ईरान के खिलाफ शत्रुता जारी , कितनी मिलेगी कामयाबी?
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अमरीका, जेसीपीओए से निकलने के बाद विभिन्न पहलुओं से ईरान पर दबाव डालने की रणनीति पर काम कर रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug १७, २०१८ १२:३५ Asia/Kolkata

अमरीका, जेसीपीओए से निकलने के बाद विभिन्न पहलुओं से ईरान पर दबाव डालने की रणनीति पर काम कर रहा है।

गत 8 मई सन 2018 को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर बेबुनियाद आरोप लगाते हुए जेसीपीओए से निकलने की घोषणा की और अगले तीन से छे महीनों के दौरान ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का एलान कर दिया। पहले चरण के प्रतिबंध गत 7 अगस्त से लागू हो गये जिसकी विश्व स्तर पर आलोचना की गयी जबकि दूसरे चरण के प्रतिबंध 4 नवंबर से लागू होंगे जिनमें तेल पर प्रतिबंध भी शामिल है। अमरीका का मुख्य उद्देश्य, ईरान की अर्थ व्यवस्था को तबाह करना है और यही वजह है  कि वह ईरान के खिलाफ व्यापक स्तर पर आर्थिक युद्ध छेड़े हुए है इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अमरीकी विदेशमंत्री ने एलान किया है कि उनके मंत्रालय ने ईरान के खिलाफ कोशिशों पर नज़र रखने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है जिसकी अध्यक्षता ब्राउन हूक कर रहे हैं। 

वास्तव में इस समिति के गठन का उद्देश्य, अन्य देशों को ईरान के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों में सहयोग पर तैयार करना है। अमरीका का दावा है कि अन्य देशों से वार्ता में उसे सकारात्मक संकेत मिले हैं और उसे उम्मीद है कि अन्य देश , ईरान पर तेल प्रतिबंध में अमरीका का साथ देंगे लेकिन ज़मीनी सच्चाई जो है उससे यह संकेत मिलता है कि अमरीकियों की यह आशा, निराधार है क्योंकि चीन, तुर्की जैसे ईरानी तेल के मुख्य खरीदार, अमरीका के प्रतिबंधों को मानने से पहले ही इन्कार कर चुके हैं और भारत ने भी कहा है कि वह ईरान से तेल खरीदने का इच्छुक है। इसके साथ ही अमरीका का यह दावा भी गलत है कि ईरान के तेल पर प्रतिबंध से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के खिलाफ तेल प्रतिबंध के लागू होने से तेल की क़ीमत डेढ़ सौ डॅालर तक पहुंच सकती है। (Q.A.)