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भारत को गुड तालेबान की तलाश
Jun २७, २०२१ १५:४२ख़बर यह है कि भारत जो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दुनिया भर में गुड तालेबान, बैड तालेबान की टर्मिनालोजी की बुनियाद पर प्रोपैगंडा किया करता था अब ख़ुद अपने लिए गुड तालेबान की तलाश में फिर रहा है। इस बात का ख़ुलासा भारत और अफ़ग़ानिस्तान के दो बड़े मीडिया संस्थानों ने किया है।
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क्या ईरानी तेल टैंकरों के मुद्दे पर लेबनान में छिड़ जाएगी महाभारत? क्या होगी अमरीका की प्रतिक्रिया? अमरीकी राजदूत के हस्तक्षेप पर हमारा जवाब
Jun २६, २०२१ १६:१०लेबनान में अनगिनत संकट मौजूद हैं और नित नए संकट पैदा हो रहे हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों में निराशा फैल रही है। लेबनानी जनता जटिलताओं के चंगुल में इस लिए जकड़ उठी है कि अमरीका के नेतृत्व में कुछ स्थानीय ताक़तें लेबनान के टुकड़े कर देने पर तुल गई हैं। मक़सद है इस्राईल को संतुष्ट और सुरक्षित करना।
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क्या अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान को लीबियान बनाना चाहता है?
Jun २६, २०२१ १२:५१अमरीकी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान की जनता और सरकार को ख़तरे में डाल कर इस देश को लीबिया बनाना और अफ़ग़ानिस्तान और पड़ोसदी देशों पर गृहयुद्ध के ख़र्चे थोपने की कोशिश में है।
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इराक़ के परमाणु प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने से संबंधित साक्ष्य अब सामने क्यों ला रहा है इस्राईल? क्या यह ईरान को धमकी देने की कोशिश है?
Jun २४, २०२१ १५:४४चार बड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं जिनका संबंध ईरान के परमाणु मामले में जारी वार्ता से है।
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रईसी के सत्ता में आ जाने के बाद परमाणु समझौता आसान हो गया या असंभव?
Jun २३, २०२१ १५:४२ब्रिटेन के अख़बार गार्डियन ने सैयद इब्राहीम रईसी के ईरान के राष्ट्रपति चुने जाने के बारे में एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें इस बात का जायज़ा लिया गया है कि सत्ता में आने वाली इस तब्दीली के बाद ईरान के साथ परमाणु समझौता आसान हो गया है या असंभव?
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धर्म के नाम पर आग लगाती राजनीति, रोटी सेकते टीवी चैनल, दर-दर भटकती जनता, फिर भी है सब कुछ अच्छा
Jun २३, २०२१ १०:१९भारत एक ऐसा महान देश है जिस देश में दुनिया के सभी धर्मों के लोग एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं। एकता और एकजुटता इस देश को महान बनाती है। बल्कि यूं कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा कि अगर मोहब्बत के रंग-बिरंगे फूलों को देखना है तो दुनिया के नक़्शे पर मौजूद भारत के गुलदस्ते को देखा जा सकता है। लेकिन इधर कुछ वर्षों से इस गुलदस्ते की देख-रेख करने वाले मालियों ने इसपर से ध्यान हटा लिया है जिसकी वजह से यह सूखने लगा है।
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हमास के नेता यहया सिनवार ने कहा फिर शुरू कर देंगे जंग, बेनेत की धमकी गज़्ज़ा में उतारेंगे ज़मीनी फ़ौज, तो पहला मिसाइल कौन फ़ायर करेगा?
Jun २२, २०२१ १५:५९हम तो यह समझ रहे थे कि हालिया ग़ज़्ज़ा जंग पिछली जंगों से अलग होगी यानी इस बार का संघर्ष विराम कुछ समय तक चलेगा और कोई राजनैतिक समझौता हो सकेगा जिसके नतीजे में ग़ज़्ज़ा पट्टी का परिवेष्टन ख़त्म होगा और वहां पुनरनिर्माण का काम शुरू हो जाएगा। लेकिन इस समय मिलने वाले सारे इशारे यह बता रहे हैं कि जंग किसी भी समय फिर शुरू हो सकती है।
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मआरिब की जंग अपने अंतिम चरण में, अमरीका की छटपटाहट, यमनियों के इरादे बुलंद, आख़िरी कार्यवाही के लिए कसी कमर...
Jun २२, २०२१ १५:२९अमरीका ने यमन की हालिया वार्ता में यह खुलकर धमकी दी ताकि वह यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों द्वारा मआरिब पर नियंत्रण को रोक दें। फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट कुछ मीडिया सूत्रों ने बताया है कि यमन की हालिया वार्ता में अमरीका ने खुलकर सऊदी अरब का पक्ष लिया और उसने सऊदी अरब से भी ज़्यादा मआरिब प्रांत में युद्ध विराम का अह्वान किया।
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अमरीका ने अचानक सऊदी अरब और जार्डन सहित कई देशों को दिया ज़ोरदार झटका! इस समय क्यों? विकल्प क्या हैं?
Jun २१, २०२१ १६:०१अचानक और वह भी उस समय जब ईरान और उसके घटकों की मिसाइल ताक़त पश्चिमी एशिया में बहुत तेज़ गति से विस्तृत होती जा रही है, वाल स्ट्रीट जरनल ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा ख़ुलासा किया कि पेंटागोन ने मध्यपूर्व के इलाक़े विशेष रूप से सऊदी अरब, इराक़, जार्डन और कुवैत में जून महीने से मिसाइल ढाल सिस्टमों की संख्या घटाने का फ़ैसला किया है।
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इब्राहीम रईसी की जीत से अगर इस्राईल सहमा हुआ है तो हमारे विचार में यह बिल्कुल सही है। बड़े फ़ौलादी इरादे के साथ अब आगे बढ़ेगा ईरान। क्या होगा परमाणु वार्ता का भविष्य?
Jun २१, २०२१ १५:१८सैयद इब्राहीम रईसी ईरान के राष्ट्रपति चुने गए तो इसका मतलब यह है कि अब ईरान में ताक़तवर इंक़ेलाबी सरकार बनने जा रही है। इमाम ख़ुमैनी के स्वर्गवास के बाद यह पहला अवसर है जब संसद, सरकार और न्यायपालिका तीनों विभाग सिद्धांतवादी कहे जाने वाले नेताओं के हाथ में आ गए हैं।