Apr २३, २०१६ ०९:४६ Asia/Kolkata
  • सनाई ग़ज़्नवी-1

हमने कहा कि अबूल मज्द मजदूद बिन आदम सनाई ग़ज़्नवी ईरान के एक महान,प्रसिद्ध और परिज्ञानी शायर थे। सनाई अपने काल में एकमात्र वह व्यक्ति थे जिन्होंने फारसी के पारंपरिक शेरों विशेषकर क़सीदा और ग़ज़लों को नई जान प्रदान की।

               

 सनाई ने अपने बहुत सारे अनुभवों और परिज्ञानी विचारों को शेरों में बयान किया है। उनसे पहले तक परिज्ञानी विचार केवल गद्य की किताबों में प्रकाशित होते थे और सनाई ने अपने परिज्ञानी अनुभवों को शेर के रूप में पेश किया और मौलवी ने उसे पूरिपूर्णता तक पहुंचाया। सनाई के बाद परिज्ञानी विषय फारसी शेरों में प्रकाशित होने वाले सबसे प्रचलित विषय बन गये।

 

 

अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि परिज्ञान का कोई महत्वपूर्ण विषय नहीं है जिसकी ओर सनाई के शेरों में संकेत न किया गया हो।

 

सनाई के शेरों की पहली पुस्तक “हदीक़तुल हक़ीक़ा सनाई” है जिसे परिज्ञान, धार्मिक और नैतिक विषयों की शिक्षा देने के लिए लिखा गया है और उनके शेरों को इसी उद्देश्य से कहा गया है। सनाई की किताब की एक शैली विभिन्न प्रकार की कहानियों, रवायतों, महान व्यक्तियों के साथ वार्ता और शास्त्रार्थ आदि को बयान करना है। सनाई बहुत से दूसरे शायरों से पहले हैं और उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में मूल्यवान रचना छोड़ी है जो इस संबंध में दूसरे बहुत से शायरों के आदर्श का कारण बनी है। इस आधार पर बहुत से अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि सनाई फारसी में परिज्ञानी शेरों के जनक हैं और प्रसिद्ध ईरानी शायर अत्तार के ने उनकी अस शैली को विस्तृत रूप दिया और यह मौलाना के माध्यम से परिपूर्णता तक पहुंची।

सनाई के अनुसार कहानियां केवल नैतिक एवं परिज्ञानी विषयों को बयान करने और सीखाने का साधन हैं। कहानी और उसके बिन्दुओं को बयान करने के दौरान उन्होंने इस बात को दृष्टि में नहीं रखा कि इससे संबोधक प्रसन्न होगा या अप्रसन्न। इसी कारण उन्होंने जो कहानियां बयान की हैं अधिकांशतः वे छोटी हैं और उन्हें एक सामान्य बातचीत के रूप में पेश किया गया है।

 

 

सनाई की हदीक़तुल हदीक़ा नामक जो किताब है उसके दो भाग हैं। एक भाग में भूमिका, महान ईश्वर और पैग़म्बरे इस्लाम की प्रशंसा और विभिन्न इस्लामी विषयों को पेश किया गया है। इसी प्रकार किताब के दूसरे भाग में कहानियों को बयान किया गया है। सनाई ने किताब के दोनों भागों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए अलग से किसी शब्द का प्रयोग नहीं किया है। उन्होंने अपने दृष्टिगत नैतिक एवं परिज्ञानी विषयों को पेश किया है और उनकी अधिक व्याख्या के लिए उन्होंने कहानियों का सहारा लिया है। इस आधार पर इन कहानियों के उल्लेख से किताब की अस्ली विषय वस्तु पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है यानी अगर उनका उल्लेख न किया जाये तब भी किताब के विषयों के अर्थ में कोई अंतर नहीं पड़ेगा।

इस बात की अनदेखी करते हुए कि सनाई की किताब हदीक़तुल हक़ीक़ा की समस्त कहानियों के बयान करने की शैली क्या है, हदीक़तुल हक़ीक़ा की समस्त कहानियां शिक्षाप्रद हैं। इन कहानियों को साधारण अंदाज़ में बयान किया गया है। इनमें महान धार्मिक हस्तियों की जीवनी के अतिरिक्त विभिन्न धार्मिक, नैतिक और परिज्ञान से संबंधित विषयों को बयान किया गया है।

 

 

सनाई की किताब को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा जा सकता है। महान ईश्वर की प्रशंसा, बुरी विशेषताओं की निंदा व आलोचना, मानवीय विशेषताओं व गुणों की प्रशंसा और दुनिया का अंत तथा दुनिया एवं उसमें रहने वालों का बेवफा होना। इन विषयों के मध्य दुनिया की आलोचना और उसका मिट जाना साहित्यिक दृष्टि से शिक्षाप्रद भाग है। इस भाग में दुनिया और दुनिया वालों की विभिन्न पहलुओं से निंदा की गयी है। प्राचीन कहानियों का आधार क्रिया- प्रतिक्रिया और कारक व कारण होता था जबकि आज की कहानियों व घटनाओं में समय को दृष्टि में रखा जाता है।

सनाई की “हदीक़तुल हक़ीक़ा” किताब की अधिकांश कहानियों में शायर वार्ता और किसी व्यक्ति के नाम का उल्लेख करके कहानी का आरंभ करता है और कुछ स्थानों पर समय, स्थिति या जगह का भी वर्णन करता है। दूसरे शब्दों में शायर इस माध्यम से उस स्थान को बयान करता है जहां घटना घटित हुई होती है और कहानी के दूसरे भाग में उस चीज़ का वर्णन करता है जो कुछ हुआ या कहा गया है और कहानी के तीसरे भाग में निष्कर्ष के रूप में नैतिक या परिज्ञान से संबंधित शिक्षाप्रद बिन्दु का उल्लेख किया जाता है।

सनाई की कहानियां छोटी होती हैं और कभी- कभी ऐसा होता है कि कहानी की भूमिका, मूल कहानी और निष्कर्ष को शेर की कुछ ही पंक्ति में बयान कर दिया जाता है। उदाहरण स्वरूप एक व्यक्ति बोहलूल से पूछता है कि तुम पसंद करते हो कि मैं तुम्हें यमनी चादर दे दूं? बोहलूल कहते हैं ठीक है मुझे यमनी चादर दे दो परंतु उसके साथ २०० डंडा भी खाऊं। दूसरे व्यक्ति ने इसका कारण पूछा तो बोहलूल ने उत्तर दिया और कहा क्योंकि इस दुनिया में कोई भी आराम कष्ट के बिना प्राप्त नहीं होता है।

 

 

अपनी कहानियों में बयान करने के लिए सनाई ने जिन व्यक्तियों को चुना है उनका संबंध समाज के विभिन्न वर्गों से है। सनाई की कहानियों के अधिकांश नाम अज्ञात हैं। अधिकांश अनाम व्यक्तियों का वर्णन सार्वजनिक नाम या विशेषताओं से होता है जैसे बच्चा, बूढ़ा, जवान, लड़का, बेवकूफ, प्रेमी आदि। विशेष व्यक्ति अधिकतर राजा व शासक होते हैं और अधिकांश अवसरों पर उनकी सकारात्मक भूमिका होती है। इस बात को दृष्टि में रखना चाहिये कि सनाई की हदीक़तुल हक़ीक़ा पुस्तक का मूल उद्देश्य कहानी बयान करना और परिणाम के तौर पर किसी नैतिक बिन्दु का उल्लेख करना है इसलिए लोगों की विशेषताओं को बयान करना सनाई के लिए कोई महत्व नहीं रखता है। समस्त लोग एक भाषा में बात करते हैं और उनके व्यवहार में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है।

 

 

सनाई द्वारा बयान की गयी अधिकांश कहानियां छोटी हैं और इस बात के दृष्टिगत कि उनका मूल उद्देश्य नैतिक संदेश को बयान करना और उसे लोगों तक पहुंचना है, उनमें व्यक्तियों की जीवनी की बहुत कम चर्चा की गयी है और कभी कभी तो ऐसा होता है कि कुछ अवसरों पर व्यक्ति के परिचय के बिना केवल नाम का उल्लेख करके कहानी का आरंभ हो जाता है। सनाई की अधिकांश कहानियों में दो व्यक्ति होते हैं और दोनों कहानी के नायक के रूप में या एक दूसरे के विरोधी के रूप में एक दूसरे के मुक़ाबले में होते हैं या कहानी, बातचीत में एक व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर समाप्त होती है और संबोधक भी एकमात्र सुनने वाला होता है इसके बिना कि वह कहानी में कोई सक्रिय भूमिका निभाये।

 

 

सनाई द्वारा बयान की गयी कहानियों में ध्यान योग्य विविधता नहीं दिखाई देती है। कुछ कहानियों में कहानी का लेखक ही कहानी का एक पात्र होता है और बहुत सी कहानियों को तीसरे व्यक्ति की दृष्टि से बयान किया जाता है मानो कहानी बयान करने वाला समस्त लोगों के विचारों से अवगत है। वह उनकी वार्ता का नेतृत्व करता है। अधिकांश कहानियों में सनाई केवल कहानी बयान करने वाले नहीं होते हैं और कहानी के अंत में वह कहानी के संदेश के बारे में अपना दृष्टिकोण बयान करते हैं और उससे नैतिक निष्कर्ष निकालते हैं और यह निष्कर्ष निकालना कभी व्यक्तियों की बातों के दौरान होता है इसलिए कहानी के समाप्त होने और सनाई के बयानों के आरंभ होने के मध्य की सीमा ही स्पष्ट नहीं हो पाती है।

 

 

पारंपरिक कहानियों की एक विशेषता यह है कि उनमें समय और स्थान का बोध ही नहीं हो पाता है और सनाई की किताब हदीक़तुल दक़ीक़ा में जो कहानियां हैं उनसे अधिकांश के समय और स्थान का पता ही स्पष्ट नहीं है। इसके साथ ही कुछ ऐसी भी कहानियां मौजूद हैं जिनमें दो चीज़ों में से एक चीज़ ज्ञात है यानी समय या स्थान में से कोई एक चीज़ स्पष्ट है। इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि कहानी का नाम लेने से ही उसका स्थान स्पष्ट होता है और कहानी में कहीं भी उसके स्थान की विशेषता या उसके बारे में अधिक चर्चा नहीं की जाती है।

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