मुस्लिम देशों के अधिकारी, अमरीका और ज़ायोनियों के ग़ुलाम हैंः वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि पवित्र क़ुरआन से जुड़े रहना और इसकी शिक्षाओं पर अमल करना, मानवता के कल्याण का माध्यम है किन्तु खेद की बात है कि आज कुछ मुसल्मि देशों के राष्ट्राध्यक्ष, क़ुरआनी शिक्षाओं पर अमल नहीं करते और वह अमरीका और ज़ायोनियों के ग़ुलाम बने हुए हैं।
पवित्र क़ुरआन के 36वें अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबले की समाप्ति का कार्यक्रम सोमवार को इमाम ख़ुमैनी इमाम बाड़े में वरिष्ठ नेता की उपस्थिति में आयोजित हुआ जिसमें दुनिया के विभिन्न देशों के हाफ़िज़ों, क़ारियों और क़ुरआन के उस्तादों ने भाग लिया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में वरिष्ठ नेता ने कहा कि क़ुरआन से जुड़े रहना और उसकी शिक्षाओं पर अमल करना, मानवता के कल्याण का माध्यम है।

उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि वर्तमान समय में मुसलमानों की बहुत सी समस्याओं और कठिनाइयों का कारण यह है कि वह क़ुरआनी शिक्षाओं पर अमल नहीं कर रहे हैं और उससे दूर हो गये हैं, कहा कि आज ईश्वर की कृपा से इस्लामी गणतंत्र ईरान में पवित्र क़ुरआन विशेषकर युवाओं का लगाव तेज़ी के साथ बढ़ता जा रहा है और क़ुरआने करीम से यही जुड़ाव, इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था की सफलता, कल्याण, प्रतिष्ठा और शक्ति का कारण बनेगा।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुछ मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्ष, क़ुरआन की शिक्षाओं पर अमल नहीं करते और वह अमरीका तथा ज़ायोनियों के अनुसरण करता व ग़ुलाम बने हुए हैं।
वरिष्ठ नेता ने कहा है कि कुछ मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने पवित्र क़ुरआन को भुला दिया है और आज वह मोमिनों के साथ कृपा और दयालुता से पेश नहीं आते हैं और दुश्मनों से कड़ाई का बर्ताव करने के बजाए अमरीका और ज़ायोनियों का साथ दे रहे हैं और फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि कृपा और दयालुता से पेश आने के बजाए यह अधिकारी सीरिया और यमन पर बमबारी कर रहे हैं और जो लोग बमबारी कर रह हैं वह विदित रूप से मुस्लिम हैं किन्तु मुसलमानों पर कृपा और दया नहीं करते।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन पर अमल के लिए ईश्वर की याद और ईश्वरीय भय आवश्यक है। आपने शहीदों को ईश्वरीय भय के सर्वोच्च स्तर पर होने वाले इंसानों जैसा बताया और कहा कि हमारे शहीदों ने ईरानी जनता को बहुत पाठ और संदेश दिए हैं जिनका एक ताज़ा उदाहरण बाढ़ के दौरान पीड़ितों की सहायता के लिए ईरानी जनता का बलिदान हैै।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान के गुलिस्तान, माज़ेन्दरान, ईलाम, लुरिस्तान और ख़ूज़िस्तान प्रांतों में हालिया बाढ़ के दौरान जनता ने सहायता कार्यवाहियों में जिस अंदाज़ में भाग लिया वह बिल्कुल वही दृश्य पेश कर रहा था जो आठ वर्षीय पवित्र प्रतिरक्षा के दौरान हमारे युवाओं ने पेश किया था।
उन्होंने कहा कि यह भावना पवित्र क़ुरआन की शिक्षाओं पर अमल और पवित्र क़ुरआन के पाठ पर अमल करने का परिणाम है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी गणतंत्र ईरान से दुश्मनों की शत्रुता का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि दुश्मनी और इन शत्रुताओं का स्तर बड़ा है और इनमें तेज़ी अतीत के मुक़ाबले में अधिक नज़र आ रही है किन्तु यह कार्यवाहियां और साज़िशें, इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ दुश्मनों की दुश्मनी की अंतिम सांसें है।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि दुश्मन ईरानी जनता से जितनी अधिक दुश्मनी करेंगे और क़ुरआनी शिक्षाओं पर ईरानी जनता के अमल करने पर वह जितना जलेंगे, ईरान की जनता, दुश्मनों के मुक़ाबले में उतना ही अधिक शक्तिशाली होगी और क़ुरआन से अपना जुड़ाव भी अधिक से अधिक बढ़ाती जाएगी। (AK)