ईरानी राष्ट्र का प्रतिरोध दुश्मनों की पराजय का कारण बनाः राष्ट्रपति रूहानी
राष्ट्रपति रूहानी ने अपने नववर्ष के बधाई संदेश में ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध को शत्रु की पराजय का कारण बताया है।
डाॅक्टर हसन रूहानी ने सन 1400 हिजरी शमसी के आरंभ पर अपने बधाई संदेश में ईरानी राष्ट्र पर थोपे गए आर्थिक और अन्यायपूर्ण युद्ध की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने ऐसी स्थिति में कोरोना का मुक़ाबला किया जब वह इस महामारी के लिए की जाने वाली सहायता से वंचित था बल्कि विदेशी बैंकों में मौजूद अपने पैसों तक भी उसकी पहुंच नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह कठिन समय और परीक्षा की घड़ी, जिसमें कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा, ईरानी राष्ट्र की दूरदर्शिता, संयम, धैर्य और प्रतिरोध के कारण ईरान के इतिहास में शानदार और गौरवान्वित चरण में परिवर्तित हो गई।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी राष्ट्र के शत्रुओं ने स्वीकार किया है कि इस महान राष्ट्र से धमकियों और प्रतिबंधों की भाषा में बात नहीं की जा सकती और यही कारण है कि पराजय के तीसरे साल वे ईरानी राष्ट्र के साथ पुनः रचनात्मक मार्ग को अपनाने पर बाध्य हुए। हसन रूहानी का कहना था कि अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर हमने मूल्यवान कूटनीतिक पूंजी अर्जित की जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ, सुरक्षा परिषद और अन्तर्राष्ट्रीय हेग न्यायालय में ईरान की विजय के रूप में देखा जा सकता है। उनका कहना था कि आज विश्व के साथ हमारे विस्तृत, गहरे और स्ट्रैटेजिक संबन्ध हैं और हमारा शत्रु अलग-थलग और अक्षम हो चुका है।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने सन 1400 हिजरी शमसी के राष्ट्रपति चुनाव में ईरानी जनता की भरपूर उपस्थिति पर बल देते हुए कहा कि पंद्रहवीं शताब्दी के पहले दशक में जनता की अधिकतम भागीदारी के साथ चुनाव ईरानियों की आकांक्षाओं की प्राप्ति को सुनिश्चित बनाएगी।
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