शुक्रवार- 17 अप्रैल
17 अप्रैल सन 1953 ईसवी को कम्बोडिया को फ़्रांस से स्वतंत्रता मिली।
कम्बोडिया पर 15वीं शताब्दी से विदेशी हस्तक्षेप आरंभ हुए। 19वीं शताब्दी के मध्य में कम्बोडिया के नरेश ने पड़ोसी देशों के आक्रमणों का मुकाबला करने के लिए फ़्रांस से सहायता चाही और फ़्रांस ने सन 1863 से इस देश को अपने अधीन कर लिया और यह स्थिति 1953 तक जारी रही। स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद के वर्षों विशेषकर 1960 के दशक में कम्बोडिया की स्थिति बड़ी ही तनावपूर्ण रही। अंतत: सन 1999 में इस देश में संसदीय चुनाव हुए जिसके बाद इस देश में शाति की स्थापना हुई।
थाइलैंड लाओस और वियतनाम इसके पड़ोसी देश है।
- 17 अप्रैल सन् 1524 में जियोवान्नी वेराजानो ने न्यूयॉर्क खाड़ी की खोज की।
- 17 अप्रैल सन् 1875 में सर नेविले चैंबरलिन ने स्नूकर का अविष्कार किया।
- 17 अप्रैल सन् 1895 में चीन और जापान के बीच शिमोनोसेकी का समझौता हुआ।
- 17 अप्रैल सन् 1899 में कलकत्ता को पनबिजली मिली।
- 17 अप्रैल सन् 1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूगोस्लाविया ने जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
- 17 अप्रैल सन् 1946 में सीरिया ने फ्रांस से आज़ादी मिलने की घोषणा की।
- 17 अप्रैल सन् 1971 में लीबिया, मिस्रा और सीरिया ने मिल कर यूनाइटेड अरब स्टेट बनाने के लिए संघ का गठन किया।
- 17 अप्रैल सन् 1977 में स्वतंत्रता पार्टी का जनता पार्टी में विलय।
- 17 अप्रैल सन् 1982 में कनाडा ने संविधान अपनाया।
- 17 अप्रैल सन् 1982 में अमेरिका ने नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया।
- 17 अप्रैल सन् 1983 में भारत ने “एसएलवी-3” राकेट का प्रक्षेपण किया।
- 17 अप्रैल सन् 1986 में सिसली और नीदरलैंड देशों के बीच युद्ध की स्थिति को ख़त्म करने की घोषणा करते हुए शांति बहाल की।
- 17 अप्रैल सन् 1993 में अंतरिक्ष यान “एसटीएस-56” डिस्कवरी धरती पर वापस लौटा।
- 17 अप्रैल सन् 1995 में पाकिस्तान में बाल मज़दूरी को समाप्त करने वाले युवा कार्यकर्ता इक़बाल मसीह की हत्या हुई ।
- 17 अप्रैल सन् 2003 में लगभग 55 वर्षों बाद भारत-ब्रिटेन संसदीय मंच का गठन हुआ।
- 17 अप्रैल सन् 2014 में प्रसिद्ध कोलंबियाई उपन्यासकार ग्रैबिएल मार्क़ेज का निधन हुआ।
17 अप्रैल वर्ष 1915 को पहली बार विश्व में घुटन पैदा करने वाली गैस का प्रयोग किया गया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमानवीय कार्यवाही करते हुए जर्मनी ने ब्रिटिश और फ़्रांसीसी सैनिकों के विरुद्ध इस गैस का प्रयोग किया जिसमें संयुक्त सेना के बहुत से सैनिक मारे गये। गैस युद्ध के नाम से प्रसिद्ध इस युद्ध में जर्मनी को किसी सीमा तक सफलता प्राप्त हुई। प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद युद्ध में रासायनिक गैसों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास आरंभ हुए जो युद्ध में रासयनिक शस्त्रों के प्रयोग और उनके विस्तार पर प्रतिबंध के समझौते के रूप में सामने आया। इसके बावजूद कुछ देशों की ओर से युद्धों के दौरान रासयनिक शस्त्रों के प्रयोग का क्रम जारी रहा जिसमें अमरीका की ओर से वियतनाम पर रासयनिक बमबारी और आठ वर्षीय थोपे गये युद्ध के दौरान ईरानी जनता के विरुद्ध इराक़ी शासन द्वारा रासयनिक शस्त्रों का प्रयोग करना शामिल है।

17 अप्रैल सन 1946 ईसवी को सीरिया को अतिग्रहणकारी सेना से मुक्ति मिली। और यह देश स्वतंत्र हो गया। अतीत में सीरिया और इसके आस पास के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर शाम कहा जाता था।
इस्लाम के उदय से पूर्व शाम पर ईरान यूनान मिस्र और रोम ने अधिकार किया। इस्लामी सरकार के बन जाने के कुछ ही समय बाद शाम भी इसी सरकार के अधीन हो गया। यह देश उमवी शासकों का केंद्र रहा। कुछ समय बाद इस पर सीरिया ने अधिकार किया और उसके पश्चात यह देश उसमानी शासन के क़ब्ज़े में चला गया। प्रथम विश्व युद्ध में उसमानी शासन के टूट जाने के पश्चात सीरिया फ़्रांस के अधीन हो गया। सीरिया के स्वतंत्रता प्रेमियों ने ज़ोरदार संघर्ष आरंभ किया और जून सन 1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन और फ़्रांस की सेना ने सीरिया पर क़ब्ज़ा कर लिया किंतु इस देश में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चलते रहे और सन 1946 में जब ब्रिटेन और फ़्रांस की सेनाएं इस देश से वापस गयीं तो इसे पूर्ण रुप से स्वतंत्रता मिली।

17 अप्रैल वर्ष 1895 ईसवी को चीन और जापान के मध्य एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर इस्ताक्षर होने के बाद कोरिया प्रायद्वीप के स्वामित्व पर दोनों देशों के मध्य होने वाला युद्ध समाप्त हो गया। ज्ञात रहे कि चीनियों ने जापान को सूचना दिए बिना ही इस प्राथाद्वीप में अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि कर दी थी जबकि जापानियों ने अल्टीमेटम दिए बिना ही चीनी सेना पर आक्रमण कर दिया था। चीन ने कई बार पराजित होने के बाद अंततः इस समझौते की शर्त को स्वीकार किया।
17 अप्रैल वर्ष 2004 ईसवी को ज़ायोनी शासन के युद्धक विमानों ने फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध संगठन हमास के नेता और प्रसिद्ध फ़िलिस्तीनी नेता डाक्टर अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी की कार पर राकेट से आक्रमण करके उनको शहीद कर दिया। अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी शैख़ अहमद यासीन की शहादत के बाद हमास के नेता बने थे। अब्दुल अज़ीज़ रन्तीसी वर्ष 1947 में याफ़ा नगर में जन्मे। उन्होंने सन 1967 में मिस्र के इस्कंदरिया विश्वविद्यालय से चिकित्सा की शिक्षा पूरी की। उन्होंने युवाकाल से ही ज़ायोनियों के विरुद्ध अपने प्रयास आरंभ कर दिए थे और कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा। हमास आंदोलन के गठन के बाद वह उसके सदस्य बन गये और उसके नेताओं में उनकी गणना होने लगी। 17 अप्रैल वर्ष 2004 ईसवी को ज़ायोनियों ने उनको शहीद कर दिया।
17 अप्रैल वर्ष 1950 ईसवी को पाकिस्तान का पहला राष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित हुआ। इस दिन गवर्नर जनरल ख़्वाजा नाज़िमुद्दीन ने कराची के फ़्रेयर हाल में पाकिस्तान के इस पहले राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन किया। फ़्रेयर हाल की इमारत को कराची नगर महापालिका से विशेष रूप से किराए पर लिया गया था। पाकिस्तान की दूसरी ओर तीसरी पंचवर्षीय योजनाओं में राष्ट्रीय संग्रहालय की एक अलग इमारत के बनाने लिए विशेष रूप से राशि विशेष की गयी और वर्ष 1969 में प्रिंस गार्डन में इस इमारत के पूरे होने के बाद संग्रहालय इस इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया।
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29 फ़रवरदीन सन 1358 हिजरी शम्सी को इस्लामी गणंतत्र ईरान की सेना ने इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी की बैअत अर्थात उनके आज्ञापालन का दृढ़संकल्प करने और इस्लामी क्रान्ति के प्रति निष्ठावान रहने का वचन देने के रुप में अभूतपूर्व परेड की। यह परेड देश के विभिन्न स्थानों पर हुई। इस परेड में जिसका जनता ने शानदार स्वागत किया, सेना और जनता ने इस्लामी क्रान्ति और देश की रक्षा के लिए अपनी एक जुटता और समरसता का प्रदर्शन किया। इसी लिए यह दिन ईरान में सेना दिवस के रुप में मनाया जाता है और हर साल इसी उपलक्ष्य में विशेष कार्रयक्रम आयोजित किये जाते हैं।
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23 शाबान वर्ष 733 हिजरी क़मरी को आठवीं शताब्दी हिजरी क़मरी के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके परिजनों के पवित्र कथनों के महान वर्णनकर्ता हुसैन बिन अब्दुल्लाह तैय्यबी शरफ्फ़ुद्दीन का निधन हुआ। वे अरबी साहित्य और वाग्मिता में तत्कालीन महान विद्वानों में से थे। क़ुरआन और हदीस की व्याख्या एवं पढ़ाने में शरफ्फुद्दीन को दक्षता प्राप्त थी। हुसैन बिन अब्दुल्लाह तैय्यबी की रचनाओं में क़ुरआन की व्याख्या एवं मिश्कात के विवरण की ओर संकेत किया जा सकता है।
23 शाबान वर्ष 817 हिजरी क़मरी को नवीं शताब्दी हिजरी क़मरी के ईरानी महान कवि एवं साहित्यकार नुरुद्दीन अब्दुर्रहमान जामी का ईरान के उत्तर पूर्वी प्रांत ख़ुरासान में स्थित जाम नगर में जन्म हुआ। उन्होंने किशोर अवस्था में विभिन्न विषयों की शिक्षा प्राप्त करना प्रारम्भ की। जामी युवा अवस्था में धार्मिक, साहित्य और इतिहास की शिक्षा प्राप्ति हेतु समरक़ंद चले गये और उसके बाद यात्रा पर निकल पड़े। जिस समय हेरात नगर काफ़ी प्रसिद्ध था उस समय आपने वहां जीवन व्यतीत किया। वहां पर उन्होंने जाम के रहस्यवादी के रूप में ख्याति प्राप्त की। पैग़म्बरे इस्लाम (स) के परिवारजनों पर वे दृढ़ विश्वास रखते थे और राजाओं और महाराजाओं की प्रशंसा में कदापि कविताएं नहीं लिखते थे। इस महान ईरानी कवि की अनेक रचनाएं बची हैं जिनमें से हफ्त ओरंग, सिलसिलए अज़्ज़हब और बहारिस्तान की ओर संकेत किया जा सकता है। वर्ष 898 हिजरी क़मरी में जामी का निधन हो गया।