दुश्मन की सारी योजनाएं धरी रह गईंं- वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि ईरान के बारे में शत्रु की व्यापक योजनाएं विफल हो गईं।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर गुरूवार को तेहरान में अहलेबैत के शायरों और ख़तीबों या वक्ताओं से भेंट की।
उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के प्रति स्नेह और श्रद्धा, व्यक्तिगत एवं सामाजिक क्षेत्र में बहुत प्रभावी है। आपने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके पवित्र परिजनों की "मद्दाही" या प्रशंसा और उनका सम्मान, शियों की धरोहर है। उन्होंने कहा कि यह एसी कला है जो अच्छी आवाज़, अच्छी कविता, पढ़ने के उपयुक्त अंदाज़ और अच्छे लेख से मिलकर बनती है।
इस भेंट में वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश के विरुद्ध दुश्मनों के व्यापक षडयंत्र इसलिए विफल हो गए क्योंकि उनके समीकरण ग़लत थे। उन्होंने कहा कि देश में विघ्न डालने और अशांति फैलाने के लिए शत्रु ने सारे ही हथकण्डे अपनाए थे। वरिष्ठ नेता ने कहा कि शत्रु ने इसके लिए महीनों पहले से जासूसों की टीम, ईरानोफ़ोबिया का शोर,जातीय-धार्मिक-राजनीतिक और व्यक्तिगत भावनाओं को उभराने तथा व्यापक स्तर पर दुष्प्रचार जैसे हथकण्डों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था।
उन्होंने कहा कि एक समीक्षक के रूप में मैने शत्रु की अच्छी योजनाबंदी के लिए दिल में उन्हें शाबाश कहा क्योंकि उन्होंने बहुत ही हिसाब-किताब से चीज़ों को उनके स्थान पर रखा था लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद वे अपनी मनोकामना हासिल करने में विफल रहे क्योंकि उनके सारे ही समीकरण ग़लत सिद्ध हुए।
सर्वोच्च नेता ने आगे कहा कि वे यह सोच रहे थे कि आर्थिक समस्याओं के कारण ईरानी राष्ट्र, उनकी विध्वंसक कार्यवाहियों में उनके साथ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वे यह भी समझ रहे थे कि अशलीलता, अपमान और बुरा-भला कहकर वे देश के अधिकारियों को निष्क्रिय बनाते हुए उनको मैदान से बाहर कर देंगे। उनका यह भी सोचना था कि ख़ूब शोर-शराबा मचाकर देश के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वे वैचारिक मतभेद पैदा कर देंगे। वे यह भी सोच रहे थे कि अमरीका की ग़ुलामी करने वाले देश के पेट्रोडाॅलरों से इस्लामी गणतंत्र ईरान की इच्छाशक्ति को प्रभावित कर ले जाएंगे।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि पिछले चालीस वर्षों से इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध हर प्रकार के हथकण्डों का प्रयोग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे इसलिए पराजित होते हैं क्योंकि उनके समीकरण हमेशा ग़लत होते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अबतक पराजय का मुंह देखा है और आगे भी देखते रहेंगे।
वरिष्ठ नेता ने नसीहत करते हुए कहा कि शत्रु के ग़लत समीकरण हमारी लापरवाही का कारण न बनने पाएं। इस बारे में हमें सचेत रहने की ज़रूरत है। एसा न हो कि हम लापरवाह हो जाएं और यह सोचें कि बात ख़त्म हो गई है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना था कि हमें मैदान में बने रहना चाहिए। हमको यह समझना चाहिए कि राष्ट्र की सुरक्षा का मुख्य कारक, राष्ट्रीय एकता है।
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