सीरिया संकट में आ गया है निर्णायक मोड़
सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत डी मिस्तूरा ने कहा है कि सितम्बर महीने की शुरूआत में ही सीरिया संकट के संबंध में निर्णायक मोड़ आने वाला है।
स्टीफ़न डी मिस्तूरा ने गुरूवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सितम्बर महीने की शुरुआत में सीरिया संकट के समाधान के संबंध में निर्णायक मोड़ आएगा। जबकि अगस्त महीने के अंतिम दिनों में आगामी वार्ता के बारे में मैं रिपोर्ट पेश करूंगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा से पहले ही जेनेवा में सीरिया संकट के समाधान के लिए वार्ता शुरू कर देने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी विषयों पर बाद में विशेषज्ञों के स्तर की वार्ता होगी।
सीरिया संकट को हवा देने में जिन देशों ने बुनियादी भूमिका निभाई है वह बश्शार असद की सरकार को गिराने की योजना विफल होने के बाद अब किसी तरह इस अपने सिर से यह बोझ हटा देना चाहते हैं। अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों तथा सऊदी अरब, जार्डन, तुर्की, क़तर और इमारा जैसे क्षेत्रीय देशों ने मिल जुल कर सीरिया की बश्शार असद सरकार का तख्ता उलटने की कोशिश की और इसके लिए उन्होंने सीरिया के भीतर मौजूद सरकार विरोधी संगठनों के साथ ही आतंकिवादियों की मदद भी शुरू कर दी। यहां तक कि दुनिया के 80 से अधिक देशों आतंकियों के लिए सीरिया तुर्की सीमा खोल दी गई। सीमावर्ती क्षेत्रों पर आतंकियों का कब़्ज़ा हो गया जबकि तुर्की ने अपने हवाई अड्डों और सीमाओं को उन लड़ाकों के लिए खोल दिया जो सीरिया में जाकर राष्ट्रपति बश्शार असद के विरुद्ध लड़ना चाहते थे।
यह सब कुछ हुआ और सात साल गुज़र गए लेकिन राष्ट्रपति बश्शार असद की सरकार नहीं गिरी बल्कि धीरे धीरे इस सरकार ने अपने घटकों अर्थात, ईरान, रूस और हिज़्बुल्लाह की मदद से आतंकियों को हर मोर्चे पर परास्त कर दिया। इस समय स्थिति यह है कि सारी सीमाएं सीरियाई सेना के नियंत्रण में आ चुकी हैं। लेबनान से मिलने वाली सीरियाई सीमा, इराक़ से मिलने वाली सीमा, और जार्डन से मिलने वाली सीमा पर सीरियाई सेना का नियंत्रण हो चुकी है जबकि तुर्की से मिलने वाली सीमा का भी अधिकतर भाग सीरियाई सेना और उसके घटकों के नियंत्रण में है। केवल इदलिब के क्षेत्र से तुर्की जाने वाले रास्ते का नियंत्रण आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट के हाथ में है।
देश के भीतर सारे महत्वपूर्ण इलाक़े आतंकियों से आज़ाद कराए जा चुके हैं और दैरुज़्ज़ूर तथा रक़्क़ा में आतंकियों के विरुद्ध कार्यवाही जारी है।
दूसरी ओर अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस जैसे देश अपनी अपनी समस्याओं में उलझे हुए हैं जबकि सऊदी अरब और क़तर के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। सऊदी अरब के सामने यमन का युद्ध भी एक बड़े संकट के रूप में मौजूद है और तेल की क़ीमतों में आने वाली गिरावट ने इस देश की अर्थ व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। सीरियाई के वह सरकार विरोधी तत्व जिन्होंने तुर्की के इस्तांबूल शहर और सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में अपना ठिकाना बना लिया था और अपने देश के विरुद्ध वहीं से साज़िशें रचते अब बाहरी समर्थन समाप्त हो जाने के बाद ख़ुद को अकेला देख रहा है। इन परिस्थितियों में कई विरोधी नेता तो दमिश्क़ लौट आए हैं और उन्होंने अपनी ग़लती स्वीकार कर ली है। सात साल के बाद दमिश्क़ अंतर्राष्ट्रीय मेले का आयोजन भी हुआ। मुहम्मद बस्साम मलिक कई साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौट आए हैं और उन्होंने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है कि विदेशों ने हमें धोखा दिया। बाहरी शक्तियां दमिश्क़ सरकार के विरुद्ध हमारा समर्थन करने की आड़ में सीरिया के टुकड़े करना चाहती हैं और हम इस पूरे खेल को पूरी तरह समझ चुके हैं अतः हम इस साज़िश का हिस्सा नहीं बनेंगे।
सीरिया के करन्सी नोट पर राष्ट्रपति बश्शार असद की तसवीर हाल में छपी है और इसे इस बात का चिन्ह माना जाता है कि राष्ट्रपति असद को सत्ता से हटाने का ख़्वाब देखने वाले ज़मीनी तथ्यों से बहुत दूर हैं। राष्ट्रपति असद लंबे समय तक सत्ता में बाक़ी रहेंगे।