Aug १७, २०२० ११:०८ Asia/Kolkata
  • ईरान भ्रमण - 45 (शहरे सूख्ते)

ज़ाहेदान नगर की सैर जारी रखते हुए हम ज़ाबुल की तरफ बढ़ते हैं तो इस नगर से मात्र 56 किलोमीटर की दूरी पर हमारे क़दम खुद ही रुक जाते हैं।

यह जगह एक वीराना है और एक शहर के खंडहर हैं लेकिन कभी इस नगर में दुनिया की अत्याधिक प्राचीन सभ्यता की रौनक़ थी। इस नगर को " शहरे सूख्ते" या बर्न्ट सिटी अर्थात जला हुआ नगर कहा जाता है। बर्न्ट सिटी ईरान की एक प्राचीन सभ्यता यादगार के तौर पर प्रसिद्ध है। यह ज़ाबुल से सीस्तानो बलोचिस्तान प्रांत के केन्द्र ज़ाहेदान जाने वाले राजमार्ग पर 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस महानगर की स्थापना का काल जीरुफ़्त सभ्यता के एक भाग से मिलता है जो लगभग छह हज़ार वर्ष पहले थी। कहा जाता है कि शहरे सूख़्ते या बर्न्ट सिटी प्राचीन समय में विश्व के सबसे विकसित शहरों में से एक था।

 यह नगर सीस्तान के हरे भरे पठार में स्थित है और उसके आस पास हामून और हीरमंद झीले हैं । अमरीका के ईरानविद रिचर्ड एन, फ्राई ने इस जगह को देखने के बाद लिखा कि सीस्तान, प्राचीन काल और एतिहास में रूचि रखने वालों की जन्नत है। पांच हज़ार साल पुरानी इस सभ्यता में ज़ाहिर सी बात है हीरमंद नदी और हामून झील की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

 आज जो बर्न्ट सिटी है वहां कोई रहता नहीं बल्कि कुछ टीलों और खंडहरों को शहरे सूख्ते कहा जाता है।  पुरातनविदों के अनुसार शहरे सूख़्ते या बर्न्ट सिटी लगभग तीन लाख हेक्टेयर पर फैली हुई है । इस नगर को सन 3200 ईसापूर्व बनाया गया था और लगभग सन 2200 ईसा पूर्व अचानक ही यह नगर तबाह हो गया। ब्रिटेन के सैन्य अफसर " लेन बिट " ने जब इस नगर को देखा तो उसका नाम " बर्न्ट सिटी " रख दिया क्योंकि उनके अनुसार इस नगर में आग लगने के चिन्ह हर ओर नज़र आ रहे थे और उनके अनुसार यह नगर आग से ही बर्बाद हुआ। लेकिन बाद में किये जाने वाले अध्ययनों से पता चला कि यह नगर आग की वजह से नहीं बल्कि पानी और हवा की वजह से तबाह हुआ था। 

 

इस जले हुए नगर के खंडहरों और अवशेषों से पता चलता है कि  इस नगर के पांच मुख्य भाग थे। एक भाग आवासीय था जो पूर्वोत्तरी भाग में था, दूसरा केन्द्रीय भाग, तीसरा औद्योगिक क्षेत्र, चौथा स्मारकों और पांचवा कब्रिस्तान का भाग था। शहरे सूख़्ते का अस्सी हेक्टेयर का क्षेत्रफल आवासीय भाग के लिए विशेष था। इस भाग में किये जाने वाले खनन  के दौरान  वास्तुकला और आयताकार इमारत के अवशेष मिले हैं । इमारतों में 6 से 10 ताक़ थे जो छोटी दीवारों के माध्यम से एक दूसरे से अलग किए गए थे। द्वार, खिड़कियां, कमरे गर्म रखने वाली विशेष व्यवस्था, सीढ़ियां और भट्टियां, बहुत बेहतर रूप में मिली हैं। शहरे सूख़्ते में हुयी खुदायी में ऐसे बर्तन मिले हैं जिन पर काले, भूरे और पीले रंग के के पशुओं के सुंदर चित्र बने हुए हैं। इसी प्रकार खुदाई के दौरान धातु, पत्थर, लकड़ी और मिट्टी की वस्तुएं मिली हैं।

 

बर्न्ट सिटी का अध्ययन पहली बार ब्रिटेन के प्रसिद्ध पुरातन विद सर ओरल स्टेन ने किया था। इस नगर में मिलने वाले अवशेष भांति भांति के हैं। आप के लिए यह जानना रोचक होगा कि इस नगर में एक कृत्रिम आंख मिली है जो 4 हज़ार 8 सौ साल पुरानी है। यह नकली आंख एक महिला की थी जिसकी आयु 25 से 35 साल रही होगी। उसकी लाश एक क़ब्रिस्तान से मिली थी।

 

इस नगर का एतिहासिक क़ब्रिस्तान देखने की जगह है। एक कब्र में 12 खोपड़ियां मिली हैं जिसमें एक 12 -13 साल की लड़की की खोपड़ी है जिसे हाइड्रोसेफ़लस नामक बीमारी थी और उसका आप्रेशन किया गया था । यानी इस नगर के चिकित्सकों को 4750 साल पहले इस बीमारी का पता था और उन्होंने उसके मस्तिष्क का आप्रेशन किया था जो दुनिया में सब से पुराने आप्रेशन की सुबुत है।  पुरातनविज्ञान के नए शोध के अनुसार शहरे सूख़्ते की सभ्यता प्राचीन दुनिया के अचरजों में से एक है। शहरे सूख़्ते में वर्षों की खुदाई के दौरान मिली चीज़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह शहर कांस्य युग का केन्द्र हुआ करता था। शोध से पता चलता है कि शहरे सूख़्ते अपने वर्तमान रूप के विपरीत कई सहस्त्राब्दी ईसापूर्व हराभरा क्षेत्र था।  हामून झील लगभग बत्तीस सौ ईसापूर्व एक विशाल झील थी जिसमें सदैव पानी से भरी रहने वाली हीरमंद जैसी कई नदियां गिरती थीं। इस समय हीरमंद और कुछ दूसरी नदियां विशेष मौसम में इस झील को पानी देती हैं।    

 

जैसा कि हम बता चुके हैं सीस्तान व बलोचिस्तान को पुरातन विदो की जन्नत कहा जाता है लेकिन इसके साथ ही यह क्षेत्र इतिहास से रूचि रखने वाले  पर्यटकों के लिए भी स्वर्ग ही है। इसी जन्नत की एक झलक दिखाने के लिए हम आप को " दहाने गुलामान" गांव ले चलते हैं। 

 

दहानए गुलामान, नगर ज़ाबुल नगर से 44 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इस प्राचीन नगर ने पहली बार सन 1960 में पुरातन विदों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उसके बाद से खनन आरंभ हुआ। इटली के प्रसिद्ध पुरातन विद ओम्बर्ट सेराटो ने दहानए गुलामान नगर की खोज की। इस नगर के निकट एक संकरा पहाड़ी रास्ता है जो अतीत में ईरानी पठार से इस नगर को जोड़ता था। दासों का व्यापार करने वाले इसी मार्ग से अफ्रीकी दासों को ईरान ले आते थे इसी लिए इस नगर को भी दहानए गुलामान, यानि दासों का मुहाना कहा जाने लगा। दहानये गुलामान नगर का ईरानी सभ्यता में बहुत अधिक महत्व है। यह नगर हखामनी काल से संबंधित है और वह एकमात्र प्राचीन नगर है जिससे यह पता चलता है कि ईरान के पूर्वी क्षेत्रों पर ईरान का पूर्ण रूप से अधिकार था और इसी प्रकार यह एकमात्र प्राचीन नगर है जिसे बनाने वाले इंजीनियरों ने पहले पूरे नगर का नक्शा तैयार किया और फिर नगर बनाया। इसी के साथ इस नगर में पहरेदारों के लिए मीनारे आदि नहीं मिलने जिससे पता चलता है कि यह नगर प्राचीन काल में बेहद सुरक्षित था। 

इस नगर में बनायी गये इमारतें, सीस्तान व बलूचिस्तान के मौसम के अनुरुप हैं और चूंकि साल के 120 दिनों तक इस पूरे क्षेत्र में तेज़ हवाएं चलती हैं इस लिए सारे घरों के मुख्य द्वार, इमारत के दक्षिणी भाग में बनाए गये हैं। सारी इमारतें, ईंटों से, आयाताकार और चौकोर बनायी गयी हैं जिनमें ढेरों खंभे बनाए गये हैं।  इस नगर को भी कई भागों में बांटा गया है। एक भाग अवासीय, एक उद्योगिक, सार्वाजनिक, शासकों के लिए  और धार्मिक भाग सब अलग अलग हैं। इस नगर में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अवशेष, उपासना स्थल है। खनन के दौरान नगर के अवशेषों में एक बहुत विशाल उपासना स्थल का पता चला जो इस पूरे क्षेत्र में मिलने वाली सब से महत्वपूर्ण इमारत है। इसी प्रकार, उपासना के लिए विभिन्न प्रकार के साधन, अग्निकुंड आदि प्राप्त हुए हैं। 

 

इतिहासकार इस नगर को " ज़रक"  या " ज़रंग" का नाम देते हैं जो वास्तव में " ज़रंकाय" या " दरान्गयाना" की राजधानी था कि जिसका उल्लेख, हखामनी काल से भीतलेखों और शिलालेखों में मिलता है और जो बीसुतून और पेर्सपोलिस और नक्शे रूस्तम जैसे प्राचीन स्थलों से मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस नगर के वीरान होने सब से बड़ा कारण, हीरमंद नदी का अचानक सूख जाना रहा है। यह नगर इसी नदी के बल पर आबाद था जब नदी सूख गये तो फिर इस नगर में रहना संभव नहीं रहा इसी लिए लोग इस नगर को छोड़ कर चले गये और नगर वीराने में बदल गया।