जनरल हुसैन सलामी ने परमाणु समझौते से आवश्यकतामुक्त होने का बताया तरीक़ा
ईदे नौरोज़ के अवसर पर ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने जो संदेश दिया था उसमें मुख्य चीज़ ईमान की रोशनी में ईरान को मज़बूत बनाने की बात थी।
ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के नाम संदेश में कहा है कि ईदे नौरोज़ के अवसर उन्होंने जो संदेश दिया है उसे सिपाहे पासदारान ईरानी राष्ट्र की प्रगति व कल्याण की दिशा का मार्गदर्शक समझता है।
उन्होंने बल देकर कहा कि हम लोगों व जनता के साथ हैं और दुश्मन द्वारा उत्पन्न की गयी कठिनाइयों को पार करके देश को अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों से होने वाले नुकसान से बचायेंगे।
उन्होंने ईरान को मज़बूत होने को इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के संदेश की जान बताया और बल देकर कहा कि सिपाहे पासदारान ने स्वंय को नौरोज़ के संदेश का एक संबोधक समझा और इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के आदेशों को व्यवहारिक बनाने लिए आयोगों का गठन कर दिया है।
ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के नाम अपने पत्र व संदेश में कहा है कि हम रणक्षेत्र में बने रहेंगे, लोगों के साथ रहेंगे ताकि आपके आदेशों को व्यवहारिक बना सकें और दुश्मन को पीछे ढ़केल सकें, इस प्रकार हम परमाणु समझौते से आवश्यकतामुक्त हो जायेंगे और यह हमारा रास्ता है।
ज्ञात रहे कि ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने वर्ष हिजरी शमसी सन 1400 का नाम उत्पादन, समर्थन और रुकावटों का निवारण रखा है। MM