ईरान में अशांति फैलाने की कोशिश दुश्मन को बहुत मंहगी पड़ेगी
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रवक्ता ने अमेरिका के "ब्लूमबर्ग" में प्रकाशित हुए ईरान विरोधी एक लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान को अशांत बनाने की कोशिश करने वाले दुश्मन यह अच्छी तरह जान लें कि उनकी एक ग़लती उन्हें तबाह कर देगी।
समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरानी प्रतिनिधिनमंडल के प्रवक्ता अली रज़ा मीर यूसेफ़ी ने अमेरिकी समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग में प्रकाशित हुए "एलाय लेक" द्वारा "ईरान में अशांति किसी भी समझौते से बेहतर है"” के शीर्षक के तहत लिखे गए लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यह लेख पूरी तरह पत्रकारिता के सभी सिद्धांतों और मानकों के ख़िलाफ़ है। इस तरह के लेख हिंसा, हत्या और अशांति को बढ़ावा देते हैं और कुछ वास्तविक धारणाओं और त्रुटियों सामने ले आते हैं। मीर यूसेफ़ी ने कहा कि, इस लेख में जिस तरह से परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की प्रशंसा की गई है और अमानवीय एवं बर्बरतापूर्ण कार्यों के माध्यम से ईरान के बुनियादी ढांचे को नुक़सान पहुंचाने के लिए उकसाया गया है यह सब हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रवक्ता ने कहा इस तरह के लेखों से तनाव में वृद्धि के अलावा कुछ प्राप्त होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान ने यह स्पष्ट रूप से एलान कर दिया है कि, अगर ईरान में किसी भी तरह की अशांति के लिए किसी भी देश या सरकार के प्रोक्ष्य या अप्रोक्ष्य रूप से हाथ होने की बात साबित हो जाती है तो तेहरान उसका मुंहतोड़ जवाब देगा। मीर यूसेफ़ी ने ब्लूमबर्ग में प्रकाशित हुए लेख के उस भाग की ओर इशारा किया कि जिसमें यह दावा किया गया है कि ईरान रसायनिक हथियार बनाने की कोशिश में है, कहा कि समकालीन इतिहास में ईरान से अधिक इस हथियार से हुए नुक़सान का कोई भुक्तभोगी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ईरान-इराक़ युद्ध में ईरान की जनता को इस हथियार से मिला घाव अभी भी ताज़ा है। मीर यूसेफ़ी ने कहा कि ईरान की कभी भी इसकी रासायनिक हथियारों के उत्पादन की कोई योजना नहीं रही है। उन्होंने कहा कि लेख द्वारा किया गया दावा झूठा और मनगढ़त है। मीर यूसेफ़ी ने याद दिलाया कि, इराक़ के तानाशाह सद्दाम द्वारा जब ईरान की जनता के ख़िलाफ़ रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया गया था तब यही पश्चिमी देश हैं न केवल मानवता को शर्मसार करने देने वाली चुप्पी साधे हुए थे बल्कि सद्दाम का पूरी तरह साथ दे रहे थे। (RZ)
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