क्षेत्र में अमरीका हार चुका हैः वरिष्ठ नेता
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आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति की यह स्वीकारोक्ति कि सात ट्रिलियन डाॅलर ख़र्च करने के बावजूद उसे अपने लक्ष्य हासिल नहीं हुए, उनकी खुली पराजय की परिचायक है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jun १५, २०१८ १३:१९ Asia/Kolkata
  • क्षेत्र में अमरीका हार चुका हैः वरिष्ठ नेता

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति की यह स्वीकारोक्ति कि सात ट्रिलियन डाॅलर ख़र्च करने के बावजूद उसे अपने लक्ष्य हासिल नहीं हुए, उनकी खुली पराजय की परिचायक है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को तेहरान में ईद की नमाज़ के ख़ुत्बे में समस्त मुसलमानों को ईद की बधाई दी।  उन्होंने कहा कि पवित्र रमज़ान, ईश्वर से निकटता प्राप्त करने के उद्देश्य से मोमिनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्घा का ज़ामना है और ईदे फ़ित्र, उसी का पुरस्कार प्राप्त करने का दिन है।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरानी राष्ट्र प्रतिवर्ष इस आध्यात्मिक प्रतिसपर्घा में भाग लेकर नेक काम करते हुए पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उपलब्धियां अर्जित करता है।

उन्होंने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति की स्वीकारोक्ति इस बात को सिद्ध करती है कि अरबों डाॅलर ख़र्च करके भी बड़े शैतान को पश्चिमी एशिया में कोई सफलता नहीं मिली।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि इतना अधिक धन ख़र्च करके भी जब अमरीका अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सका तो आगे भी इस क्षेत्र में बेहिसाब पैसे ख़र्च करने के बावजूद उसे अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध शैतानी शक्तियों के षडयंत्रों का मूल कारण यह है कि वे ईरानी राष्ट्र के कड़े प्रतिरोध, स्वावलंबन और उच्च विचारों से चिंतित हैं।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह शैतानी शक्तियां षडयंत्र रचती रहती हैं किंतु हर बार विफलता ही उनके हाथ लगती है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि ईरानी राष्ट्र को पूरी होशियारी के साथ षडयंत्रों को समझना चाहिए।  उन्होंने कहा कि इस समय शत्रु का मुख्य षडयंत्र यह है कि अत्यधिक आर्थिक दबाव डालकर ईरानी जनता को निराश किया जाए।

वरिष्ठ नेता ने विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर ईरान में व्यापक स्तर पर निकाली जाने वाली रैलियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि विश्व क़ुद्स दिवस के बारे में विभिन्न देशों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि विदेशियों के दुष्प्रचारों के बावजूद ईरानी राष्ट्र के साथ अन्य मुसलमान राष्ट्रों की मित्रता अधिक बढ़ी है।