परमाणु समझौते में ईरान के हित पूरे होने चाहिएः रूहानी
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने गुरुवार की जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल से टेलीफ़ोनी वार्ता में बल दिया कि परमाणु समझौते में ईरान के हित पूर्ण रूप से पूरे होने चाहिए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ११, २०१८ ०७:०७ Asia/Kolkata
  • परमाणु समझौते में ईरान के हित पूरे होने चाहिएः रूहानी

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने गुरुवार की जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल से टेलीफ़ोनी वार्ता में बल दिया कि परमाणु समझौते में ईरान के हित पूर्ण रूप से पूरे होने चाहिए।

राष्ट्रपति रूहानी ने इस वार्ता में यूरोपीय देशों विशेषकर जर्मनी, फ़्रांस और ब्रिटेन से कहा है कि सीमित समय में वे इस बात की घोषणा करें कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद किस प्रकार से परमाणु समझौते में ईरान के हित पूरे होंगे।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल की बिक्री, बैंकिंग संबंध जैसे जेसीपीओए से संबंधित समस्त मामलों और विषयों में ईरान के हित पूरी तरह से पूरे होने चाहिए। 

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने इस टेलीफ़ोनी वार्ता में बल दिया कि इन विषयों की कुछ सप्ताह के भीतर, ईरान और यूरोपीय संघ के विशेषज्ञों और विदेशमंत्रियों की बैठकों में समीक्षा की जानी चाहिए और इसपर अंतिम फ़ैसला किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति रूहानी ने एकपक्षीय रूप से अमरीका के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु समझौते से निकलने को कूटनयिक रीतिरिवाज के विरुद्ध बताया और कहा कि यदि तय यह हो कि वह समझौता जिसकी सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव पुष्टि करता हो इस प्रकार तोड़ा जाए तो इसके अंतर्राष्ट्रीय पर बहुत ही ख़तरनाक परिणाम सामने आएंगे। 

डाक्टर हसन रूहानी ने इसी प्रकार क्षेत्रीय मामलों में ईरान और जर्मनी के सहयोग की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो और वह क्षेत्र में नया तनाव कभी भी सहन नहीं करेगा।

जर्मन चांसलर एंगेेला मर्केल ने इस टेलीफ़ोनी वार्ता में परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने पर खेद प्रकट करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ यथावत परमाणु समझौते पर प्रतिबद्ध रहेगा। 

उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते की रक्षा और उस पर प्रतिबद्ध रहना यूरोप के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसी प्रकार क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान और जर्मनी के बीच वार्ता के चैनल को और अधिक मज़बूत करने की मांग की है। 

अमरीका एकपक्षीय रूप से ईरान के परमाणु समझौते से बाहर निकल गया है, लेकिन यूरोपीय देशों ने इस समझौते में बने रहने की बात कही है।

विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का यह फ़ैसला, वाशिंगटन को उसके यूरोपीय घटक देशों से अलग कर देगा और इसके बाद विश्व में परमाणु हथियारों का व्यापक प्रसार हो सकता है।

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कि जिनके शासनकाल में यह समझौता हुआ था कहा है कि ईरान ने इस समझौता का कोई उल्लंघन नहीं किया है, ऐसी स्थिति में इससे बाहर निकलने का फ़ैसला एक बड़ी ग़लती है। (AK)