विश्लेषण | अमेरिका और ज़ायोनी शासन के हथियार संबंधों में बहुस्तरीय संकट
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पार्सटुडे – विभिन्न रिपोर्टों से पता चलता है कि विभिन्न कारणों से ज़ायोनी शासन को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में कई देरी हुई है।
(last modified 2026-09-23T10:07:11+00:00 )
Sep २२, २०२६ १९:३२ Asia/Kolkata
  • AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर
    AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर

पार्सटुडे – विभिन्न रिपोर्टों से पता चलता है कि विभिन्न कारणों से ज़ायोनी शासन को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में कई देरी हुई है।

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार जेरूसलम पोस्ट अखबार ने एक रिपोर्ट में घोषणा की कि ज़ायोनी शासन और अमेरिका के बीच AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद का अनुबंध रद्द नहीं किया गया है लेकिन इस शासन के वित्त मंत्रालय द्वारा 15 अरब शेकेल का भुगतान करने में देरी के कारण यह गंभीर स्थगन के खतरे में है। यदि यह प्रक्रिया जारी रही, तो इसराइल उत्पादन लाइन में अपना स्थान खो सकता है जिससे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति कई वर्षों तक विलंबित हो सकती है और खरीद की लागत बढ़ सकती है।

 

गोला-बारूद के क्षेत्र में सीनेट की विदेश संबंध समिति के सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन और प्रतिनिधि सभा की विदेश संबंध समिति के सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेट प्रतिनिधि ग्रेगोरी मिक्स ने अलग-अलग ज़ायोनी शासन को 2.8 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री पर अस्थायी रोक लगाई है जिसमें 40 हजार एक-टन बम शामिल हैं। साथ ही बोइंग कंपनी ने ज़ायोनी शासन को अधिकतम 5 हजार नए स्मार्ट बमों की आपूर्ति के लिए 289 मिलियन डॉलर का अनुबंध किया है लेकिन इन हथियारों की आपूर्ति अगले 36 महीनों तक शुरू होने वाली नहीं है।

 

लड़ाकू विमानों के क्षेत्र में भी व्हाइट हाउस द्वारा ज़ायोनी शासन को 50 F-15 लड़ाकू विमानों की बिक्री का सौदा स्थगित कर दिया गया है। इसराइल ने 2020 में 25 F-15EX खरीदने का अपना प्रारंभिक अनुरोध प्रस्तुत किया था लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण यह बिक्री रुक गई और अब इन विमानों की आपूर्ति 2031 से शुरू होने और 2035 तक जारी रहने की उम्मीद है।

 

संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना और वायुसेना ने भी ज़ायोनी शासन सहित अपने सहयोगियों को चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण गोला-बारूद की आपूर्ति में देरी पाँच साल तक जारी रह सकती है क्योंकि ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण अमेरिका के गोला-बारूद के भंडार में भारी कमी आई है।

 

2026 में ज़ायोनी शासन को अमेरिकी सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में देरी को केवल एक साधारण रसद या प्रशासनिक समस्या नहीं माना जा सकता। ये देरी वास्तव में ज़ायोनी शासन के आंतरिक कारकों, वाशिंगटन में राजनीतिक घटनाक्रमों, क्षेत्रीय युद्धों से उत्पन्न दबावों और दोनों पक्षों के रणनीतिक संबंधों की पुनर्परिभाषा के एक जटिल समूह का प्रतिबिंब है। जो चीज़ इस स्थिति को हथियार अनुबंधों में सामान्य देरी से अलग करती है, वह कई संकट कारकों का एक साथ होना है जिनमें से प्रत्येक अकेले आपूर्ति प्रक्रिया को धीमा कर सकता था।

 

ज़ायोनी शासन के आंतरिक स्तर पर, बजट संकट मुख्य बाधा बन गया है। ज़ायोनी शासन की सेना को पाँच मोर्चों पर लगभग तीन साल के निरंतर युद्ध के बाद लगभग 40 अरब शेकेल के बजट घाटे का सामना करना पड़ रहा है जो मुख्यतः चालू परिचालन खर्चों और रिजर्व बलों के सेवा दिवसों से संबंधित भुगतानों के कारण है। साथ ही ज़ायोनी शासन के वित्त मंत्रालय ने अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए प्रतिबद्ध 15 अरब शेकेल का भुगतान करने से इनकार कर दिया है और इस मुद्दे ने अनुबंध की समय-सीमाओं को एक के बाद एक चूकने का कारण बना दिया है।

 

युद्ध मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच विवाद न केवल विशिष्ट राशियों पर, बल्कि भविष्य के बहुवर्षीय बजट की संरचना पर भी है और यह प्रशासनिक गतिरोध हथियारों के वित्तपोषण में एक संरचनात्मक संकट बन गया है। वर्तमान अपाचे हेलीकॉप्टर बेड़े की जर्जरता और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति की समस्याओं ने इस संकट की तात्कालिकता को बढ़ा दिया है और ज़ायोनी शासन की सेना को दीर्घकालिक रूप से कम से कम 50 नए हमलावर हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है।

 

एक अन्य कारक ज़ायोनी शासन को हथियार भेजने के समर्थन के मामले में अमेरिका में गहरी दरार का उभरना है। अमेरिकी जनमत, विशेष रूप से डेमोक्रेट्स के बीच गाजा युद्ध में नागरिकों की उच्च हताहतों के कारण तीव्रता से बदल गया है। जुलाई में प्रतिनिधि सभा में ज़ायोनी शासन को सैन्य सहायता काटने पर मतदान 104 पक्ष में बनाम 314 विपक्ष में हुआ जिसने दिखाया कि भले ही बहुमत अभी भी सहायता का समर्थन करता है यह समर्थन अब स्वचालित और बिना शर्त नहीं है।

 

दो वरिष्ठ डेमोक्रेटिक विधायकों द्वारा इसराइल को अमेरिकी बमों की 2.8 अरब डॉलर की बिक्री पैकेज पर अस्थायी रोक लगाना दोनों पक्षों के संबंधों के इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम माना जाता है जिसका सीमित पूर्व इतिहास बाइडेन के कार्यकाल में भी रहा है। इन विधायकों की मुख्य चिंता यह है कि नेतन्याहू सरकार ने अमेरिकी हथियारों के कानूनी उपयोग के लिए पर्याप्त गारंटी प्रदान नहीं की है और गाजा तथा लेबनान में व्यापक बमबारी की निरंतरता ने इन आपूर्तियों की वैधता को संदेह में डाल दिया है।

 

तीसरा कारक अमेरिका के अपने सैन्य भंडारों का क्षरण है। ईरान के खिलाफ 40 दिवसीय युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की प्रमुख मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने सहयोगियों को चेतावनी दी है कि कुछ मिसाइल प्रणालियों और इंटरसेप्टरों की आपूर्ति में पाँच साल तक की देरी हो सकती है।

 

इसी संदर्भ में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल हमलों से ज़ायोनी शासन की रक्षा के लिए, केवल एक हमले में आधी थैड मिसाइलें एक-तिहाई बैलिस्टिक इंटरसेप्टर और एक साल का स्टैंडर्ड-3 मिसाइल उत्पादन खर्च कर दिया। इस स्थिति ने वाशिंगटन को अपने सैन्य निर्यात प्राथमिकताओं की समीक्षा करने के लिए मजबूर किया है और यहाँ तक कि यूरोपीय देशों को वादा किए गए कुछ शिपमेंट भी रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं।

 

इन सभी कारकों का योग दिखाता है कि उत्पन्न देरी एक अस्थायी घटना नहीं है, बल्कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन के सैन्य संबंध के पैटर्न में बदलाव का संकेत है। अल्पावधि में ये देरी ज़ायोनी शासन की सेना की परिचालन क्षमता को प्रभावित करेंगी, जर्जर अपाचे बेड़ा और गोला-बारूद तथा निर्देशित बमों की कमी ज़ायोनी शासन के बलों की तैयारी को प्रभावित कर सकती है विशेष रूप से ईरान के खिलाफ स्वतंत्र अभियान का निर्णय लेने की स्थिति में। इसराइली कमांडर चिंतित हैं कि निर्णय लेने में देरी अमेरिका को हथियारों के ऑर्डर खोने का कारण बनेगी और ज़ायोनी शासन को उच्च लागत और लंबे इंतजार का भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

 

दीर्घकालिक रूप से यह प्रक्रिया ज़ायोनी शासन को हथियार आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू सैन्य उद्योगों को मजबूत करने की ओर ले जा सकती है। ज़ायोनी शासन के कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रक्रिया की निरंतरता धीरे-धीरे अमेरिका की इस शासन के मुख्य और बिना शर्त हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में भूमिका को कमजोर कर सकती है और इसे अपनी सुरक्षा नीति की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर सकती है। mm