Apr २३, २०१६ ०९:०१ Asia/Kolkata
  • डा. अली अकबर विलायती-२

किसी भी देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन उसकी विदेश नीतियां होती हैं और सफल कूटनीति उसी के अंतर्गत आती है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपनी स्थापना के आरंभ से ही, समृद्ध इस्लामी संस्कृति के कारण पूरी शक्ति से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में क़दम रखा क्योंकि इस्लामी क्रांति की सत्यता को सिद्ध करने का एक महत्वपूर्ण साधन विदेशी नीति तथा इस विभाग में योग्य लोगों को पद दिया जाना है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी विभिन्न देशों को यह अवसर प्रदान करते हैं कि वह अपने अधिकारियों की सहायता से विभिन्न मुद्दों पर अपनी नीतियों को स्पष्ट करें। डाक्टर विलायती का नाम भी एसे ही योग्य मंत्रियों में लिया जाता है जो संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा, गुट निरपेक्ष आन्दोलन और ओआईसी के सम्मेलनों जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली भाषणों द्वारा इस्लामी क्रांति के दृष्टिकोणों को स्पष्ट व व्यापक रूप से बयान किया। विदेशमंत्री के पद पर रहते हुए उनके भाषणों को एक किताब के रूप में प्रकाशित किया गया है जिसे इस्लामी गणतंत्र ईरान की अंतरराष्ट्रीय विचारधारा का नाम दिया गया है। इस किताब के अध्ययन से वर्ष १९८२ से १९९४ तक ईरान की विदेश नीति के बहुत से आयामों की भरपूर जानकारी प्राप्त की जा सकती है इस किताब से पता चलता है कि ईरान की विदेश नीतियों के ज़िम्मेदारों ने किस प्रकार अत्याधिक संकटमय परिस्थितियों में, अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस्लामी गणतंत्र ईरान की पोजीशन को बेहतर किया है।

 

ईरान और अमरीका के संबंध की एक शताब्दी नामक पुस्तक भी डाक्टर विलायती की एक रचना है जिसमें उन्होंने गत सौ वर्षों के दौरान ईरान और अमरीका के मध्य संबंधों की समीक्षा की है इस किताब में उन्होंने ईरान और अमरीका के संबंधों का आरंभ ईरान में काजारी शासन के काल में बताया है और फिर संवैधानिक क्रांति, प्रथम विश्व युद्ध, प्रथम पहलवी, दूसरे विश्व युद्ध जैसे कालखंडों में ईरान और अमरीका के संबंधों तथा शीत युद्ध तथा इस्लामी गणतंत्र के काल में उसके परिणामों पर चर्चा की है।

 

डाक्टर विलायती ने अपनी इस किताब के ८ अध्यायों में ईरान और अमरीका के संबंधों पर चर्चा की है। इस पुस्तक में एक स्थान पर कहा गया है कि अमरीका, ईरान में अपनी राजनीतिक उपस्थिति के आरंभ में सुन्दर नारों और दो मुखी नीतियों द्वारा अपनी वास्तविकता छुपाने में सफल रहा तथा इस प्रकार से उसने ईरान के शासन में अपनी पैठ मज़बूत बनायी। दूसरे विश्व युद्ध में अमरीका की विजय इस बात का कारण बनी कि वह अधिक शक्तिशाली देश और साम्राज्यवादी ब्रिटेश के विकल्प के रूप में उभरे और इसी कारण इस नयी महाशक्ति ने बड़ी सरलता से ईरानी शासन पर अपनी पकड़ मज़बूत बना ली और उसे अपना ठिकाना बना लिया।

डाक्टर अली अकबर विलायती की एक अन्य महत्वपूर्ण रचना इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध थोपे गये युद्ध का राजनीतिक इतिहास है। डाक्टर विलायती उस काल में ईरान के विदेशमंत्री थे और उन्होंने कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। उन्होंने इस युद्ध में सद्दाम के अतिक्रमणकारी होने को सिद्ध करने के लिए अत्याधिक उच्च स्तर पर और बड़े बड़े मंचों पर महत्वपूर्ण वार्ताएं कीं। अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ को प्रयोग करते हुए इस किताब को दस अध्यायों में लिखा गया है और इसे ईरान पर थोपे गये युद्ध की राजनीतिक व एतिहासिक रिपोर्ट भी कहा जा सकता है। युद्ध की महत्वपूर्ण घटनाएं, सफलताएं और विदेश नीति पर उनके प्रभावों को बड़ी सुन्दरता से बयान किया गया है और इन सब का डाक्टर विलायती ने बहुत सुन्दरता और विस्तार के साथ वर्णन किया है। युद्ध के तीसरे वर्ष ईरानी सैनिकों के पास सैन्य उपकरणों और हथियारों के अभाव के बावजूद खुर्रमशहर पर विजय तथा उसके बाद ईरान के प्रति विश्व के दृष्टिकोण में परिवर्तन पर भी डाक्टर विलायती ने विस्तार पूर्वक लिखा है। इस संदर्भ में एक स्थान पर वह लिखते हैं। खुर्रम शहर पर विजय और शत्रु का सीमा के दूसरी तरफ तक भागना अत्यन्त महत्वपूर्ण था। ख़ोज़िस्तान के कई क्षेत्रों को स्वतंत्र कराने और खुर्रम शहर की स्वतंत्रता से नयी परिस्थितियां उत्पन्न हो गयी थीं और इराक़ के मुकाबले में ईरान की राजनीतिक व सैनिक शक्ति सिद्ध हो गयी थी। ईरान के हित में राजनीतिक व सैनिक परिस्थितियों के बदलने और नयी परिस्थितियों के जनम लेने के साथ ही वास्तव में युद्ध की प्रवृत्ति भी बदल गयी। डाक्टर विलायती के अनुसार इस बड़ी विजय के संदर्भ में एक रोचक बिन्दु यह है कि यद्यपि अरब देशों ने इस युद्ध के लिए इराक़ की २५ अरब डालर से सहायता की थी किंतु खुर्रमशहर में विजय के बाद यह अरब देश, इराक़ की सैन्य शक्ति के बारे में शंका में ग्रस्त हो गये।

 

इस्लाम और ईरान की संस्कृति व सभ्यता के इतिहास का कैलेन्डर भी डाक्टर अली अकबर विलायती की महत्वपूर्ण रचनाओं में से है। यह तीन जिल्दों पर आधारित बड़ी किताब है जिसके पहले भाग में पैगम्बरे इस्लाम और उनके परिजनों की जीवनियों का उल्लेख किया गया है जबकि दूसरे भाग में इस्लामी जगत के लगभग ग्यारह सौ बुद्धिजीवियों की जीवनियों पर प्रकाश डाला गया है और तीसरे भाग में कुछ एतिहासिक घटनाओं पर चर्चा की गयी है। इस किताब में इस्लाम के आशय उसकी भौगोलिक सीमाएं हैं जो किसी काल में दक्षिण पूर्वी एशिया से दक्षिणी स्पेन के आंदालुसिया तक फैली हुई थीं। इसी प्राकर ईरान से आशय ईरान का सांस्कृतिक साम्राज्य है जो वर्तमान ईरान की राजनीतिक सीमाओं से कई गुना अधिक व्यापक है।

इस पुस्तक के मुख्य लेखक डाक्टर विलायती का कहना है कि लोग जितना अधिक इसलाम और ईरान की महत्वपूर्ण हस्तियों से परिचित होंगे उतना ही अपने अतीत पर गर्व करते हुए भविष्य की ओर आशा के साथ क़दम बढ़ाएंगे।

 

यह किताब विशेष शैली में लिखी गयी है और पूरे वर्ष के ३६५ दिनों में से हर दिन के वर्णन में कम से कम तीन इस्लामी बुद्धिजीवियों का उल्लेख किया गया है। इस प्रकार से यह पुस्तक संचार माध्यमों और समाचारपत्रों के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है। इस रचना को अस्तित्व प्रदान करने वालों का उद्देश्य, ईरानी और इस्लामी संस्कृति से लोगों को परिचत करना था। इस किताब में ईरान की महान हस्तियों की जीवनी के अध्याय में अबू अली सीना, अबू नस्र फाराबी, सअदी, हाफिज़, अत्तार नीशापूरी जैसे महान हस्तियों का वर्णन किया गया है। इसी प्रकार इस्लाम के आरंभिक काल के वर्णन के समय डाक्टर विलायती ने पैगम्बरी की घोषणा, पलायन और आरंभिक युद्धों का उल्लेख किया है।

 

डाक्टर विलायती, उत्तरी अफ्रीका के कुछ तानाशाहों का राज पाट समाप्त करने वाली इसलामी चेतना के बारे में भी महत्वपूर्ण दृष्टिकोण रखते हैं। इस समय भी वह इस्लामी चेतना आंदोलन संगठन के सचिव हैं। वे इस्लामी चेतना की लहर के बारे में कहते हैं कि इस्लामी चेतना, जो इस्लामी राष्ट्रों के लिए गौरव का कारण बनी, कुरआन, पैगम्बरे इस्लाम और उनके परिजनों की जीवनी तथा राजनीतिक व सामाजिक मंच पर जनता की उपस्थिति का परिणाम है। आत्मविश्वास और सहयोग के साथ धर्म पर आस्था बहुत से इस्लामी आंदोलनों का स्रोत है और इन आन्दोलनों में सदा ही जनता को अपने भविष्य के निर्धारण का अधिकार दिया गया और उसके बदले उन्हें धार्मिक प्रजातंत्र का उपहार मिला। यह आंदोलन विश्व के साथ न्यायपूर्ण संबंधों का इच्छुक है और अपनी राजनीतिक व धार्मिक स्वाधीनता पर बल देता है और हर प्रकार के वर्चस्व व साम्राज्यवादी उद्देश्यों को नकाराता है। इस्लामी चेतना, व्यापक आत्मज्ञान है जिसके अंतर्गत यह प्रयास किया जा रहा है कि इस्लामी राष्ट्रों को वैचारिक, राजनीतिक व आर्थिक दासता से सुरक्षित रखा जाए और उन्हें सम्मान व एकता प्रदान की जाए।

डाक्टर अली अकबर विलायती के विचार में इस्लामी जगत को इस समय से से अधिक सत्ता के लिए आदर्श की आवश्यकता है। इस संदर्भ में वे कहते हैं कि इस्लाम के आरंभिक काल के बाद, इस्लामी जगत, सदियों तक अतिक्रमणकारियों और साम्राज्यवादियों के सामने रक्षात्मक स्थिति में रहा है किंतु आज , इस्लामी बुद्धिजीवियों के सामने आने के बाद अब इस्लामी राष्ट्रों की समझ में यह बात आ गयी है कि उनके पास इस्लामी शिक्षाओं की ओर वापसी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। डाक्टर विलायती गज़्ज़ा के आठ दिवसीय युद्ध में विजय को इसलामी चेतना का एक महत्वपूर्ण भाग मानते हैं और इस संदर्भ में कहते हैं कि क्षेत्र की नवोदित सरकारों ने बहुत से अभावों के बावजूद ग़ज़्ज़ा में संघर्ष करने वाले फिलिस्तीनियों का समर्थन किया। हालिया सफलता बहुत आयामों से इस्लामी चेतना का परिणाम है और वरिष्ठ नेता के कथनानुसार यह सफलताएं, आरंभ हैं अंत नहीं।

 

डाक्टर विलायती ने चिकित्सा के विषय पर भी कई किताबें और आलेख लिखे हैं।