ईरान में मानवाधिकार का कोई रंग नहीं हैः अली बाक़िरी
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ईरान की न्यायपालिका के मानवाधिकार आयोग के सचिव ने कहा है कि ईरान में मानवाधिकार का कोई रंग नहीं है जिस तरह ईरान फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, इराक़ और यमन में मानवाधिकार की बात करता है उसी तरह और उसी गम्भीरता से वह यूरोप के लोगों के लिए मानवाधिकार की बात करता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १४, २०२१ १४:५९ Asia/Kolkata
  • ईरान में मानवाधिकार का कोई रंग नहीं हैः अली बाक़िरी

ईरान की न्यायपालिका के मानवाधिकार आयोग के सचिव ने कहा है कि ईरान में मानवाधिकार का कोई रंग नहीं है जिस तरह ईरान फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, इराक़ और यमन में मानवाधिकार की बात करता है उसी तरह और उसी गम्भीरता से वह यूरोप के लोगों के लिए मानवाधिकार की बात करता है।

अली बाक़िरी ने ईरान में अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों के प्रभावों की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में विदेशी प्रतिनिधियों और राजदूतों की उपस्थिति में कहा कि कुछ दिन पहले पश्चिमी देश के एक राजदूत ने मुझसे मुलाक़ात की थी और उसमें उस देश के राजदूत ने मुझसे अपील की थी कि मानवता प्रेमी कार्यवाही के अंतर्गत मदद करें ताकि जेल में बंद उनके देश के एक नागरिक को दवा पहुंचाई जाये तो मैंने उससे कहा कि जिस दवा की ज़रूरत थी इससे पहले उसकी आपूर्ति हो चुकी है परंतु आप तो मानवाधिकार की रक्षा का दावा करते हैं किस प्रकार आपके खून में उबाल नहीं आता जबकि साढ़े आठ करोड़ के एक राष्ट्र को दवा की पहुंच से रोक दिया गया है?

उन्होंने कहा कि जेल में बंद अपने एक नागरिक को दवा पहुंचाने के लिए आप यूरोप से ईरान दवा लेकर आये हैं। मैंने आगे कहा कि श्रीमान राजदूत! हमारे और आप में अंतर यह है कि पश्चिम, मानवाधिकार को रंग में देखता है और जिसका बाल, आंख, हित, राजनीति और लक्ष्य आपके अनुसार होगा वह इंसान है और उसके हितों की रक्षा अनिवार्य है परंतु अगर किसी का रंग, लक्ष्य और जीवन शैली भिन्न होगी तो पश्चिम के अनुसार वह न तो इंसान है और न ही उसे मानवाधिकार प्राप्त हैं।

ईरान की न्यायपालिका के मानवाधिकार आयोग के सचिव ने स्पष्ट किया कि इस्लामी गणतंत्र ईरान में मानवाधिकार का कोई रंग नहीं है जिस तरह से वह फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, इराक और यमन के लोगों के अधिकारों की बात करता है उसी तरह वह यूरोप के लोगों के अधिकारों की भी बात करता है और बोस्निया हिर्ज़ोगोविना के मज़लूम लोगों की जानों की रक्षा के लिए खड़ा हो जाता है और यूरोप के अत्याचारियों के मुकाबले में यूरोप के मज़लूम लोगों की रक्षा के लिए डट जाता है और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले यूरोपीयियों की नज़रों के सामने यूरोप के केन्द्र में मज़लूम यूरोपियों की रक्षा के लिए संघर्ष करता है और इस मानवताप्रेमी कार्य की उसे क़ीमत भी चुकानी पड़ती है और वह किसी से और किसी भी चीज़ से नहीं डरता। MM

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