ईरान के बारे में वॉशिंग्टन से आने वाली विरोधाभासी बातें
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अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ बिना शर्त बातचीत करने की तत्परता के एलान को दो घंटे भी नहीं बीते थे कि अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपने राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के ख़िलाफ़ जाते हुए ईरान के साथ वार्ता के लिए शर्त लगायी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ३१, २०१८ १२:५९ Asia/Kolkata

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ बिना शर्त बातचीत करने की तत्परता के एलान को दो घंटे भी नहीं बीते थे कि अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपने राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के ख़िलाफ़ जाते हुए ईरान के साथ वार्ता के लिए शर्त लगायी।

माइक पोम्पियो ने वाइट हाउस में इतालवी प्रधान मंत्री और ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के कुछ ही घंटे के भीतर एक इंटरव्यू में ईरानी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और ट्रम्प के बीच मुलाक़ात के लिए तीन शर्तें रखीं। एक ईरानी जनता के साथ इस देश की सरकार के व्यवहार में बदलाव, दूसरे क्षेत्रीय नीतियों के संबंध में ईरान के दृष्टिकोण में बदलाव और तीसरे परमाणु हथियारों के उन्हीं के शब्दों में प्रसार को रोकने के लिए सहमति का एलान। यह ऐसी हालत में है कि ट्रम्प ने दसियों पत्रकारों के सामने एक सवाल के जवाब में कहाः "मैं उनसे जिस वक़्त जब चाहें मुलाक़ात के लिए तय्यार हूं। मुझे नहीं मालूम कि वे तय्यार हैं। कोई पूर्वशर्त नहीं है। उनके लिए भी अच्छा है और दुनिया के लिए भी।"

अमरीकी राष्ट्रपति और अमरीकी विदेश मंत्री के बयान से पहला अर्थ यह निकलता है कि वॉशिंग्टन में ईरान के साथ बातचीत के संबंध में सर्वसम्मति नहीं है। ऐसा लगता है कि ट्रम्प ईरान के साथ बातचीत टेलिविजन पर दिखाने के लिए चाहते हैं, जिस तरह उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता के साथ किया। अमरीका का कूटनैतिक तंत्र पोम्पियो के विदेश मंत्री बनने से किसी भी समय की तुलना में मौजूदा दौर में ज़्यादा सबसे ज़्यादा चरमपंथी गुटों के हाथ में पड़ गया है जो ईरान के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप, ईरानी राष्ट्र को निहत्था बनाने और अंततः ईरान की राजनैतिक व्यवस्था को पतन की कगार पर पहुंचाने का लक्ष्य साधना चाहते हैं।

अंत में यह कि इस बात की कोई गैरंटी नहीं है कि ट्रम्प सरकार के साथ ईरान की संभावित सहमति की बाद वाले अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से अनदेखी नहीं की जाएगी बिल्कुल उसी तरह जिस तरह ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा के राष्ट्रपति काल में ईरान-गुट पांच धन एक के बीच हुयी सहमति की अनदेखी की। (MAQ/T)