ईरान से ताक़त की ज़बान न बोली जाएः राष्ट्रपति
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ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में प्रस्ताव पारित किया जाता है हालांकि हम ईश्वर की कृपा और अपने लोगों की मदद से अपने दृष्टिकोण से पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि ईरान के ख़िलाफ अब तक पारित प्रस्तावों में से एक भी उपयोगी और प्रभावी नहीं रहे हैं।  
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun १०, २०२२ ०७:१५ Asia/Kolkata
  • ईरान से ताक़त की ज़बान न बोली जाएः राष्ट्रपति

ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में प्रस्ताव पारित किया जाता है हालांकि हम ईश्वर की कृपा और अपने लोगों की मदद से अपने दृष्टिकोण से पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि ईरान के ख़िलाफ अब तक पारित प्रस्तावों में से एक भी उपयोगी और प्रभावी नहीं रहे हैं।  

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहिम रईसी ने चहार महाल बख्तियारी प्रांत में लोगों की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के ख़िलाफ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी "आईएईए" के पारित प्रस्ताव के बावजूद, हम अपने दृष्टिकोण पर बाक़ी रहेंगे।

राष्ट्रपति सैयद रईसी ने कहा कि ईरान की वैज्ञानिक प्रगति को विफल बनाने के लिए अमरीका और इस्राईल, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का उपयोग कर रहे हैं, हमने आईएईए के साथ पूरा सहयोग किया, लेकिन IAEA ने अमरीका और इस्राईल की खुशी के लिए ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके माध्यम से वे अपने नाजायज़ लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे और ईरान अपने दृष्टिकोण से एक क़दम भी पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने कहा ईरान ने अपने एक जहाज़ के बदले दो ग्रीक के दो जहाज़ों पर नियंत्रण कर लिया है जिससे साबित होता है कि मारने और भागने का समय बीत चुका है। हम दुश्मन का आखिरी तक पीछा करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि यूनानियों ने अब कहा है कि वे ईरानी तेल टैंकर को वापस कर देंगे। उन्होंने कहा कि हम हर क़ीमत पर ईरानी लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और हम दुश्मनों की नापाक साज़िशों को नाकाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पश्चिमी देशों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अपने राजनीतिक प्रभाव के कारण आपने कई प्रस्ताव पारित किए हैं, लेकिन क्या वे प्रभावी रहे हैं?" फ़िलिस्तीन के मामले में, कैंप डेविड समझौते पर, शरमुश्शैख़ और ओस्लो, कुछ स्वयंभू अरब लालच में एक मेज़ पर बैठ गए, लेकिन क्या उन्हें कुछ मिला? आज भी संघर्ष की बागडोर फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं के हाथ में है। (AK)

 

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