मानवाधिकार की स्थिति के बारे में रिपोर्ट मूल्यहीन हैः तेहरान
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में रिपोर्ट को मूल्यहीन बताया है।
बहराम क़ासेमी ने ईरान में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में राष्ट्रसंघ के महासचिव की रिपोर्ट की प्रतिक्रिया में कहा कि यह रिपोर्ट असंतुलित, इसमें बहुत त्रुटियां और इस्लामी गणतंत्र ईरान की दृष्टि से यह रिपोर्ट महत्वहीन और मूल्यहीन है।
बहराम कासेमी ने कहा कि यह रिपोर्ट अविश्वसीय स्रोतों से तैयार की गयी है, सही नहीं है और इसका कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान का मानना है कि देशों में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में दोहरा मापदंड विश्व समुदाय के निकट राष्ट्रसंघ के अधिक अविश्वसनीय होने का कारण बनेगा।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम कासेमी ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान का दृढ़ इरादा इस्लामी सिद्धांतों और ईरानी संविधान के आधार पर नागरिकों के अधिकारों को अधिक से अधिक बेहतर बनाना है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव ने एन्टोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी नीतियों के परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा परिषद में ईरान में मानवाधिकार की स्थिति में एक रिपोर्ट पेश की थी और राष्ट्रसंघ के महासचिव ने "उनके अनुसार" ईरान में मानवाधिकारों के हनन पर चिंता जताई थी।
ज्ञानकार हल्कों का मानना है कि स्वतंत्र व स्वाधीन देशों पर दबाव डालने के लिए मानवाधिकार का विषय वर्चस्वादी देशों विशेषकर अमेरिकी हथकंडा बन गया है जबकि जो देश वास्तव में मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं और यदि वे अमेरिका के घटक हैं तो कोई बात नहीं।
यही नहीं इस प्रकार के देशों को संयुक्त राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार परिषद का सदस्य भी बनाया जाता है।
सऊदी अरब यमन में खुल्लम खुल्ला मानवाधिकारों का हनन कर रहा है, यमनी जनता का जनसंहार कर रहा है, उसके पाश्विक हमलों में 13 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं, इस देश की आधार भूत संरचनाएं व सेवाएं तबाह हो चुकी हैं।
यही नहीं सऊदी अरब ने यमन का हवाई, जमीनी और समुद्री परिष्टन कर रखा है और यमनी जनता तक दवा और खाद्य पदार्थ नहीं पहुंच रहा है। ये सब मानवाधिकार उल्लंघन के खुले नमूने हैं परंतु बड़ी शक्तियां कभी भी सऊदी अरब को मानवाधिकर का हननकर्ता नहीं बतातीं हैं। MM