ट्रम्प के हंगामे से जेसीपीओए में कोई बदलाव नहीं आएगा
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राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी ने एक पत्रकार सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों के बारे में इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीतियों का उल्लेख किया और परमाणु समझौते के बारे में कहा कि इस समझौते से न एक लाइन कम होगी न इसमें एक लाइन बढ़ाई जाएगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०७, २०१८ १३:०१ Asia/Kolkata

राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी ने एक पत्रकार सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों के बारे में इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीतियों का उल्लेख किया और परमाणु समझौते के बारे में कहा कि इस समझौते से न एक लाइन कम होगी न इसमें एक लाइन बढ़ाई जाएगी।

उन्होंने इस प्रश्न के उत्तर में कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का कहना है कि अगर जेसीपीओए में बदलाव नहीं किया गया तो ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु प्रतिबंध बहाल कर दिए जाएंगे और अमरीका इस समझौते से निकल जाएगा, इस स्थिति में ईरान का फ़ैसला क्या होगा? कहा कि ईरान परमाणु समझौते के उल्लंघन में पहल नहीं करेगा और इस समझौते में एक लाइन भी घटाई या बढ़ाई नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक जेसीपीओए के अंतर्गत ईरान के हितों की पूर्ति होती रहेगी तब तक वह इस समझौते में बना रहेगा और जेसीपीओए में बने रहने या उससे निकलने के अमरीका के फ़ैसले से ईरान के फ़ैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प की पूरी कोशिश यह है कि हंगामा मचा कर और बयान बाज़ी करके ईरान को अपनी क्षेत्रीय नीतियों को बदलने पर विवश कर दें लेकिन उनका यह हथकंडा सफल नहीं हो सकता और वर्तमान स्थिति को पीछे नहीं लौटाया जा सकता। ईरान, क्षेत्र की बड़ी शक्ति है और क्षेत्रीय समीकरणों में उसकी प्रभावी भूमिका है। परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प का हो हल्ला और ईरान की मीज़ाइल क्षमता को ख़तरा दर्शाने की उनकी कोशिशें, उन्हें और उनके सऊदी व ज़ायोनी समर्थकों को उनके लक्ष्यों तक नहीं पहुंचा सकतीं। क्षेत्र में इस्लामी गणतंत्र ईरान की पोज़ीशन एेसी नहीं है जो ज़ायोनी लाॅबी और ट्रम्प की बयान बाज़ी से प्रभावित हो जाए। ईरान की क्षेत्रीय शक्ति, जनता के समर्थन और स्वाधीनता पर आधारित है और इस प्रकार की शक्ति क्षेत्रीय मंच पर भी प्रभावी है।

 

ईरान की मीज़ाइल क्षमता के बहाने परमाणु समझौते पर पुनर्विचार के संबंध में अमरीका और उसकी पिछलग्गू कुछ पश्चिमी सरकारों की बहानेबाज़ी से कोई लाभ होने वाला नहीं है। ईरान की मीज़ाइल क्षमता और पारंपरिक प्रतिरक्षा क्षमता पर किसी भी तरह की कोई बात नहीं की जा सकती और तेहरान ट्रम्प व उनके समर्थकों के राजनैतिक खेल में फंसने वाला नहीं है। (HN)