डील ऑफ़ सेन्चुरी कभी भी सफल नहीं होगीः वरिष्ठ नेता
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i75939-डील_ऑफ़_सेन्चुरी_कभी_भी_सफल_नहीं_होगीः_वरिष्ठ_नेता
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि बहरैनी व सऊदी शासकों को यह जान लेना चाहिये कि उन्होंने किस दलदल में कदम रखा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०५, २०१९ १२:५९ Asia/Kolkata

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि बहरैनी व सऊदी शासकों को यह जान लेना चाहिये कि उन्होंने किस दलदल में कदम रखा है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा है कि डील ऑफ़ सेन्चुरी कभी भी सफल नहीं होगी। वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने फिलिस्तीन के विषय और डील ऑफ़ सेन्चुरी शीर्षक के अंतर्गत अमेरिका की मित्थ्याचारी योजना की ओर संकेत किया और कहा कि ये इस्लामी जगत के नंबर एक के विषय हैं।

वरिष्ठ नेता कहा कि बहरैन और सऊदी अरब जैसे कुछ इस्लामी देशों के विश्वासघात ने इस प्रकार के षडयंत्र की भूमिका प्रशस्त की है।   

वरिष्ठ नेता ने बहरैन की मेज़बानी में होने वाले आर्थिक सम्मेलन की ओर संकेत किया और कहा कि यह अमेरिका से संबंधित सम्मेलन है परंतु बहरैनी अधिकारियों ने अपनी कमज़ोर और जनविरोधी भावना के कारण इस सम्मेलन की भूमि प्रशस्त कर दी है और बहरैनी व सऊदी शासकों को यह जान लेना चाहिये कि उन्होंने किस दलदल में कदम रखा है।

डील ऑफ़ सेन्चुरी वह योजना है जिसे डोनल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने के बाद पेश किया गया है और इस संबंध में कुछ रुढ़िवादी अरब सरकारें अमेरिका और जायोनी शासन की हां में हां मिला रही हैं।

25 और 26 जून को बहरैन की राजधानी मनामा में आर्थिक सम्मेलन होने वाला है।

रोचक बात यह है कि इससे पहले अभी हाल ही में दो बैठकें हो चुकी हैं एक फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद और दूसरे अरब संघ की सऊदी अरब के मक्का नगर में होने वाली बैठक। मनामा में होने वाला आर्थिक सम्मेलन इस बात का सूचक है कि आले सऊद और आले खलीफा ने फिलिस्तीनियों की आकांक्षाओं की पूरी तरह उपेक्षा कर दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति सऊदी अरब, बहरैन और संयुक्त अरब इमारात पर दबाव डालकर डील ऑफ़ सेन्चुरी के खर्चे को इन्हीं देशों से लेने के प्रयास में हैं। अमेरिका, सऊदी अरब  और बहरैन की सुरक्षा का जो समर्थन कर रहा है उसके बदले में इन देशों ने इस्लामी जगत के प्रथम श्रेणी के मुद्दे को भी भुला दिये हैं।

बहरहाल अभी पिछले शुक्रवार को दुनिया के 100 से अधिक देशों में विश्व कुद्स की रैलियों का निकाला जाना इस बात का सूचक है कि किसी भी डील से फिलिस्तीनी जनता की आकांक्षाओं का सौदा नहीं किया जा सकता और प्रतिरोध अमेरिका, जायोनी शासन और सऊदी अरब की सांठ- गांठ से बनने वाली डील ऑफ़ सेन्चुरी के व्यवहारिक होने की दिशा में बाधा बन जायेगा। MM