जेसीपीओए के अमरीका के निकलने पर ज़रीफ़ की चेतावनी
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के हालिया बयान से पता चलता है कि यूरोपीय देशों तथा कुछ अमरीकी अधिकारियों द्वारा जेसीपीओए के व्यापक समर्थन के बावजूद वह इस बात की पुष्टि करने को तैयार ही नहीं हैं कि ईरान जेसीपीओए पर अमल कर रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ३०, २०१७ १३:०३ Asia/Kolkata

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के हालिया बयान से पता चलता है कि यूरोपीय देशों तथा कुछ अमरीकी अधिकारियों द्वारा जेसीपीओए के व्यापक समर्थन के बावजूद वह इस बात की पुष्टि करने को तैयार ही नहीं हैं कि ईरान जेसीपीओए पर अमल कर रहा है।

यही कारण है कि ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने गार्डियन और फ़ाइनेन्शल टाइम्स से बात करते हुए डोनल्ड ट्रम्प के प्रशासन के उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संभावना पाई जाती है कि डोनल्ड ट्रम्प प्रशासन अक्तूबर के महीने में अपनी आने वाली रिपोर्ट में एक बार फिर इस बात का दावा करे कि ईरान परमाणु समझौते के बारे में अपने वादों पर अमल नहीं कर रहा है। 

ईरान के विदेशमंत्री ने यूरोप से मांग की है कि यदि ट्रम्प प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु समझौते को ख़राब करना चाहे तो यूरोपीय देश अमरीका की अनेदखी करें। श्री ज़रीफ़ ने कहा कि यदि यूरोप इस बारे में वाशिग्टन का अनुसरण करता है और परमाणु समझौता बर्बाद हो जाता है तो ईरान अतीत से आधुनिक परमाणु तकनीक के साथ सामने आएगा। 

यदि ट्रम्प कांग्रेस के लिए विदेशमंत्रालय की तीसरी रिपोर्ट में जो 15 अक्तूबर 2017 को सामने आने वाली है, इस बात की पुष्टि नहीं करते कि ईरान जेसीपीओए पर अमल कर रहा है तो कांग्रेस के पास साठ दिनों का समय होगा कि वह परमाणु समझौते के आधार पर ईरान से हटने वाले प्रतिबंधों को दोबारा ईरान पर लगा सकता है। जैसा कि विदेशमंत्री ने कहा कि यदि इस कार्यवाही को व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया गया तो ईरान भी जेसीपीओए में वर्णित अपने वचनों पर प्रतिबद्ध नहीं रहेगा।

ट्रम्प द्वारा जेसीपीओए को बर्बाद करने के स्थिति में ईरान के पास उसकी जवाबी कार्यवाही के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें सबसे पहला काम तो ईरान यह करेगा कि वह जेसीपीओए से पहले वाले शांति पूर्ण परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरु कर देगा। परमाणु क्षेत्र में शोध और विकास ने ईरान को नई तकनीक तक पहुंचा दिया है और ईरान के पास इतना समय है कि वह ट्रम्प प्रशासन द्वारा परमाणु समझौते को ख़राब करने की स्थिति में अपनी पहली वाली स्थिति में पलट आए। (AK