यूएई ने यमन युद्ध में विफलता मान ली
संयुक्त अरब इमारात के विदेश राज्यमंत्री अनवर क़रक़ाश ने यमनी जनता के विरुद्ध युद्ध में अपने देश की विफलता स्वीकार कर ली है और कहा है कि यमन परीक्षा कठिन थी और अब भी कठिन है जबकि यमनी सेना के प्रवक्ता शरफ़ लुक़मान ने शुक्रवार को यूएई को धमकी दिया कि आज से यह देश यमनी मीज़ाइल का निशाना होगा।
यमन के रक्षामंत्री ब्रिगेडियर जनरल मुहम्मद नासिर अलआतेफ़ी ने शुक्रवार को कहा था कि यमन पर हमला करने वालों के लिए नरक के द्वार खोल दिए जाएंगे। अब तक यमन में संयुक्त अरब इमारात के सैकड़ों सैन्य अधिकारी और सैनिक मारे जा चुके हैं या घायल हो चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में इस देश सैन्य उपकरणों, हेलीकाप्टरों और पानी के जहाज़ों को तबाह किया जा चुका है।
अमरीका के इशारे पर यमन के त्यागपत्र दे चुके राष्ट्रपति मंसूर हादी को सत्ता में वापस लाने के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने इस देश के विरुद्ध मार्च 2015 से व्यापक युद्ध आरंभ कर रखा है जिसमें अब तक दस हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद सऊदी अरब इस हमले का एक भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सका है।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के अतिक्रमण में गरीब देश यमन की जनता को खाद्य पदार्थों और आवश्यकता की दूसरी वस्तुओं की भारी कमी का सामना है।
इस संबंध में यमन के राजनैतिक मामलों के सलाहकार का कहना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात यमन की स्थिति के ज़िम्मेदार हैं और वह यह प्रयास कर रहे हैं कि स्थिति उनके नियंत्रण में रहे किन्तु मामला उनके हाथ से निकल चुका है। अरब अधिकारियों के लिए यमन युद्ध का परिणाम इस देश की तबाही और बर्बादी के अलावा कुछ भी नहीं निकला। सऊदी अरब और उसके घटक यमनी जनता के प्रतिरोध के कारण अब तक इस देश में अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सके हैं। (AK)