक दिन पर्याप्त नहीं है बल्कि कई दिन घूमने की ज़रूरत है। तभी हम यहां की प्राकृतिक सुंदरता से भलीभांति आनन्दित हो सकते हैं। ईश्वर की इस महान विभूति पर बरबस आभार के शब्द निकलने लगते हैं।