दाइश, पश्चिमी एशिया और उससे इतर अब भी एक सच्चाई हैः ज़रीफ़
विदेश मंत्री ने चरमपंथ और दाइश से मुक़ाबले के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और वार्ता को आवश्यक बताया है।
मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार को "दाइश के बाद के संसार में क्षेत्रीय व्यवस्था के स्वरूप" नामक काॅन्फ़्रेंस में भाषण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दाइश से संघर्ष में ईरान की भूमिका के बारे में कहा कि ईरान ने विश्व शांति के लिए ख़तरा बन चुके दाइश के साथ संघर्ष में क्षेत्र में परामर्शी मदद के माध्यम से अत्यंत अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि चरमपंथ और दाइश का ख़तरा अब भी क्षेत्र और संसार को धमका रहा है और सांस्कृतिक क्षेत्र में इस ख़तरे से मुक़ाबले के लिए दीर्घकालीन कार्यक्रम क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग व बात चीत की ज़रूरत है।
विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, जो क्षेत्र में दाइश और चरमपंथ से मुक़ाबले के अग्रणी देशों में से एक है, अगले चरण में भी फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में वार्ता व सहयोग के प्रसार में प्रभावी व लाभदायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस कान्फ़्रेंस में विदेशी हस्तक्षेप को पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में अशांति और दाइशी विचारों के बाक़ी रहने का मुख्य कारण बताया और कहा कि दाइश की सोच और इस आतंकी गुट के सदस्य, क्षेत्र और संसार के लिए एक बड़े ख़तरे के रूप में अफ़ग़ानिस्तान समेत पूरे क्षेत्र और संसार में फैलते जा रहे हैं। (HN)