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कौन हैं एंटोनी ब्लिंकन जो संभालेंगे अमरीकी विदेश मंत्रालय की कमान? इस नाम से क्यों घबराए हुए हैं नेतनयाहू और बिन सलमान?
Nov २५, २०२० १४:४६अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने एंटोनी ब्लिंकन को विदेश मंत्री नामज़द किया है जिसके बाद ब्लिंकन के बारे में बहस शुरू हो गई है कि वह किस विचारधारा के व्यक्ति हैं।
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धार्मिक मतभेद फैलाना, नेतनयाहू की सऊदी अरब यात्रा का बुनियादी लक्ष्य
Nov २५, २०२० १३:३४इस्राईली प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू की सऊदी अरब की यात्रा के बारे में ख़बरें सामने आने के बाद, सऊदी मीडिया ने, इस्राईली मीडिया के विपरीत इस संबंध में पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
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सीरिया पर इस्राईल के हमले में तेज़ी की अस्ल वजह?
Nov २५, २०२० ११:२६मंगलवार की रात सीरिया के क़ुनैतरा व दमिश्क़ के कुछ दक्षिणी इलाक़ों पर इस्राईल ने हवाई हमला किया। पिछले हफ़्ते भी ज़ायोनी शासन ने कई बार सीरिया के कुछ इलाक़ों पर हमले किए थे। इस बीच सीरिया के कुछ सरकार विरोधी सूत्रों ने झूठा दावा करते हुए कहा है कि अलबूकमाल में ईरान के कुछ ठिकानों पर इस्राईल ने हमले किए हैं। इस दावे की किसी भी विश्वस्त सूत्र ने पुष्टि नहीं की है।
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तुर्की के जहाज़ में घुस गए जर्मन सुरक्षा कर्मी स्टाफ़ को कर लिया गिरफ़तार...क्या आर्थिक प्रतिबंधों से पहले यह कड़ी वार्निंग है? अर्दोग़ान का क्या होगा जवाब?
Nov २५, २०२० ०६:०९तुर्की के समुद्री जहाज़ को जो लीबिया के मिस्राता शहर की ओर जा रहा था जर्मन युद्धक जहाज़ ने बीच में ही रोक लिया। जर्मन सुरक्षा कर्मी हेलीकाप्टर से तुर्क जहाज़ के बोर्ड पर उतरे और जहाज़ की तलाशी लेने के बाद कैप्टन और कर्मीदल को गिरफ़तार कर लिया। यह बहुत बड़ी घटना है जो सैनिक टकराव की सीमा तक आगे जा सकती है।
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ईरान के सामने ट्रम्प की नाकामी के क्या कारण हैं?
Nov २४, २०२० १५:११पिछले 4 वर्षों के दौरान, ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नीति आश्चर्यजनक रूप से न सिर्फ़ पूरी तरह से नाकाम हो गई है, बल्कि इसका अंत भी बहुत बुरा हो रहा है।
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नेतनयाहू ने रखे मक्का-मदीना की धरती पर अपने नापाक क़दम... आप जिस तरह चाहें इस्राईल की गोद में जाकर बैठें मगर हम इतना जानते हैं कि आपको पछताना पड़ेगा!
Nov २४, २०२० ०७:१४जब इस्राईल के सारे सरकारी और ग़ैर सरकार संचार माध्यम कह रहे हैं कि लाल सागर के तट पर नियोम शहर में मुहम्मद बिन सलमान और माइक पोम्पेयो से इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू की रविवार को मुलाक़ात हुई तो सऊदी अरब के विदेशमंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान के ट्वीट में बहुत शर्मा कर और लजा कर किया जाने वाला खंडन हरगिज़ यक़ीन करने लायक़ नहीं है।
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क्या नेतनयाहू, पोम्पियो और बिन सलमान की तिगड़ी ने ईरान पर हमले को अंतिम रूप दे दिया?
Nov २३, २०२० १५:३५सन् 2008 में अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में बराक ओबामा की जीत की घोषणा के बाद, इस्राईली अधिकारियों को पूरा विश्वास था कि पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले ईरान के परमाणु संयंत्रों पर बमबारी का आदेश ज़रूर देंगे, लेकिन इस्राईली अधिकारियों की यह तमन्ना पूरी नहीं हुई और आज भी ईरानी परमाणु संयंत्र भरपूर क्षमता के साथ न सिर्फ़ खड़े हैं, बल्कि पहले से कहीं अच्छी गुणवत्ता और अधिक मात्रा में यूरेनियम संवर्धन कर रहे हैं।
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क्या फ़्रांसीसी राष्ट्रपति को हिटलर कहकर पाकिस्तानी मंत्री ने ग़लती की? मैक्रां से हमारा एक सवाल है अलबत्ता हमें मालूम है कि वह जवाब नहीं देंगे!
Nov २३, २०२० ०५:३१पाकिस्तान और फ़्रांस के संबंध इस समय बहुत ख़राब हो गए हैं क्योंकि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद के अपमानजनक कार्टून के मसले पर फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के रवैए ने पाकिस्तान की जनता और सरकार सबको बेहद आक्रोश दिला दिया है। फ़्रांस के ख़िलाफ़ पूरे इस्लामी जगत में नाराज़गी है और फ़्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आंदोलन चल रहा है।
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उत्तर प्रदेश में क़ानून का नहीं धर्म का राज है! बिना जुर्म के लखनऊ का नाबालिग़ बच्चा 11 महीनों तक रहा जेल
Nov २२, २०२० ०८:५२भारतीय पुलिस के लिए वैसे तो यह कहावत बिल्कुल फिट बैठती है कि, "जिसकी लाठी उसकी भैंस" जिस प्रदेश में जिसकी सरकार होती है उस प्रदेश की पुलिस सब कुछ वैसा ही करती है जैसा सत्ता पक्ष चाहता है। लेकिन इन सबके बीच लोगों को एक उम्मीद रहती थी, देश की अदालत से और यह देखा जाता था कि न्यायलय आम जनता की उम्मीदों पर पूरा खरा उतरता था। लेकिन अब धीरे-धीरे पुलिस वाली कहावत में भारतीय न्यायपालिका भी शामिल होती जा रही है।
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आज़रबाइजान और लीबिया के बाद क्या तुर्की अब यमन युद्ध में कूदने का इरादा रखता है? क्या सऊदी नरेश ने इसीलिए अर्दोग़ान को किया फ़ोन?
Nov २२, २०२० ०५:०७सऊदी अरब के नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान को जी-20 के शिखर सम्मेलन से एक रात पहले फ़ोन करके आपसी मतभेदों को द्विपक्षीय वार्ता से निपटाने पर ज़ोर दिया मगर हमें यह नहीं लगता कि यह टेलीफ़ोन केवल इसलिए रहा होगा कि अर्दोग़ान ख़ुद शिखर सम्मेलन में भाग लें और किसी अन्य अधिकारी को अपनी जगह न बिठाएं।