विश्व में बढती जा रही है खाद्यान की कमीः रिपोर्ट
यूक्रेन युद्ध के चलते विश्व में खाद्यान संकट इतना अधिक गहरा गया है कि अब वह एक गंभीर चिंता के विषय में बदल चुका है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका के राजदूत ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण खाद्य पदार्थों की कमी का संकट पैदा हो गया है।
वर्तमान समय में विश्व में लाखों लोगों के लिए खाद्य पदार्थों तक पहुंच बहुत कठिन हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन संकट ने पूरे विश्व में खाद्यान संकट को बहुत ही गंभीर चरण में पहुंचा दिया है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कमी का संकट पिछले एक दशक से जारी है। इस संकट को हवा देने में जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 और भूराजनीतिक संघर्षों की भूमिका रही है किंतु यूक्रेन युद्ध के कारण इसकी स्थति बहुत ही संवेदनशील हो चुकी है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस समय संसार में 811 मिलयन लोग रात में भूखे सोते हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 38 देशों के 44 मिलयन अर्थात 4 करोड़ 40 लाख लोग भुखमरी का शिकार हैं। इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं और ज्वार के अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों में 18 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन परिस्थतियों के कारण निर्धन देशों विशेषकर अफ्रीकी देशों में खाद्यान संकट बहुत अधिक गहरा हो गया। वर्तमान समय में अफ्रीका में 346 मिलयन लोग पूरी तरह से भुखमरी का शिकार हो चुके हैं।
यूक्रेन और रूस विश्व में गेहूं निर्यात करने वाले 5 बड़े निर्यातकों में शामिल हैं। यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी से परिवहन बाधित हुआ है। इस प्रकार से कई बंदरगाहों से गेहूं का निर्यात रुक जाने, अशांति एवं पलायन के कारण बहुत सी ज़मीनों में गेहूं की बोवाई न होने से भी खाद्यान के मूल्यों में तेज़ी से वृद्धि हुई।
अमरीकी अधिकारियों का प्रयास है कि वे विश्व में बढ़ते खाद्यान संकट का ज़िम्मेदार रूस को ठहराएं। हालांकि यूक्रेन युद्ध में अमरीकी हस्तक्षेप के कारण यह युद्ध समाप्त नहीं हो पा रहा है। इसी बीच यूक्रेन युद्ध की आड़ में अमरीका ने रूस के विरुद्ध कड़े प्रतिबंध लगाते हुए अपने घटकों को भी एसा काम करने के लिए प्रेरित किया। रूस में अमरीका के राजदूत आंतोनोफ ने अपने एक साक्षात्कार में कहा है कि उनके देश के विरुद्ध अमरीका और पश्चिम के कड़े प्रतिबंधों के कारण खाद्य पदार्थों के मूल्यों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
अपने कामों के कारण अब अमरीका और पश्चिम को भी मंहगाई का सामना है किंतु वे इसकी ज़िम्मेदारी रूस के गले पर डाल रहे हैं। बहरहाल वर्तमान समय में विश्व में खाद्य संकट के ख़तरे की घंटी बज चुकी है। अगर यह प्रक्रिया नहीं रूकती है तो संसार में लाखों लोगों को भुखमरी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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