भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के इस्तीफ़े पर राजनैतिक बहस तेज़
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भारत में जहां पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव क़रीब आ गए हैं वहीं सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी पैंतरेबाज़ी भी बहुत तेज़ हो गई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १२, २०२२ १५:३२ Asia/Kolkata
  • भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के इस्तीफ़े पर राजनैतिक बहस तेज़

भारत में जहां पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव क़रीब आ गए हैं वहीं सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी पैंतरेबाज़ी भी बहुत तेज़ हो गई है।

हालात का रुख़ देखकर नेता अपना भविष्य संवारने की कोशिश में लग गए हैं। प्रभावशाली ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसी क्रम में भाजपा से इस्तीफ़े का एलान किया जिसके बाद राजनैतिक गलियारों में बहस बहुत तेज़ हो गई है।

अटकलें हैं कि वह मौर्य समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं जो उत्तर प्रदेश में भाजपा को ज़ोरदार टक्कर दे रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने ख़ुद इस्तीफ़े की घोषणा नहीं की मगर भाजपा की विचारधारा पर बढ़ चढ़ कर सवाल उठा ज़रूर उठा दिया। अखिलेश यादव के उनके साथ तस्वीर आने के बाद से ही मौर्य को लेकर राजनीतिक नफ़ा-नुक़सान का आकलन शुरू हो गया।

यूपी के प्रतापगढ़ ज़िले के रहने वाले 68 वर्षीय स्वामी प्रसाद मौर्य बीते करीब तीन दशकों से यूपी की राजनीति में सक्रिय हैं, पिछड़ा वर्ग और ख़ास तौर से कोइरी समाज में उनका अपना जनाधार है।

मीडिया में आई जानकारी के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा से लेकर पूर्वी यूपी में गोरखपुर तक कोइरी समाज का विस्तार है जो कुशवाहा, शाक्य और मौर्य, कोली नाम से जाने जाते हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्या भाजपा में जाने से पहले बहुजन समाज पार्टी के महत्वपूर्ण नेता था। स्वामी प्रसाद मौर्य ने रायबरेली जिले की डलमऊ विधानसभा सीट से बीएसपी की टिकट पर 1996 पहला चुनाव जीता था। इस के बाद वह चुनाव हारे भी लेकिन उनका राजनैतिक क़द और महत्व बढ़ता गया।

साल 2016 के आखिर में स्वामी प्रसाद मौर्य का मायावती से मतभेद हुआ जिसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी छोड़ दी।

साल 2017 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी कुशीनगर की पारंपरिक सीट पडरौना से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा और 93649 वोटों से जीत दर्ज की। मगर अब जब यूपी विधानसभा चुनाव शुरू होने में एक महीने से भी कम समय बचा है, मौर्य ने योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद मीडिया से कहा 'आज मैंने दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों, छोटे लघु मध्यम व्यापारियों के खिलाफ सरकार के रवैये को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल से मैंने इस्तीफा दिया।

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