क़ज़ाक़िस्तान की हिंसा में विदेशी हाथ थाः अरलान कारीन
क़ज़ाक़िस्तान के विदेशमंत्री ने बताया है कि देश में हालिया अशांति का उद्देश्य, सरकार को गिराना था।
इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार अरलान कारीन ने कहा कि हम एसे आतंकी हमले के साक्षी रहें जिसका उद्देश्य सरकार को गिराना था।
क़ज़ाक़िस्तान के न्यूज़-24 को दिये साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह काम विदेशी तत्वों से सहयोग के साथ देश के कुछ लोगों ने अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह लोग आतंकवादी थे और उन्होंने वर्तमान परिस्थिति का दुरूपयोग किया। उनका कहना था कि क़ज़ाक़िस्तान में हालिया दिनों में जो कुछ हुआ उसको क्रांति नहीं कहा जा सकता।
अरलान कारीन ने कहा कि देश ने प्रतिरोध का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि देश को अस्थिर करने के लिए जो योजना बनाई गई थी उसको राष्ट्रपति के फैसले ने विफल बना दिया।
क़ज़ाक़िस्तान के विदेशमंत्री ने कहा कि क्योंकि स्थिति बहुत ही चिंताजनक थी इसलिए राष्ट्रपति ने सीएसटीओ के सैनिकों को बुलवाया। उन्होंने बताया कि कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी आरगनाइज़ेशन के सैनिकों ने स्थिति को कंट्रोल में कर लिया इसलिए हम उनके आभारी हैं।
याद रहे कि क़ज़ाक़िस्तान में 2 जनवरी को ईंधन के मूल्यों में वृद्धि को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे जो बहुत ही कम समय में पूरे देश में फेल गए। बाद में यह सरकार विरोधी हिंसक कार्यवाहियों में बदलते गए जिनमें बड़ी संख्या में लोग हताहत और घायल हुए।
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