ब्रिक्स की बढ़ती ताक़त और ईरान की सक्रिय कूटनीति पर एक नज़र
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपनी सफल कूटनीति का प्रदर्शन किया और कई देशों के अधिकारियों और प्रमुखों से मुलाक़ात की।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सऊदी अरब के विदेशमंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान से मुलाक़ात में आपसी रुचि के द्विपक्षीय मुद्दों और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा की। उधर विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने भी कई देशों के विदेशमंत्रियों से भेंटवार्ताएं की।
आखिरकार ब्रिक्स के सदस्य देशों ने इस्लामी गणतंत्र ईरान की "ब्रिक्स" ग्रुप में स्थायी सदस्यता पर मोहर लगा दी। ब्रिक्स नेताओं के बयान में घोषणा की गई कि ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, मिस्र, अर्जेंटीना और इथियोपिया के ग्रुप में शामिल होने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और इन देशों की पूर्ण सदस्यता जनवरी 2024 में शुरू होगी।
वर्तमान समय में ब्रिक्स में 5 देश शामिल हैं जिनमें रूस, चीन, ब्राज़ील, भारत और दक्षिण अफ्रीका का नाम लिया जा सकता है। अल्जीरिया, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, बहरैन, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, मिस्र, इथियोपिया, होंडुरास, इंडोनेशिया, ईरान, क़ज़ाक़िस्तान, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया, फ़िलिस्तीन, सऊदी अरब, सेनेगल, थाईलैंड, संयुक्त अरब इमारात, वेनेज़ुएला और वियतनाम देश हैं जिन्होंने आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा जताई है।
ब्रिक्स ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिणी अफ्रीका सहित दुनिया की सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को एक प्लेटफ़ार्म पर लाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में अपने भाषण में कहा कि ब्रिक्स को भविष्य के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिक्स के विस्तार का पूरा समर्थन करता है, हम इस पर आम सहमति के साथ आगे बढ़ने का स्वागत करते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ब्रिक्स ग्रुप में इस बात पर सहमति बनी है कि अमरीका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत है, लेकिन साथ मिलकर कैसे काम किया जाए, अभी इस पर पूरी तरह से सहमति नज़र नहीं आती है।
इस ग्रुप के दो महत्वपूर्ण सदस्यों भारत और चीन के बीच मई 2020 से सीमा पर गतिरोध जारी है जबकि भारत, दक्षिण अफ्रीक़ा और ब्राज़ील पश्चिम के साथ उतने ही मधुर संबंध चाहते हैं, जितना वे चीन और रूस के साथ चाहते हैं।
इसलिए यहां यह सवाल उठता है कि क्या ब्रिक्स अमरीका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के एक वैकल्पिक आर्थिक और भूराजनीतिक शक्ति के रूप में उभरेगा? या क्या उनके आंतरिक मतभेद समूह की उपलब्धियों को सीमित कर सकते हैं? 2009 में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन ने ब्रिक्स का गठन किया था। एक साल बाद दक्षिण अफ्रीक़ा भी इसमें शामिल हो गया था। ब्रिक्स में शामिल होने वाला वह एकमात्र अतिरिक्त सदस्य है। दक्षिण अफ्रीक़ा ने 2018 में इस संगठन में विस्तार का प्रस्ताव रखा था, पिछले साल गंभीरता से उसके इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई।
ब्रिक्स को किसी समय दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक संगठन के तौर पर देखा जाता है था। इसकी स्थापना का मकसद शांति, सुरक्षा, विकास और सहयोग को बढ़ावा देना है।
यह संगठन दुनिया की 43 फीसदी आबादी, 26 फीसदी क्षेत्रफल और करीब 30 फीसदी वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। (AK)
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