शनिवार - 18 अप्रैल
18 अप्रैल सन 1955 ईसवी को एशियाई और अफ़्रीक़ी राष्ट्रों का पहला सम्मेलन इंडोनेशिया के बान्दोंग नगर में हुआ यह सम्मेलन इसी नाम से जाना जाता है।
- 18 अप्रैल वर्ष 1902 को अपराधियों की पहचान के लिए डेनमार्क ने सबसे पहले फ़िंगरप्रिंट दर्ज करने शुरू किया।
- 18 अप्रैल वर्ष 1948 को हॉलैंड के हेग नगर में इंटरनेशनल कोर्ट आफ़ जस्टिस की स्थापना हुई।
- 18 अप्रैल वर्ष 2001 को भारत और बांग्लादेश की सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं की गोलीबारी में भारत के 16 सैनिक हताहत हुए।
- 18 अप्रैल वर्ष 2002 को 1973 से इटली में रह रहे अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व शासक मुहम्मद ज़ाहिर शाह स्वदेश लौटे।
- 18 अप्रैल वर्ष 1996 को मिस्र की राजधानी क़ाहेरा में अज्ञात हमलावरों ने यूनान के 17 सैलानियों और उनके स्थानीय गाइड को गोलियों से भून दिया।
- 18 अप्रैल वर्ष 1955 को प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का 76 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया।
18 अप्रैल सन 1955 ईसवी को एशियायी और अफ़्रीक़ी राष्ट्रों का पहला सम्मेलन इंडोनेशिया के बान्दोंग नगर में हुआ यह सम्मेलन इसी नाम से जाना जाता है। इस सम्मेलन में 29 एशियायी और अफ़्रीकी देशों ने भाग लिया जो पश्चिमी और पूर्वी दो बड़ी शक्तियों के मुक़ाबले में तीसरी दुनिया के देशों का संघ बनाना चाहते थे। इस सम्मेलन के समापन पर एक प्रस्ताव पारित हुआ जिसमें तीसरी दुनिया के देशों की आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहकारिता तथा एशियायी और अफ़्रीक़ी राष्ट्रों के भविष्य निर्धारण के अधिकार पर बल दिया गया था। इसी प्रकार मोरक्को और टयूनेशिया में फ़्रांसीसी साम्राज्यवाद और गीनी में हॉलैंड के साम्राज्यवाद सहित विश्व साम्राज्यवाद केविरोध में भी एक प्रस्ताव पारित हुआ।
यही सम्मेलन गुट निरपेक्ष आंदोलन की भूमिका भी बना।
18 अप्रैल सन 1980 ईसवी को ज़िम्बाब्वे को स्वतंत्रता मिली। यह देश 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में ब्रिटेन का उपनिवेश बन गया और गारे अल्पसांख्यकों का इस देश पर राज हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध और ब्रिटेन के कमज़ोर हो जाने के पश्चात ज़िम्बाब्वे में जनता ने साम्राज्यवादी शासकों के विरुद्ध विरोध और संघर्ष तेज़ कर दिया तथा बहुत सारे सशस्त्र गुट सक्रिय हो गये। 1970 से सरकार और विरोधियों के बीच झड़पें बहुत बढ़ गयीं और सन 1978 में गोरों की सरकार सत्ता से हटने पर विवश हो गयी तथा ब्रिटेन ने 1980 में इस देश में स्वतंत्र संसदीय चुनाव कराने पर सहमति व्यक्त की। इन चुनावों में रॉबर्ट मोगाबे के नेतृत्व में स्थानीय पार्टी को सफलता मिली और ज़िम्बाब्वे में अश्वेतों की पहली सरकार ने सत्ता संभाली। इस देश में 17 प्रतिशत जनसंख्या अश्वेतों की है।

18 अप्रैल सन 1996 ईसवी को ज़ायोनी शासन की वायु सेना ने दक्षिणी लेबनान के क़ाना गांव में संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना के ठिकाने पर बम्बारी की जहॉ सैकड़ों असैनिकों ने शरण ले रखी थी। इस पाश्विक कार्रवाई में ज़ायोनी सैनिकों ने लगभग 110 लेबनानी असैनिकों को मार दिया और भारी संख्या में लोग घायल भी हुए।
इन असैनिकों का जनसंहार, जिसमें 10 वर्ष से कम आयु के 33 बच्चे भी शामिल थे विश्व जनमत के आक्रोष का कारण बना और ज़ायोनी शासन को लेबनान पर बम्बारी रोकने पर विवश होना पड़ा। किंतु अमरीका ने सुरक्षा परिषद में उक्त जनसंहार की आलोचना में प्रस्ताव पारित नहीं होने दिया। किंतु संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने एक प्रस्ताव पारित करके तेल अबीब सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए उक्त जनसंहार के बदले 2 अरब चालीस करोड़ डालर का हर्जाना भरने का आदेश दिया।
हालॉकि महासभा का यह प्रस्ताव व्यवहारिक नहीं हो सका और ज़ायोनी शासन ने लेबनान को कोई हर्जाना नहीं दिया किंतु महासभा में इस्राईल की आलोचना से इस अवैध शासन के प्रति विश्ववासियों की घृणा सामने आ गयी।

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30 फ़रवरदीन सन 1372 हिजरी शम्सी को ईरान के जनगणना व सांख्यिकी के प्रसिद्ध विशेषज्ञ व सर्वे की नई शैली के संस्थापक अब्बास क़ुली ख़्वाजा नूरी का 78 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने 1316 हिजरी शम्सी में इन्जीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद वह ईरान के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने लगे। उन्होंने नार्थ कैरोलीना विश्वविद्यालय से एम A की डिग्री प्राप्त की और पेरिस विश्वविद्यालय के विज्ञान विभाग से जनगणना के विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। डाक्टर नूरी ने विभिन्न मंत्रालयों में सलाहकार के रूप में कार्य किया और ज्ञान संबंधी शोध में भी व्यस्त रहे। उन्होंने वर्ष 1967 में तेहरान में जनगणना की सर्वोच्च शिक्षण संस्था की स्थापना की। उन्होंने विभिन्न विषयों पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखी हैं।

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24 शाबान सन 1312 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के विख्यात धर्मगुरु मिर्ज़ा मोहम्मद हसन शीराज़ी का निधन हुआ। वे सन 1230 हिजरी क़मरी में ईरान के दक्षिणी नगर शीराज़ में जन्मे और आरंभिक शिक्षा प्राप्ति के बाद उच्च स्तरीय धर्मिक शिक्षा प्राप्ति के इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ लिए गए ।
उन्होंने ईरानी शासक नासिरुददीन क़ाजार के शासन काल में तम्बाकू के प्रयोग को हराम घोषित करके ईरान में तम्बाकू के व्यापार पर ब्रिटेन के एकाधिकार को समाप्त कर दिया। इस आशय का उनका फतवा वास्तव में क़ाजार शासक और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष के समान था। उनके इस फतवे से बाद में अत्याचार शासन विरोधी संघर्ष को बड़ा बल मिला।