क़ज़ाक़िस्तान ने रूस से मांगी सहायता अमरीका को लगा बुरा
रूस से सहायता लेने के कारण अमरीका ने क़ज़ाक़िस्तान की कड़ी आलोचना की है।
अमरीका के विदेशमंत्री ने क़ज़ाक़िस्तान के राष्ट्रपति के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है कि प्रदर्शनकारियों से निबटने के लिए उन्होंने रूस से सैनिकों की सहायता मांगी है।
एंटोनी ब्लिंकन ने वाशिग्टन में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इतिहास ने हमें बताया है कि जब रूसी आपके घर आते हैं तो फिर उनको वापस जाने के लिए उनकी बहुत मिन्नत की जाती है।
अमरीकी विदेशमंत्री ने कहा कि मेरा माननता है कि क़ज़ाक़िस्तान के अधिकारी अपने देश में उत्पन्न हुई स्थिति पर नियंत्रण करने में सक्षम हैं।वे प्रदर्शकारियों के अधिकारों का ध्यान रखते हुए वहां की व्यवस्था को सही कर सकते हैं। एसे में मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि उनको विदेशी सैनिकों की क्यों ज़रूरत पड़ रही है।
क़ज़ाकिस्तान मे तेल की बढ़ती क़ीमत के बाद अशांति उत्पन्न हो गई जिसके बाद वहां पर व्यापक स्तर पर सरकार विरोधी प्रदर्शन किये गए।इस दौरान सुरक्षाबलों के हाथों 26 लोगों के मारे जाने की सूचना है जबकि इस अशांति में 3000 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।
क़ज़ाक़िस्तान के राष्ट्रपति का कहना है कि देश में जारी अशांति, एक सुनियोजित षडयंत्र का हिस्सा है जिसकी फंडिंग की जा रही है। वे इससे पहले स्वयं कह चुके हैं कि देश की स्थिति को ठीक करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने सहयोगी से सहायता मांगी है। बताया जा रहा है कि क़ज़ाक़िस्तान के हालात में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
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