फ़ार्स की खाड़ी में आईआरजीसी के सोचे-समझे क़दम
ईरान का आईआरजीसी सैन्य समाधान पर बहुत सीमित ढंग से, सोच-समझ कर और बड़ी सटीकता से अमल कर रहा है और इसी के चलते अमरीकी ड्रोन मार गिराया गया और ब्रिटेन के तेल टैंकर को रोका गया।
अरबी समाचारपत्र रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने लिखा है कि इस सप्ताह दो बड़े अहम दौरे हुए हैं जो ईरान व अमरीका के संबंध में आए संकट के परिप्रेक्ष्य में क्षेत्र के भविष्य का निर्धारण कर सकते हैं और फ़ार्स की खाड़ी व मध्यपूर्व में तनाव में कमी और शांति व स्थिरता की स्थापना में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पहला दौरा ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की सीरिया व इराक़ की सीमा पर स्थित दैरुज़्ज़ूर के अलबू कमाल क्षेत्र का था जहां उन्होंने ईरान समर्थित गुटों के कुछ कमांडरों से मुलाक़ात की। दूसरा अहम दौरा ओमान के विदेश मंत्री यूसुफ़ बिन अलवी का तेहरान का दौरा था। उन्होंने अपने इस दौरे में ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी और विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ समेत इस देश के अहम नेताओं से मुलाक़ात की। कहा जाता है कि इस दौरे में अमरीका व ब्रिटेन ने क्षेत्रीय संकटों से निकलने के लिए उन्हें कुछ संदेश दिए थे।
हालिया सप्ताहों में सामने आने वाले संकटों में ईरानियों की शहादत प्रेम की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने अपनी प्रतिरक्षा व सैन्य रणनीति को मज़बूत बनाने का फ़ैसला किया और यह वह विषय है जिसने क्षेत्र में तनाव और सैन्य टकराव की आशंका काफ़ी हद तक बढ़ा दी है। दूसरी ओर ईरान के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई के सैन्य सलाहकार का कहना है कि ईरान को अमरीका से वार्ता में कोई रुचि नहीं है और यह विषय इस बात का कारण बना कि जिब्राल्टर में ईरान के तेल टैंकर को रोके जाने का जवाब देने के संबंध में ईरान के नेता की बात बहुत जल्द व्यवहारिक हो जाए। ईरान ने जो जवाब दिया और जो तस्वीरों में दिखाई दिया वह हाॅलीवुड की फ़िल्मों की तरह था।
इसके बाद अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने खुल कर इस बात की घोषणा की कि वे तेहरान जाने और ईरान के उच्चाधिकारियों से बात करने के लिए तैयार हैं ताकि उन्हीं के शब्दों में कोई शांतिपूर्ण सामाधान खोज सकें। यह चीज़ वर्तमान अमरीकी सरकार और डोनल्ड ट्रम्प में पाई जाने वाली निराशा की स्थिति को बयान करती है। शायद ट्रम्प आरंभ में चीख़ें चिल्लाएं क्योंकि वे एक घमंडी इंसान हैं लेकिन उनके हालिया व्यवहार और रुख़ से, जो वेनेज़ुएला या उत्तरी कोरिया के बारे में दिखाई दिया, पता चलता है कि उनकी कथनी और करनी पर अधिक विश्वास नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि वेनेज़ुएला के आंतरिक मामलों में अमरीका के हस्तक्षेप के बावजूद मादुरो, काराकास में अधिक मज़बूत हो गए और विद्रोही ख़्वान ग्वाइडो को पराजय हुई। इसी तरह किम जोंग ऊन ने उत्तरी कोरिया में अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखते हुए कई मीज़ाइल परीक्षण किए और ट्रम्प की धमकियों को महत्व नहीं दिया।
ईरान ने भी हालिया दिनों में परमाणु समझौते के बारे में जो क़दम उठाए हैं उनसे पता चलता है कि वह खेल अपने पक्ष में समाप्त करना चाहता है और पश्चिमी पक्षों पर दबाव बढ़ा कर अपने दृष्टिगत लक्ष्य हासिल करना चाहता है। यह वही रणनीति है जिस पर सभी ईरानी सहमत हैं। आईआरजीसी, सैन्य समाधान पर बहुत सीमित ढंग से, सोच-समझ कर और बड़ी सटीकता से अमल कर रहा है और इसी के चलते अमरीकी ड्रोन मार गिराया गया और ब्रिटेन के तेल टैंकर को रोका गया। ओमान के विदेश मंत्री ने कूटनैतिक समाधान के परिप्रेक्ष्य में अमरीका व ब्रिटेन का संदेश तेहरान तक पहुंचा दिया है लेकिन जो चीज़ ओमान की मध्यस्थता से अधिक प्रभावी हो सकती है वह ईरान व ब्रिटेन के तेल टैंकरों के मुक्त किए जाने पर सहमति है। (HN)