मुसलमानों के प्रथम क़िब्ले का सौदा नहीं किया जा सकताः ज़रीफ़
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जवाद ज़रीफ ने कहा है कि मुसलमानों के प्रथम क़िब्ले का सौदा नहीं किया जा सकता।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
May ३०, २०१९ १२:४५ Asia/Kolkata
  • मुसलमानों के प्रथम क़िब्ले का सौदा नहीं किया जा सकताः ज़रीफ़

जवाद ज़रीफ ने कहा है कि मुसलमानों के प्रथम क़िब्ले का सौदा नहीं किया जा सकता।

ईरान के विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने स्पष्ट किया कि बैतुल मुक़द्दस, मुसलमानों का प्रथम क़िब्ला है और यह पूरे संसार के मुसलमानों की आकांक्षाओं का केन्द्र भी है।  जवाद ज़रीफ़ ने बुधवार को तेहरान में इस्लामी देशों के राजदूतों को दी जाने वाली इफ़तारी के कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान समय में इस्लामी जगत की स्थिति बहुत दर्दनाक है।  उन्होंने कहा कि इससे अधिक दर्द की बात और क्या होगी कि कुछ क्षेत्रीय देशों के माध्यम से डील आफ़ सेंचुरी को लागू करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

ज्ञात रहे कि डील आफ द सेंचुरी, अमरीकी सरकार की वह योजना है जिसका उद्देश्य फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को समाप्त करना है।  इस योजना को क्षेत्र के कुछ अरब देशों की ओर से लागू कराने की कोशिशें की जा रही हैं।  इस योजना के आधार पर बैतुल मुक़द्दस को अवैध ज़ायोनी शासन के हवाले कर दिया जाएगा।  दूसरे देशों में रहने वाले फ़िलिस्तीनियों को स्वदेश वापस आने का अधिकार नहीं होगा।