ईरान और बेलारूस के बीच सहयोग में वृद्धि
बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको आधिकारिक यात्रा पर तेहरान पहुंचे हैं। सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने उनका स्वागत किया।
ईरान के साथ व्यापक सहयोग और आर्थिक और व्यापारिक संबंधों का विकास, बेलारूस के राष्ट्रपति की तेहरान यात्रा के मुख्य एजेंडे में शामिल है। इस यात्रा पर बेलारूस के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंचा है।
इससे पहले, समरक़ंद में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के अवसर पर ईरान और बेलारूस के राष्ट्रपतियों ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने का मिशन सौंपा था। अब तक दोनों देशों के बीच पारगमन, व्यापार, ऊर्जा, उद्योग, ज्ञान और सूचना के आदान-प्रदान को लेकर सहमति बन चुकी है। अब दोनों देशों के अधिकारियों के एजेंडे में 2023 से 2026 तक के लिए परस्पर आर्थिक विकास का रोडमैप तैयार करना है। भले ही बेलारूस, ईरान का पड़ोसी नहीं है, लेकिन यह ईरान की तरह पश्चिमी प्रतिबंधों से पीड़ित है। इसके अलावा, यह यूरेशिया क्षेत्र में स्थित है और रूस के साथ इसकी घनिष्ठ साझेदारी है, इसलिए इसे उन देशों में से एक माना जाता है, जो ईरान के लिए राजनीतिक और आर्थिक सहोयग का हिस्सा हो सकते हैं।
वर्तमान में, ईरान और बेलारूस के बीच राजनीतिक संबंध स्थिर और घनिष्ठ हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध, राजनीतिक संबंधों की तरह विस्तारित नहीं हुए हैं। हालांकि दोनों ही देश सामान्य क्षमताओं का उपयोग करके यूरेशियन क्षेत्र में एक दूसरे के साथ बड़े पैमाने पर सहयोग कर सकते हैं। यह उम्मीद की जाती है कि ईरान के यूरेशियन आर्थिक संघ में पूर्ण प्रवेश के साथ, ईरान और बेलारूस के बीच आयात-निर्यात शुल्क 80 फ़ीसद तक कम हो जाएगा, जिसका द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
ईरान में बेलारूस के राजदूत दिमित्री कलत्सोव का कहना है कि वस्तुओं के आयात-निर्यात के लिए उनका देश इस्लामी गणतंत्र ईरान की बंदरगाहों और रेलवे की क्षमता का उपयोग कर सकता है। ईरान भी कृषि, कृषि उपकरणों और मशीनरी के क्षेत्रों में बेलारूस की क्षमताओं से लाभ उठा सकता है।
स्पष्ट है कि ईरान और बेलारूस के अधिकारी राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के विकास पर ज़ोर दे रहे हैं, इसके आधार पर यह उम्मीद की जा सकती है कि लुकाशेंको की तेहरान यात्रा के दौरान आपसी समझ को आगे बढ़ाने और संसाधनों की समीक्षा के अलावा, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों समेत क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होना।