ईरान की हक़ मांग को अमरीका ने माना, परमाणु समझौते की सुगबुगाहट
अमरीकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लैंकिन ने एक इन्टरव्यू में इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने वार्ता की मेज़ पर प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु समझौते से दोबारा अमरीका के न निकलने की गैरेंटी की मांग की है।
ब्लैंकिन ने अपने इन्टरव्यू में इस बात को स्वीकार किया कि ईरान, अमरीका के परमाणु समझौते से निकलने से पहले तक परमाणु समझौते में वर्णित अपने सारे वचनों पर प्रतिबद्ध था और ट्रम्प प्रशासन ने भी यह स्वीकार किया है। उनका कहना था कि पूर्व सरकार तक ने यह कहा कि ईरान अपने वचनों पर अच्छी तरह से अमल कर रहा है जो चीज़ सबसे खेद की बात है वह यह है कि जब से हम परमाणु समझौते से बाहर हुए तब से ईरान ने इसको एक हथकंडे के रूप में प्रयोग करते हुए बहुत सी ख़तरनाक गतिविधियां शुरु कर दीं जिससे परमाणु समझौता रोकता था।
अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोग इस्राईल की हां में हां मिलाते हुए वर्षों से ईरान पर परमाणु गतिविधियों को सैन्य आयाम देने का आरोप लगाते रहे हैं और ईरान हमेशा से उनके दावों को रद्द करता रहा है और उसका यह मानना है कि तेहरान एनपीटी और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा का ज़िम्मेदार सदस्य है और उसे शांतिपूर्ण लक्ष्यों के लिए परमाणु तकनीक हासिल करने का पूरा हक़ है।
अमरीकी विदेशमंत्री ने भी देश के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के परमाणु समझौते से निकलने के फ़ैसले को अमरीका की विदेश नीति के हालिया इतिहास में सबसे बुरा फ़ैसला क़रार दिया है।
वास्तव में अमरीकी विदेशमंत्री का यह बयान और उनकी यह स्वीकृति इस बात का चिन्ह है कि बाइडन सरकार प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु समझौते से न निकलने की गैरेंटी के रूप में ईरान की हक़ मांग को स्वीकार करने और अपने वर्तमान दृष्टिकोण को बदलने पर विचार कर रही है। (AK)
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