ईरान और चीन के मध्य सहयोग बढ़ने की वजह क्या है?
दोस्तो जैसाकि आपको ज्ञात है कि ईरान के राष्ट्रपति सय्यद मोहम्मद इब्राहीम रईसी आजकल चीन की यात्रा पर हैं।
राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी अपने चीनी समकक्ष शी जिन पिंग के आधिकारिक निमंत्रण पर एक राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन की यात्रा पर गये हैं और उनकी चीन यात्रा का एक उद्देश्य दोनों देशों के मध्य होने वाले 25 वर्षीय समझौते के बारे में विचार- विमर्श और वार्ता करना है।
ईरान और चीन ने पिछले वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक और प्रतिरक्षा के क्षेत्र में अपने संबंधों को विस्तृत किया है और मार्च 2021 में दोनों देशों ने जो 25 वर्षीय समझौता किया है उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
चीन विश्व की उभरती आर्थिक शक्ति है और ईरान की विदेश नीति में उसका विशेष स्थान है। उसकी एक वजह यह है कि प्रतिबंधों के कड़े दौर में भी चीन ईरान का व्यापारिक भागीदार बाकी रहा और दोनों देशों के संबंधों में अधिक विस्तार के लिए अपार संभावनायें मौजूद हैं। जारी वर्ष के पिछले दस महीने के दौरान चीन और ईरान के बीच 25.3 अरब डालर मूल्य की वस्तुओं का व्यापारिक आदान- प्रदान हुआ।
ईरान की विदेश नीति बहुआयामी है, पूरब की ओर वह ध्यान दे रहा है, शंघाई संगठन में ईरान की सदस्यता, दूसरे एशियाई देशों के साथ ईरान की सहकारिता व सहयोग आदि वे कारण हैं जिनकी वजह से ईरान और चीन के बीच सहकारिता बढ़ रही है।
चीन ने पिछले वर्ष लगभग 20 करोड़ डालर का सीधे ईरान में निवेश किया। इस दृष्टि से रूस, संयुक्त अरब इमारात और तुर्किये के बाद चीन ने ईरान में निवेश किया है। यह एसी स्थिति में है जब ईरान और चीन ने तेल, गैस, वित्तीय और बैंकिन्ग लेनदेन और ट्रांज़िट आदि के क्षेत्र में समझौतों पर हस्ताक्षर कर रखे हैं और आशा है कि राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी की उनके चीनी समकक्ष शी जिन पिंग की मुलाकात के दौरान इन समझौतों को अंतिम रूप दे दिया जायेगा।
ईरान दुनिया के गिने चुने देशों में से एक है जो तेल और गैस सहित दूसरी प्राकृतिक अनुकंपाओं से समृद्ध है और ईरान वह देश है जो चीन की बहुत सी ज़रूरतों व आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है। ईरान के राष्ट्रपति सय्यद मोहम्मद इब्राहीम रईसी की चीन यात्रा के दृष्टिगत बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि इस यात्रा से जहां दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे वहीं प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।
अमेरिका और कुछ पश्चिमी देश यह दुष्प्रचार करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान अलग- थलग पड़ गया है परंतु ईरान के राष्ट्रपति की चीन और रूस जैसे देशों की यात्रा से सिद्ध हो जाता है कि ईरान न केवल अलग- थलग नहीं पड़ा है बल्कि दिन प्रतिदिन दूसरे देशों से उसके संबंध और प्रगाढ़ हो रहे हैं और राष्ट्रपति की चीन यात्रा को इसी दिशा में देखा जा सकता है। MM
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