मलेशिया शिखर सम्मेलन में 3 अहम सुझाव
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ईरानी राष्ट्रपति का मलेशिया दौरा और इस्लामी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के  कुआलालंपूर-2019 शिखर बैठक में भाषण, एशियाई इस्लामी देशों के बीच सहयोग, समरस्ता व शक्ति की अहमियत को दर्शाता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २०, २०१९ १४:२० Asia/Kolkata

ईरानी राष्ट्रपति का मलेशिया दौरा और इस्लामी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के  कुआलालंपूर-2019 शिखर बैठक में भाषण, एशियाई इस्लामी देशों के बीच सहयोग, समरस्ता व शक्ति की अहमियत को दर्शाता है।

ईरान एशिया महाद्वीप का अहम देश है और पिछले 4 दशक में उसने विज्ञान की विभिन्न शाखाओं, ख़ास तौर पर नैनो और बायो टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में अहम सफलताएं हासिल की हैं।

एशिया महद्वीप के इस्लामी देशों के साथ इन सफलताओं के साझा होने का बहुत अच्छा नतीजा निकलेगा और इन देशों की शक्ति व प्रभाव ऐसी दुनिया में कई गुना बढ़ जाएगा जिसे अमरीका के वर्चस्व का सामना है।

ईरानी राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने गुरुवार के भाषण में कहा कि इस्लामी जगत की तरक़्क़ी आपसी सहयोग पर निर्भर है, इसलिए इस्लामी देशों को आपस में एक दूसरे से सहयोग करना चाहिए और इस्लामी जगत बहुत से क्षेत्रों में मिल कर काम कर सकते हैं।

एशिया के इस्लामी देशों के पास आपसी सहयोग के लिए व्यापक क्षमता है। आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, रक्षा और पर्यटन, इनमें से हर एक क्षेत्र में आपसी सहयोग से इस्लामी जगत की सभी क्षेत्र में शक्ति व प्रभाव बढ़ जाएगा।

इस्लामी गणतंत्र ईरान, मलेशिया, इंडोनेशिया, तुर्की और पाकिस्तान इस्लामी जगत के अहम देश हैं। इनमें से हर एक ने विभिन्न क्षेत्रों में अहम तरक़्क़ी की है। ये देश अपनी क्षमताओं को साझा करके एक दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक प्रभावी ताक़त बन सकते हैं।

दुनिया में डॉलर के एकाधिकार, नस्लभेद या वैज्ञानिक भेदभाव जैसी वर्चस्ववादी नीतियों के मद्देनज़र, इस्लामी देश आपसी सहयोग से आज की दुनिया में इस साम्राज्यवादी व्यवहार के असर को ख़त्म कर सकते हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में ईरानी राष्ट्रपति ने कुआलालंपूर-2019 शिखर बैठक में इस्लामी देशों के बीच प्रभावी सहयोग के लिए 3 सुझाव पेश किए।

एक इस्लामी देशों के बीच प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए वित्तीय ज़रूरत की आपूर्ति के लिए संयुक्त कोष, दूसरा आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेन्स व साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त अध्ययन केन्द्र और तीसरा डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में इस्लामी देशों के संयुक्त बाज़ार की स्थापना  है। अगर इन सुझावों पर अमल हो जाए तो इस्लामी जगत एक प्रभावी ध्रुव में बदल जाएगा।

इस्लामी देश आपस में सांस्कृतिक, भाषाई, धार्मिक व साभ्यतिक समानता रखते हैं और बड़ी आसानी से वे आज की दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी नीति अपना सकते हैं और एक शक्तिशाली संगठन के रूप में दुनिया के आर्थिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक समीकरणों का संचालन कर सकते हैं। (MAQ/T)