भारत में हिन्दू चरमपंथी गुटों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हमले जारी: अमेरिकी रिपोर्ट
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अमेरिका द्वारा तैयार एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में गोहत्या के नाम पर हिंसक हिन्दू चरमपंथी गुटों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों  के ख़िलाफ़ हमले निरंतर जारी हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २३, २०१९ ०९:५६ Asia/Kolkata
  • भारत में हिन्दू चरमपंथी गुटों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हमले जारी: अमेरिकी रिपोर्ट

अमेरिका द्वारा तैयार एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में गोहत्या के नाम पर हिंसक हिन्दू चरमपंथी गुटों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों  के ख़िलाफ़ हमले निरंतर जारी हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा तैयार की गई अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट हर देश में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का वर्णन करती है। वर्ष 2018 की इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2018 तक ऐसे 18 भीड़ द्वारा हमले हुए और साल के दौरान आठ लोग मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार, ‘ भारत के कुछ ग़ैर सरकारी संगठनों के अनुसार, अधिकारियों ने अधिकतर मामलों के अपराधियों पर कार्रवाई होने से बचाया है। अमेरिकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि धार्मिक रूप से प्रेरित हत्याओं, हमलों, दंगों, भेदभाव, बर्बरता  और अल्पसंख्यकों के धार्मिक कार्यों में बाधा पहुंचाने वाले कई सारे मामले सामने आए हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट में बीते 6 फ़रवरी को भारतीय संसद में इस देश के गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिससे पता चलता है कि 2015 से 2017 के बीच सांप्रदायिक घटनाओं में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में सांप्रदायिक हिंसा के 822 मामले सामने आए, जिसमें 111 लोगों की मौत हुई और 2,384 लोग घायल हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ मोदी सरकार गोरक्षकों द्वारा किए गए हमले को लेकर कार्रवाई करने में विफल रही है। इन हमलों में कई मौतें हुईं, हिंसा हुई और घमकी देने जैसी चीज़ें शामिल थीं।’ अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि भारत की केंद्र और राज्य सरकारों एवं राजनीतिक दलों के सदस्यों ने भी ऐसे क़दम उठाए हैं जिसकी वजह से मुस्लिम प्रथाओं और संस्थान प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, ‘भारत के ऐसे शहरों का नाम बदलने का प्रस्ताव जारी रहा, जिनका नाम मुस्लिमों से जुड़ा हुआ है, विशेष रूप से इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज रखा गया।’

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘भारतीय इतिहास में मुस्लिम योगदान को मिटाने के लिए सरकारों द्वारा योजनाएं तैयार की जा रही हैं और इससे लगातार सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है।’ रिपोर्ट में राजस्थान के अलवर में रकबर ख़ान की हत्या और बुलंदशहर में गोहत्या की अफवाह को लेकर हुई हिंसा का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘परंपरा और सामाजिक रिवाज की वजह से महिलाओं और दलित समुदायों के लोगों को धार्मिक स्थलों में प्रवेश से मना करने की प्रथा जारी है।’

दूसरी ओर भारत ने अमेरिका की इस रिपोर्ट को ख़ारिज किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि एक विदेशी संस्था द्वारा हमारे नागरिकों के संविधान संरक्षित अधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं है। रवीश कुमार ने एक बयान में कहा कि भारत को अपनी धर्म निरपेक्षता की विश्वसनीयता, सबसे बड़े लोकतंत्र तथा लंबे अर्से से चले आ रहे सहिष्णु एवं समावेशी समाज पर गर्व है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत का संविधान अल्पसंख्यकों सहित अपने सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, इस बात को हर कहीं मान्यता दी गई है कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहां संविधान धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार तथा लोकतांत्रिक शासन एवं देश का क़ानून मौलिक अधिकारों का संरक्षण एवं संवर्धन करता है। (RZ)