यूरोप का वित्तीय मैकेनिज़्म, देर से उठाया गया क़दम लेकिन आशाजनक
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के उप विदेशमंत्री सैयद अब्बास इराक़ची ने विशेष वित्तीय व्यवस्था की स्थापना को यूरोप की ओर से अपने वचनों पर अमल की ओर पहला क़दम क़रार दिया और इसका स्वागत किया।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Feb ०१, २०१९ १३:०४ Asia/Kolkata

इस्लामी गणतंत्र ईरान के उप विदेशमंत्री सैयद अब्बास इराक़ची ने विशेष वित्तीय व्यवस्था की स्थापना को यूरोप की ओर से अपने वचनों पर अमल की ओर पहला क़दम क़रार दिया और इसका स्वागत किया।

उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान को आशा है कि यूरोप द्वारा बनाए गये विशेष वित्तीय व्यवस्था से पूर्ण रूप से लाभ उठाया जाएगा।  उन्होंने कहा कि यूरोप द्वारा बनाई गयी वित्तीय व्यवस्था द्वारा ईरान और दुनिया के अन्य देशों के बीच आयात और निर्यात में सरलताएं पैदा होंगी। 

ज्ञात रहे कि जर्मनी, फ़्रांस और ब्रिटेन ने गुरुवार को इन्सटैक्स (INSTEX) नामक विशेष वित्तीय व्यवस्था स्थापित की और उसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पेरिस में पूरी कर ली गयी है। इसका मुख्यालय पेरिस में होगा और जर्मनी के कामर्स बैंक के पूर्व डायरेक्टर परफ़िशर को इसका प्रमुख नियुक्त किया गया है। इसमें अन्य यूरोपीय देशों से भी अपील की गयी है कि वह भी ईरान के साथ व्यापार के उद्देश्य से उक्त वित्तीय व्यवस्था में शामिल हो जाएं। यह वित्तीय व्यवस्था अमरीकी प्रतिबंधों के बावजूद दुनियाभर के बैंकों को ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन की सुविधाएं प्रदान करेगी।

रोमानिया में यूरोपीय संघ के मंत्रियों की बैठक के बाद जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रांस के विदेशमंत्रियों ने एक संयुक्त प्रेस कांफ़्रेंस में ईरान के लिए विशेष वित्तीय व्यवस्था (INSTEX) को लागू करने की आधिकारिक घोषणा की।

वर्तमान वित्तीय व्यवस्था ईरान को परमाणु समझौते से आर्थिक लाभ उठाने में मदद करेगी। इस वित्तीय व्यवस्था में खाद्य पदार्थ और दवाएं जैसी ग़ैर प्रतिबंधित वस्तुएं शामिल होंगी। यूरोप के वित्तीय सिस्टम में अगला क़दम प्रतिबंधित वस्तुओं को शामिल करना होगा और यह कहा जा सकता है कि इस मैकेनिज़्म का मुख्य लक्ष्य, प्रतिबंधित वस्तुओं को कवरेज देना है। 

बहरहाल यूरोप ने जो क़दम उठाया है वह सकारात्मक क़दम है और इससे पता चलता है कि यूरोप चाहता है कि परमाणु समझौते की रक्षा की जाए किन्तु जैसा कि ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय देशों को कम से कम समय में अपने वचनों पर पूर्ण रूप से अमल करना चाहिए। (AK)