सऊदी हमलों के पश्चिमी समर्थन से जनसंहार बढ़ेगाः अहमद ख़ातमी
आयतुल्लाह अहमद ख़ातमी ने कहा है कि यमन पर सऊदी अरब के हमलों का पश्चिम की ओर से समर्थन से यमन में जनसंहार में वृद्धि होगी।
आयतुल्लाह अहमद ख़ातमी ने तेहरान में जुमे की नमाज़ में अपने ख़ुत्बे में सनआ पर सऊदी अरब द्वारा किये गए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।
उन्होंने कहा कि इस पाश्विक हमलें में सैकड़ों लोगों की हत्याएं, सऊदी अरब के युद्ध अपराधी होने को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के विरुद्ध युद्ध अपराधी के रूप में मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए।
आयतुल्लाह अहमद ख़ातमी ने कहा कि अमरीका और ब्रिटेन दोनों के यह दावे सफेद झूठ हैं कि यमन पर सऊदी अरब के हमलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि सनआ पर सऊदी अरब के पाश्विक आक्रमण से पहले ब्रिटेन और सऊदी अरब ने कई अरब के रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किये थे।
उन्होंने बल देकर कहा कि इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि यमन तथा क्षेत्र के कुछ अन्य संकटग्रस्त देशों में सऊदी अरब के क्रियाकलापों को पश्चिम का समर्थन प्राप्त है।
आयतुल्लाह ख़ातमी ने यमन और सीरिया में किये जाने वाले जनसंहार पर विश्व समुदाय की चुप्पी कीआलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ओर तो संयुक्त राष्ट्रसंघ मौखिक रूप में सऊदी अरब के अत्याचारों की निंदा करता है जबकि दूसरी ओर यही अन्तर्राष्ट्रीय संस्था, सऊदी अरब के नाम को युद्ध अपराध करने वाले देशों की सूचि से निकाल देती है। उन्होंने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि राष्ट्रसंघ जैसी संस्था, किस सीमा तक अन्तर्राष्ट्रीय वर्चस्ववाद से प्रभावित है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में यदि विश्व में न्याय और क़ानून के आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय होता तो निःसन्देह, यमन की जनता का दमन और जनसंहार करने वालों को कड़ी सज़ा दी जाती।
आयतुल्लाह अहमद ख़ातमी ने इस साल अज़ादारी के जुलूसों में इराक़, नाइजीरिया तथा अफ़ग़ानिस्तान में किये जाने वाले हमलों पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि शत्रुओं को जान लेना चाहिए कि हर प्रकार के विरोध के बावजूद हुसैनी आन्दोलन अपने मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।