ईरान भ्रमण - 40 (सुन्दर प्रान्त बूशहर)
किसी भी शहर में दर्शनीय स्थल अनेक होते हैं नगर की प्राचीनता आदि के लिहाज़ से कम या ज़्यादा हो सकते है।
बूशहर में बहुत सी एतिहासिक इमारतें हैं जिनमें प्राचीन घर, जल संयह , रीशहर के खण्डहर, शेख़ सादून जामा मस्जिद और दूसरे अन्य दर्शनीय स्थल शामिल हैं।
बूशहर में जन संग्रहालय की इमारत काजारी काल में बनायी गयी थी। इस दो मंज़िला इमारत में कुल १० कमरे हैं। संग्रहालय के सभी हिस्सों में इस प्रान्त के लोगों के बारे में पर्याप्त सूचनाएं हैं जिनसे स्थानीय लोगों के बारे में काफ़ी मालूमात मिल जाती है।
संग्रहालय की इमारत को बैत हीलानी शैली में बनाया गया है जो इमारत बनाने की प्राचीन शैली है और इसका प्रयोग पुराने ज़माने में हवेलियों और महलों के निर्माण में किया जाता रहा है।
बूशहर में बहुत सी इमारतें हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इसी प्रकार की इमारतों में कुलाहे फ़रंगी नामक इमारत भी है जिसे क़ाजारी काल में बनाया गया था और यह इमारत, सांस्कृतिक धरोहरों में पंजीकृत है। इस इमारत को फ़ार्स की खाड़ी में समुद्री यात्रा का संग्रहालय बना दिया है।
दक्षिणी ईरान के जो नगर हैं वह कई तरह से ख़ास होते हैं। इसी लिए उनके बाज़ार भी ख़ास और अनोखे होते हैं और दक्षिणी नगरों के बाज़ारों की तरह ईरान के अन्य क्षेत्रों में बाज़ार नज़र नहीं आते। तो बूशहर का बाज़ार भी इस से अपवाद नहीं हो सकता।
बूशहर में गब्बे नामक एक विशेष प्रकार के कालीन की बुनाई होती है जो काफ़ी लोकप्रिय है। गब्बे ईरान के अधिकांश प्रान्तों में बुनी जाती है।
गब्बे का आकार छोटा होता है। इसके रोएं फूले हुए होते हैं और इनकी बुनाई में बहुत बारीकी से काम होता है इसी लिए यह काफ़ी नर्म होता है।
प्राचीन कल में बुने जाने वाले गब्बे, रंगीन होते थे मतलब भेड़ के सफ़ेद, काले और मटमैले रंग के ऊन को बिना किसी परिवर्तन के गब्बे की बुनाई में प्रयोग किया जाता है।
बूशहर में अबा भी बुनी जाती है जिसे हम शाल भी कह सकते हैं। बूशहर के बुने गये शाल बेहद नर्म होते हैं और उन्हें अंट के ऊन के बुना जाता है। यह वास्तव में ईरान हस्तकला का उत्कृष्ट नमूना होता है और इस प्रकार की चादर या शाल केवल बूशहर में ही बुनी जाती है।
बुशहर की दरी भी बहुत मशहूर है। बूशहर में बुनी जाने वाली दरी रंग बिरंगी होती है और ख़ास प्रकार के डिज़ाइन होते हैं इसी लिए बूशहर के दरी बहुत मशहूर होते हैं। वैसे एक बात यह भी हम बता दें कि बूशहर , फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के निकट है इस लिए विशेष प्रकार की हस्तकला के नमूने काफ़ी लोगप्रिय हैं।