Aug ०४, २०२० ११:०० Asia/Kolkata

जैसा कि हमने कहा था आज शीराज़ के बेहद प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हाफ़ेज़िया से आप को परिचित कराएंगे। हाफ़िज़िया ईरान के प्रसिद्ध महाकवि, ख़्वाजा शमसुद्दीन मुहम्म शीराज़ी कामज़ार है।

ख़ाजा शमसुद्दीन मुहम्मद शीराज़ी फ़ार्सी के बेहद मशहूद कवि हैं जिन्हें लेसानुलग़ैब अर्थात , ईश्वरीय वाणी की उपाधि मिली है। वह ईरान ही नहीं बल्कि दुनिया के कुछ बड़े शायरों में गिने जाते हैं।

दुनिया की बहुत सी ज़बानों में अनुवाद हो चुका है यही वजह है कि उनके प्रशंसक पूरी  दुनिया में फैले हैं। ईरान में हाफ़िज़ काविशेष स्थान है।

ईरान के इस प्रसिद्ध शायर का मज़ार शीराज़ के हाफ़िज़िया सड़क पर है। उनकी आरामगाह को ख़ूबसूरत पत्थरों से बनाया गया है र मज़ार में पत्थर के २० खंभे बनाए गये हैं।

ईरान के एक अन्य मशहूद शायर, सअदी का मज़ार भी शीरज़ जाने वाले पर्यटकों के लिए बकर्षण का केन्द्र है। तेरहवीं सदी के विश्व विख्यात कवि सअदी का नाम साहित्य से दिलचस्पी रखने वाला दुनिया के हर आदमी को पता है ।

शेख़ सअदी का मज़ार, शीराज़ के दिलकुशा नामक प्रसिद्ध बाग़ के पास है। उनकी कब्र के आस पास कई अन्य प्रसिद्ध लोगों की क़ब्रें भी हैं। शीराज़ वह जगह है जहां ईरान के इस मशहूद शायर ने अपने जीवन के अंतिम क्षण गुज़ारे थे। मरने के बाद उन्हें इसी नगर में दफ़्न करदिया गया।

शीराज़ नगर ने बहुत से उतारचढ़ाव देखे हैं। एक समय था जब यह नगर ज़ंदिया शासन श्रंखला का केन्द्र था इस दौर में शीराज़ में कई इमारतों का निर्माण हुआ और यह नगर कला व संस्कृति का केन्द्र बन गया।

 करीम ख़ान फ़ार्स क्षेत्र के शासक थे और सन १७६६ ईसवी में उन्होंने इस किले के निर्माण का आदेश दिया था। उन्होंने ईरान में जंद शान श्रंखला की नींव रखी थी। करीम ख़ान ने क़िला बनाने के लिए उस समय के अत्याधिक दक्ष शिल्पकारों और पत्थर तराशने वालों को शीराज़ बुलाया और उन्हें दक्ष मज़दूर और मसाले दिये ताकि इस क़िले का निर्माण अच्छी तरह से हो सके।

करीमख़ान क़िले के निर्माण में मुख्य रूप से पत्थर और ईंटों का प्रयोग किया गया है। क़िले के चारों ओर ऊंची दीवार है जिसकी वजह से वह एक सैनिक क़िला लगता है।

क़िले की दीवारों और उसकी नींव को , पक्की ईंटो। वे बनाया गया है।

खिड़िकयों के फ्रेम यज़्द के मरमर के पोथर से बनाये गये हैं जबकि शीशे से की जाने वाली तथा अन्य प्रकार की सजावट के साधनों को रूस और तुर्की से लाया गया है।

दूसरी कृत्रिम छत है जो संभावित रूप से बाद में कमरो। की छत नीचे करने के लिए बनाया गया है। उसको सजाने के लिए सोने, पारे औज्ञ सेनाबर का प्रयोग किया गया है र उसकी सजावट की शैली, सफवी काल की चित्रकला से मिलती जुलती है। करीम ख़ान क़िले की निर्माणशैली, तीन दालानों वाली शैली है। करीम ख़ान के बाद, कुछ क़ाजारी शासकों ने इन डिज़ाइनों पर चूने का प्लास्टर लगवा कर अपनी पंसद का डिज़ाइन बनवा दिया किंतु हालिया वर्षों में इस क़िले की मरम्मत के दौरान बड़ी सावधानी से यह कोशिश की जा रही है कि कमरों की दीवारों का पहले वाला रूप सामने आ जाए।

क़िले के प्रांगण के एक कोने में , एक सीढ़ी है। यह सीढ़ी दूसरी मंज़िल तक जाती है और वहां से घर के पिछले हिस्से में स्थित प्रागंण में जाने का रास्ता है।

कुछ आगे बढ़ने पर एक अपेक्षाकृत लंबी दालान मिलती है जिसके बाद हम्माम का गर्म भाग मिल जाता है जहां गर्म पानी के अलावा दसियों सुविधाएं हैं जिन्हें राजा और उसके विशेष दरबारी, वर्षों तक प्रयोग करते रहे हैं। इस भाग में भी ख़ूबसूरत डिज़ाइन नज़र आते हैं जो पत्थर के खंभों के साथ वैभवशाली सुन्दरता लिए हुए हैं।