प्रतिरोध और इंतेफ़ाज़ा, इस्राईल के अतिग्रहण के ख़िलाफ़ प्रभावी तरीक़ा
ईरान के संसद सभापति और इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देशों के संसदीय संघ के प्रमुख डाॅक्टर अली लारीजानी ने धरती दिवस के अवसर पर फ़िलिस्तीनी जनता के ख़िलाफ़ अवैध ज़ायोनी शासन की आपराधिक और अमानवीय कार्यवाही की कड़ी निंदा की है।
अत्याचारग्रस्त फ़िलिस्तीनी जनता के सच्चे समर्थक के रूप में इस्लामी गणतंत्र ईरान ने हमेशा उसके अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई है और हर प्लेटफ़ाॅर्म पर ज़ायोनी शासन के अपराधों को उजागर करने की कोशिश की है। फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के अपराधों का नया सिलसिला सऊदी अरब समेत कुछ अरब व इस्लामी देशों की नीतियों और अमरीका की हरी झंडी से शुरू हुआ है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने बैतुल मुक़द्दस को अवैध ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देने की घोषणा करके इस शासन के दुस्साहस को व्यवहारिक रूप से बढ़ा दिया है। इसी तरह सऊदी प्रशासन ने भी इस्राईल से सांठ-गांठ की नीति अपना कर यह दिखा दिया है कि फ़िलिस्तीन और फ़िलिस्तीनियों का समर्थन अब सऊदी अरब की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने अपनी अमरीका यात्रा में ज़ायोनी नेताओं से मुलाक़ात करके सऊदी अरब की इसी नीति की पुष्टि की है।
इस बीच ग़ज़्ज़ा पट्टी की सीमा पर "वापसी का अधिकार" के नाम से निकाली गई विशाल रैली ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में सबसे अच्छा साधन प्रतिरोध है और फ़िलिस्तीनी जनता के इन्तेफ़ाज़ा आंदोलन की क्षमताएं ज़ायोनियों और उनके समर्थकों के लिए पाठ साबित होंगी। इसी परिप्रेक्ष्य में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार डाॅक्टर अलीे अकबर विलायती ने कहा कि हालांकि अमरीका व कुछ यूरोपीय सरकारें क्षेत्र के संबंध में निंदनीय षड्यंत्र तैयार करके और अपने क्षेत्रीय समर्थकों की मदद से छद्म युद्ध छेड़ कर, ज़ायोनी शासन से इस्लामी जगत के संघर्ष को मुसलमानों के ख़िलाफ़ मुसलमानों के युद्ध में बदलने की कोशिश कर रही हैं लेकिन निश्चित रूप से ग़ैर क़ाूनी ढंग से छीनी गई अपनी धरती को वापस लेने के संबंध में फ़िलिस्तीन की अत्याचारग्रस्त और निहत्थी जनता का प्रतिरोध सफल हो कर रहेगा। (HN)