चीन को अमरीका की नई धमकी
चीन इंडो-पेसिफ़िक जैसे रणनीतिक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है, जिसके बाद अमरीका और चीन के बीच सुरक्षा प्रतिद्वंद्विता ने नए आयाम ले लिए हैं।
चीन ने सोलोमन आइलैंड्स के साथ एक सुरक्षा समझौता किया है, जिसके बाद अमरीका की नींद उड़ गई है और उसने चीन को धमकी दी है। इस समझौते के बाद चीन प्रशांत सागर में स्थित इस देश में नौसैनिक अड्डा बना सकता है।
अमरीका ने चीन को धमकी देते हुए कहा है कि वह उसके इस क़दम का जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है। वाशिंगटन ने सोलोमन आइलैंड्स के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू होने का एलान भी किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि अगर इस इलाक़े में चीन सैन्य निर्माण करता है और अपने सैनिकों को यहां तैनात करता है तो वाशिंगटन इसका जवाब ज़रूर देगा।
लगभग सात लाख की आबादी वाला सोलोमन आइलैंड्स, 990 द्वीप समूहों से बना एक छोटा सा देश है, जहां के कई टापुओं पर विशाल ज्वालामुखी हैं।
अमरीका और ऑस्ट्रेलिया ने इस समझौते को रुकवाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सोलोमन आइलैंड्स इसके लिए तैयार नहीं हुआ। सोलोमन आइलैंड्स के प्रधानमंत्री मानासे सोगोवारे ने कहा है कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति और सौहार्द को कोई नुक़सान नहीं पहुंचेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह समझौते की शर्तों को ज़ाहिर नहीं करेंगे। लेकिन यह तय है कि राष्ट्र हित में यह फ़ैसला लिया गया है।
समझौते के लीक हुए एक मसौदे के मुताबिक़, चीन के जंगी जहाज़ों को सोलोमन आइलैंड्स में ठहरने की इजाज़त होगी और बीजिंग तनाव की स्थिति में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है।
पिछले वर्ष नवंबर में सोलोमन आइलैंड्स में भारी विरोध हुआ था, तब विपक्ष ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री अपनी राजनीति को मज़बूत करने के लिए चीन से पैसे ले रहे हैं और वह एक विदेशी ताक़त के लिए काम कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री सोगोवारे का कहना था कि उन्होंने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध इसलिए बनाए क्योंकि चीन एक आर्थिक महाशक्ति है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चीन के इस क़दम पर अमरीका जितना भी आगबगूला हो, लेकिन इसके लिए ज़िम्मेदार ख़ुद वाशिंगटन ही है। इंडो पेसिफ़िक इलाक़े में पहले अमरीका ने आक्रामक नीति अपनाई, जिसके बाद प्रतिक्रिया स्वरूप चीन अपने हितों की सुरक्षा के लिए इस तरह के क़दम उठाने पर मजबूर हुआ है।